ओपी सोनी

दमोह। नईदुनिया प्रतिनिधि

आज के परिवेश में सोशल मीडिया या मोबाइल जहां परिवारों के बिखराव का बड़ा कारण माना जा रहा है, वहीं शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक दंपती सोशल मीडिया के कारण एक हो गए। बीते पांच सालों से अलग हो चुके पति-पत्नी को व्हाट्सएप ने मिला दिया और दोनों ने प्रधान न्यायधीश के सामने एक दूसरे को हार पहनाकर वचन दिया कि अब वे हमेशा साथ रहेंगे।

शहर के बड़ापुरा निवासी दीपक अहिरवार और विशाखा अहिरवार का विवाह 2014 में हुआ था। दो माह में ही उनके रिश्तों में खटास आ गई और दोनों अलग रहने लगे। इस बीच उनका विवाद कोर्ट तक पहुंच गया और साथ रहने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई। एक साल पहले अचानक ही दोनों ने व्हाट्सएप पर चैटिंग शुरू की और उनके बीच संवाद शुरू हो गया। कई दिनों तक दोनों एक दूसरे की खामियां गिनाते रहे, लेकिन इस दौरान उनके बीच बातचीत बंद नहीं हुई। शनिवार को जिला न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में दोनों ने एक साथ रहने का फै सला कर लिया। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राजीव सिंह प्रधान और सुलहकर्ता के रूप में मौजूद अधिवक्ता मनीष नगाइच और परवीन खान के सामने दोनों ने सुलह करते हुए एक दूसरे का हार पहनाया।

वीडियो कॉलिंग कर तुड़वाया करवा चौथ का व्रत

व्हाट्सएप पर चैटिंग के दौरान रिश्ते की बर्फ पिघली और पत्नी ने कई बार पति से सुलह के लिए कहा। लेकिन पति इस बात से खफा था कि उसने दोनों के बीच के विवाद में उसकी मां, भाई, भाभी को कोर्ट में खसीटा। आखिरकार धीरे-धीरे दोनों के बीच गिले-शिकवे दूर हो गए। इसी वर्ष पत्नी विशाखा ने करवा चौथ का व्रत रखा। दीपक ससुराल नहीं जाना चाहता था, इसलिए उसने व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए पत्नी को अपना चेहरा दिखाया और विशाखा ने अपना व्रत तोड़ा। कुछ दिन बाद दोनों ने तय किया कि अब वे दोनों पुरानी बातें भूलकर एक साथ रहेंगे।

हार पहनाकर कहा, अब नहीं होंगे जुदा

शनिवार को लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय में दोनों का मामला पहुंचा। प्रधान न्यायाधीश श्री सिंह ने दोनों का पक्ष सुना। इस दौरान अधिवक्ता मनीष नगाइच और परवीन ने उनके बीच सुलह करने का जोर दिया और अंत में दोनों एक दूसरे के साथ रहने के लिए सहमत हो गए। इस दौरान न्यायाधीश श्री सिंह ने दोनों से कहा कि पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। उन बातों को अपने तक ही रखना चाहिए। परिवार के लोगों को अपने मामूली विवाद में शामिल नहीं करना चाहिए, नहीं तो विवाद खत्म होने के बजाय बढ़ जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि आप दोनों के बीच जो अच्छा समय होता है, उसे अपने परिवार के साथ शेयर करें, ताकि उन्हें ये लगे कि उनके बच्चे एक दूसरे के साथ खुश हैं। न्यायाधीश की सीख को स्वीकार करते हुए दीपक और विशाखा ने कहा कि अब वे कभी जुदा नहीं होंगे। इसके बाद न्यायाधीश व अधिवक्ताओं ने अपने सामने ही दोनों को मालाएं लाकर दीं और कहा कि एक दूसरे को वरमाला समझकर मालाएं पहनाएं और आज से एक नए जीवन की शुरुआत करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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