सिग्रामपुर। गांव में बंदरों का आंतक बढ़ता ही जा रहा है। जिससे ग्रामीण और बच्चे दहशत में रहते हैं, लेकि न वनविभाग के द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा। स्थानीय निवासी अवधेश जैन, भानू ठाकु र ने बताया कि बंदरों के आतंक से लोग घर गृहस्थी का कीमती सामान, बर्तन, कपड़े संभालकर रख पाना भी मुशिकल हो रहा है। छतों पर रखा सामान, डिश टीवी यहां तक कि कच्चे छप्पर को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सड़क पर चलने वाले लोगों के हाथ से बंदर सामग्री झपटकर ले जाते हैं। इस समय करीब 35 से 40 बंदरों का आतंक गांव में बना हुआ है। जिससे अफरातफरी व दहशत का माहौल निर्मित हो जाता। बंदरों के आतंक से ग्रामीण विगत वर्षों से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों को लिखित व मौखिक रुप से इस समस्या से अवगत करा चुके हैं इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्यामसुंदर विश्वकर्मा ने बताया कि हमने सीएम हैल्पलाइन पर भी शिकायत की है, लेकि न फिर भी निराकरण नहीं निकला। महिलाएं, बच्चे घर की छतों पर जाने से घबराते हैं। बच्चे बंदरों के भय से छतों पर नहीं जा रहे हैं दिनों दिन बंदरो संख्या बढ़ती जा रही है ग्रामीण अवधेश जैन, श्याम सुंदर विश्वकर्मा, दिनेश साहू, अंकि त, नरेंद्र जैन, कपिल जैन आदि ने वनविभाग से मांग की है कि बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए। सिग्रामपुर रेंजर बीएस राजपूत का कहना कि गांव में बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलवाने के लिए बंदरों को पकड़ने वाली टीम को बुलाकर पकड़ा जाएगा और जंगल में छोड़ा जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network