भितरवार। नईदुनिया न्यूज

प्रदेश संगठन नेतृत्व के आह्वान पर विगत 16 अक्टूबर से भितरवार जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर रोजगार सहायकों द्वारा की जा रही सात दिवसीय कलम बंद हड़ताल जारी है। हड़ताल को विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों के अलावा सरपंच संघ ने भी समर्थन दिया है। सोमवार को रोजगार सहायक संघ के आंदोलन को भितरवार सरपंच संघ के सदस्य मुकेश भार्गव ने सरपंचों के साथ पहुंचकर समर्थन देते हुए कहा कि, शासन-प्रशासन की तमाम लोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में रोजगार सहायकों की महती भूमिका है। इनके प्रयासों से ही ग्राम में विकास और योजनाओं का क्रियान्वयन हो पाता है। कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने चुनाव से पूर्व संकल्प पत्र में यह तय किया था कि सरकार बनने के 90 दिन के भीतर रोजगार सहायकों को नियमित कर दिया जाएगा, लेकिन 10 माह बीत जाने के बाद भी कमलनाथ सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। सरकार को इनकी मांगे तत्काल प्रभाव से मानना चाहिए। इनके हड़ताल पर जाने से ग्राम का संपूर्ण विकास अवरुद्ध हो गया है। इस अवसर पर सरपंच संघ के सदस्य पपेंद्र सिंह राजे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। रोजगार सहायक उमेंद्र सिंह रावत, निरंजन जाट, दीपक पंडा, जितेंद्र खेनवार, रामकिशन शाक्य, प्रवेश झा, मित्तलाल, सोनू बाथम, अरुण शाक्य, भीकम सिंह, मुकेश, सुनील, रवि, धर्मेंद्र सिंह रावत आदि ने सरपंचों का पुष्पाहार पहनाकर स्वागत किया।

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मनरेगा के मजदूरों को नहीं मिल रहा काम

ग्राम रोजगार सहायकों कीकलम बंद हड़ताल का सबसे ज्यादा असर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम में संचालित हो रहे निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों पर पड़ रहा है। एक और दीपावली का त्योहार नजदीक है। वहीं मजदूरों को पंचायतों में काम नहीं मिल रहा। इससे उनके घरों की दीपावली फीकी होने की संभावना बनी हुई है। अगर समय रहते इन ग्रामीण मजदूरों को शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत काम नहीं मिला, तो इनका त्योहार सूखा ही निकलेगा। मजदूरों के अलावा हड़ताल का असर ग्राम विकास के अन्य कार्यों और शासन की योजनाओं के लाभार्थियों पर पड़ रहा है, इनमें जन्म मृत्यु प्रमाण-पत्र, एपीएल-बीपीएल राशनकार्ड, पात्रता, पेंशन सहित कई अन्य योजनाओं के लाभ से भी ग्रामीण वंचित हो रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network