दमोह, नईदुनिया प्रतिनिध, Damoh News। बटियागढ़ ब्लाक के लोगों को पथरिया जनपद में आने जाने की सुविधा के लिए सुनार नदी पर चकेरी घाट में पुल का निर्माण कराया जा रहा, लेकिन पुल तीन साल में भी नहीं बन सका। जबकि इस पुल का निर्माण डेढ़ वर्ष पहले हो जाना चाहिए था। जल संसाधन विभाग की उदासीनता के चलते बड़ी परियोजना अधर में लटकी पड़ी हैं। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर काम को लटकाए रहते हैं।

जिले के बटियागढ़ जनपद के जो गांव सुनार नदी के किनारे बसे हैं, यहां से दमोह, पथरिया, गढ़ाकोटा समेत कई प्रमुख स्थानों की दूरी कम पड़ती है। नदी होने की वजह से तमाम लोग नाव के सहारे दूसरी तरफ जाकर कोई अन्य साधन पकड़ते हैं, तब वह अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। दमोह होकर जाने में यात्रियों को अधिक किराया खर्च करना पड़ता है साथ ही दूरी भी अधिक रहती है। जिसको देखते हुए चकेरी घाट पर पुल बनवाने की मांग काफी समय से चल रही थी। फरवरी 2017 में पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया पथरिया के पूर्व विधायक लखन पटेल ने पुल का शिलान्यास किया था। इस पुल को राज्य योजना से बनाया जाना था। पुल निर्माण की लागत लगभग 10 करोड रुपये है।

दिसम्बर 2017 में पुल निर्माण का कार्य शुरू कराया गया था। पहले तो कुछ महीने तक तेजी दिखाई गई, लेकिन कुछ समय बाद मानो इस कार्य पर ब्रेक लग गया। निर्माण कार्य इतनी धीमी गति से हुआ कि तीन वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी पुल नहीं बन सका है। जबकि पुल को मार्च 2019 में बन जाना चाहिए था। इस लापरवाही का खामियाजा तहसील की जनता को भुगतना पड़ रहा है। समय काफी हो जाने के कारण अब निर्माण सामग्री की लागत भी बढ़ गई होगी, जिससे कार्यदायी संस्था रिवाइज स्टीमेट तैयार करने में लगी हुई है। लोग अभी तक नाव के सहारे और पैदल चलके नदी पार कर आने जाने के लिए मजबूर हैं। नाव का सफर करने में कई दुर्घटनाएं भी होने की आशंका बनी रहती है, फिर भी पुल को समय से पूरा करने की जरूरत नहीं समझी गई। कार्यदायी संस्था अभी तक यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर पुल कब तक बनकर तैयार हो जाएगा।

चकेरी घाट में संक्रान्ति पर 14 दिन का मेला भी लगता है लोग मेला देखने के लिए नदी नाव के सहारे यहां पहुंचते हैं या फिर उनको पैदल चलना मजबूरी बन जाती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शीघ्र ही इस पुल का निर्माण कराया जाए ताकि मेले में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

Posted By: Prashant Pandey

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