डबरा। नईदुनिया प्रतिनिधि

गेडोल रोड पर स्थित लक्ष्मी कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन श्रीकृष्ण और रुक्मणि का विवाह धूमधाम से हुआ। विवाह उत्सव का श्रद्धालुओं ने नाच गाकर आनंद लिया।

कथाव्यास धर्म नारायण मुद्गल शास्त्री ने कहा कि रुक्मणि भगवान की माया के समान थीं। रुक्मणि ने मन ही मन निश्चित कर लिया था कि भगवान श्रीकृष्ण ही मेरे लिए योग्य पति हैं लेकिन रुक्मणि का भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था और अपने मित्र शिशुपाल से रुक्मणि का विवाह कराना चाहता था। इससे रुक्मणि को दुःख हुआ। उन्होंने अपने एक विश्वासपात्र को भगवान श्रीकृष्ण के पास भेजकर संदेशा भेजा। इसके बाद श्रीकृष्ण सेना सहित पहुंचे। उधर रुक्मणि का शिशुपाल से विवाह कराने की तैयारी हो रही थी, परंतु श्रीकृष्ण ने पहुंचकर रुक्मणि का हरण कर लिया और उसके बाद रुक्मणि के साथ श्रीकृष्ण का विवाह हुआ। कथा सुनने आए सैकड़ों श्रद्धालुओं भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मणी की झांकी के दर्शन किए। कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ रही। इसके साथ ही सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं। पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां हैं। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

Posted By: Nai Dunia News Network