तेंदूखेड़ा। नईदुनिया न्यूज

जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड में पदस्थ तहसीलदार मोनिका बाघमारे को प्रमुख सचिव ने निलंबित करने का आदेश जारी कि या है। मामला पांच वर्ष पुराना है जब वे होशंगाबाद जिले में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं। उस दौरान तहसील कार्यालय के लिपिक को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते पकड़ा था। चालान पेश होने के बाद लिपिक ने कोर्ट में दिए बयानों में होशंगाबाद में पदस्थ नायब तहसीलदार मोनिका बाघमारे का नाम ले दिया। जिसकी सूचना प्रमुख सचिव के पास आई थी। उस समय नायब तहसीलदार ने हाईकोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इसी बात से प्रमुख सचिव ने उन्हें निलंबित कर दिया जिसका आदेश अभी उन्हें लिखित में नहीं मिला। हालांकि यह आदेश 25 जनवरी को हुआ है। तहसीलदार कह रही हैं कि पीड़ित ने मेरा नाम नहीं लिया और ना ही लोकायुक्त ने मुझे आरोपित बनाया फिर भी उन्हें निलंबित कर दिया गया।

यह है मामला

वर्तमान में तेंदूखेड़ा में पदस्थ तहसीलदार मोनिका बाघमारे वर्ष 2014 में होशंगाबाद जिले के बाबई तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं। उस दौरान 26 जून को लोकायुक्त में एक कि सान अशोक कु मार सैनी ने तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू मोहन लाल कटारे पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित का कहना था कि उसकी 12 एकड़ जगह का बंटवारा होना है जिसके लिए बाबू प्रति एकड़ के हिसाब से 2 हजार रुपए मांग रहा है। कि सान बाबू को पैसे नहीं देना चाहता बल्कि उसे लोकायुक्त पुलिस से पकड़वाना चाहता है। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस ने बाबू को रिश्वत लेते पकड़ लिया था। लोकायुक्त ने पीड़ित के बयान लिए तो उसमें बाबू को ही आरोपित बनाया और चालान पेश होने के दौरान भी लोकायुक्त ने तहसीलदार को आरोपित नहीं बनाया। जब न्यायालय में बयान हुए तो बाबू ने अपना बचाव करते हुए उस समय की नायब तहसीलदार मोनिका बाघमारे पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनके कहने पर उसने पैसे लिए हैं। जिसकी सूचना न्यायालय ने राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें आरोपित बनाने की मंजूरी दे दी। इस बात की जानकारी लगते ही मोनिका बाघमारे ने हाईकोर्ट में अपने मामले को लगाया। जिसमें प्रमुख सचिव को पार्टी बनाया गया और इसीके चलते प्रमुख सचिव ने उन्हें निलंबित कर दिया।

इस मामले में जब पीड़ित के बयान हुए तो उसने कहा कि नायब तहसीलदार मोनिका बाघमारे ने उससे पैसों की मांग नहीं की और नहीं कभी उससे बात की इसलिए उनका इस मामले से कोई लेना नहीं है।

न्याय के लिए उठानी पड़ती है परेशानी

जब इस निलंबन के संबंध में तेंदूखेड़ा तहसीलदार मोनिका बाघमारे से बात की तो उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले निलंबन आदेश उनके माोबाइल पर आया है लिखित में कु छ नहीं आया। उन्होंने बताया कि जिस दिन बाबू को रिश्वत लेते पकड़ा गया उस दिन वह छुट्टी पर थीं। सबसे बड़ी बात पीड़ित ने लोकायुक्त के सामने मुझे निर्दोष बताया, लेकि न बाबू के बयानों के आधार पर विभाग ने मुझे आरोपित बनाने की स्वीकृति दे दी। जिसके चलते उन्होंने इस मामले को हाईकोर्ट में लगाया और न्यायालय ने विभाग प्रमुख को ही पार्टी बनाया था इसलिए उनका निलंबन कि या गया है। उनका कहना है कि मुझे कोर्ट से स्टे मिल सकता है, लेकि न वह न्याय की लड़ाई लड़ेंगी। यदि मुझे लोकायुक्त ने आरोपित बनाया होता तो चालान पेश होते समय वे निलंबित होतीं।

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