दमोह (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्ष 2018 में हुए जिले के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में अब एक नया मामला सामने आया है। इस बार आरोपितों ने जिला सत्र न्यायाधीश के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं लगाते हुए मांग की थी कि हटा न्यायालय में चले रही उनके मामले की सुनवाई कि सी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित कर दी जाए। इस याचिका में उन्होंने यह भी उल्लेख कि या था कि हटा पीठासीन से उन्हें उचित न्याय की उम्मीद नहीं है, क्योंकि उनका झुकाव दूसरे पक्ष की तरफ साफ दिख रहा है। हालांकि गुरुवार को जिला सत्र न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया और दोनों को ये आदेश भी जारी कि या कि वे याचिका कास्ट के तहत दो-दो हजार रुपये की राशि फरियादी महेश चौरसिया को अदा करें।

ज्ञात हो कि करीब दो साल पहले हटा निवासी कांग्रेसी नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या हो गई थी। उनके इस हत्याकांड में पथरिया विधायक रामबाई परिहार के पति गोविंद सिंह, देवर कौशलेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटैल के बेटे इंधपाल के अलावा अन्य को नामजद आरोपित बनाया गया था। इस मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी थी, लेकि न फरारी के दौरान ही पुलिस की पुर्न विवेचना में विधायक पति गोविंद सिंह का नाम आरोपितों की सूची से हटा दिया गया था, लेकि न अब हटा न्यायालय ने सुनवाई करते हुए फिर से गोविंद सिंह को आरोपित मान लिया है और उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए समय देने के साथ ही उसका गिरफ्तारी वारंट भी जारी कि या है। हालांकि कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही गोविंद सिंह फरार हो गया है। इस हत्याकांड मामले की सुनवाई हटा न्यायालय में चल रही है। अभी तक आरोपितों की गवाही, पीड़ित पक्ष द्वारा उनकी पहचान व प्रकरण से जुड़ी अन्य प्रक्रिया हो चुकी है। इसी दौरान पीड़ित पक्ष ने न्यायाधीश से मांग की थी कि इस मामले में गोविंद सिंह भी आरोपित है और न्यायालय उसे आरोपितों की सूची में शामिल कर उसे न्यायालय में पेश करे। पीड़ित पक्ष के अनुरोध के बाद न्यायालय ने मामले को परखा और उसके बाद गोविंद सिंह को भी आरोपित मान लिया है।

पीठासीन अधिकारी पर लगाए गंभीर आक्षेप : हत्याकांड के आरोपितों ने अलग-अलग दो याचिकाएं पेश करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश से मांग की थी कि उनके मामले की सुनवाई हटा न्यायालय से स्थानांतरित कर कि सी अन्य न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा कराई जाए। आरोपितों ने अपने आवेदनों में उल्लेख कि या था कि हटा के जिन पीठासीन अधिकारी द्वारा उनके मामले की सुनवाई की जा रही है, उन्हें उनसे न्याय की उम्मीद नहीं है, क्योंकि संबंधित पीठासीन अधिकारी द्वारा दूसरे पक्ष के समर्थन में कार्य कि या जा रहा है। उन्होंने कु छ उदाहरण भी याचिका में लिए हैं, जिसमें से एक में कहा गया है कि जब उन्हें पहचान करने के लिए न्यायालय में लाया गया तो देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड के साक्षी ने संदीप नाम के युवक को कौशलेंद्र सिंह उर्फ चंदू सिंह के रुप में पहचाना, लेकिन इसके बाद भी साक्षी को पर्याप्त अवसर दिया गया और उसे इशारे से कौशलेंद्र को पहचाने का अवसर दिया गया। इसके अलावा आरोपित पक्ष ने यह भी आरोप लगाए हैं कि न्यायालय की कार्‌रवाई के दौरान उनके पक्ष के अधिवक्ताओं को न्यायालय में जाने नहीं दिया जाता, जबकि दूसरे पक्ष के कई अधिकवक्ता वहां मौजूद रहते हैं। कार्रवाई के दौरान इशारे कि ए जाते हैं, ताकि उनके मनमाफिक सब हो सके ।

कई आरोप लगाकर यह की थी मांग : इस तरह के कई गंभीर आरोप आरोपितों द्वारा लगाकर मांग की गई थी कि उनके मामले की सुनवाई कि सी अन्य कोर्ट में स्थानांरित की जाए, लेकि न जिला सत्र न्यायाधीश ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद उन दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही दोनों याचिकाकर्ताओं को याचिका कास्ट के तहत आदेश दिया गया कि वह दोनों दो-दो हजार रुपये की राशि पीड़ित पक्ष को अदा करें। शासन की ओर से इस मामले की पैरवी डीपीओ बीएम शर्मा और पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता मनीष नगाइच ने की अधिवक्ता श्री नगाइच ने बताया कि न्यायाधीश ने आरोपितों की दोनों याचिकाओं को निरस्त करते हुए ऐसे आरोपितों द्वारा किसी भी पीठासीन न्यायाधीश के खिलाफ आक्षेपों को विधि में दंडात्मक, मानहानिकारक होने की तल्ख टिप्पणी भी की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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