नोहटा। पयुर्षण पर्व के चलते नोहटा में स्थित तीनों जैन मंदिरों में नित्य अभिषेक, शांतिधारा पूजन के कार्यक्रम कि ए जा रहे हैं और दोपहर को शांति विधान का आयोजन हो रहा है। जिसमें बालक, बालिका, पुरुष, महिलाएं इस धार्मिक आयोजन में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर अपना जीवन सफल कर रहे हैं। नोहटा के मंदिरों के अलावा दिगंबर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र में आचार्य निर्भय सागर के शिष्य मुनि शिवदत सागर व हेमदत्त सागर के सानिध्य में सुबह पांच से छह बजे तक योग साधना शिविर का आयोजन हो रहा है। इसके बाद सांगानेर से आए विद्वान शुयश जैन शास्त्री द्वारा संगीतमय पूजन कराया जा रहा है। सोमवार को प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य अशोक कु मार जैन मंडा वाले परिवार व कोमल चंद गांगरा परिवार को मिला। शांति धारा के बाद गुनगुन जैन, परी जैन, आगम जैन, अनु जैन द्वारा तत्वार्थ सूत्र का वाचन कि या गया। वाचन के बाद मुनि हेमदत्त सागर व मुनि शिवदत्त सागर द्वारा प्रवचन कहे कए। उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया कि लोभ और इच्छा से तृष्णा बढ़ती है जिसकी पूर्ति कर पाना संभव नहीं है। सुचिता का यह पावन धर्म इसी लोभ तृष्णा पर कु ठाराघात करता है। आदमी का लोभ कभी खत्म नहीं होता कहने का मतलब है जिसके पास हजारों की संपत्ति है वह लखपति बनना चाहता है और जिसके पास लाखों हैं वह करोड़पति बनना चाहता है। लालच कभी कि सी का कम नहीं होता। शाम सात बजे से आरती का आयोजन हुआ जिसमें उपस्थित श्रद्धालु झूम कर नाचे। आरती के बाद भजन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें भाग लेने वाली सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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