दमोह, नईदुनिया प्रतिनिधि। ब्लैक फंगस नामक बीमारी से जिले में पहली मौत होने का मामला सामने आया

है। इस बीमारी से पीडि़त मरीज की मौत नागपुर के एक निजी अस्पताल में हुई है। एक आंख निकालने के बाद भी मरीज में संक्रमण बढ़ता ही जा रहा था और आखिरकार उसकी जान चली गई। इसके अलावा अन्य मरीज भी इस भयावह बीमारी से जूझ रहे हैं जिनका इलाज प्रदेश की अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है और पांच मरीजों की आखों की रोशनी चली गई। जिले में अभी तक नौ मामले ब्लैक फंगस बीमारी के सामने आए हैं जिसमें तीन मरीज अन्य जिलों के हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद भी लोग बेवजह घूम रहे हैं वह कोरोना की दूसरी लहर की गंभीरता को नहीं समझ रहे जबकि सैकड़ों लोग दूसरी लहर में अपनी जान गवा चुके हैं।

11 दिन से नागपुर में चल रहा था इलाज : ब्लैक फंगस केवल उन्हीं मरीजों को हुआ है जिन्हें पहले कोरोना हुआ था और उन्हें आक्सीजन दी गई थी। इन मरीजों की आंखों में पहले खुजलाहट हुई फिर धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चली गई और काला धब्बा बन गया। ब्लैक फंगस बीमारी से जिले में पहली मौत 38 वर्षीय जबलपुर नाका निवासी युवक की हुई है। वह पहले कोरोना पाजीटिव हुआ था उसके बाद वह ठीक हो गया, लेकिन इसके बाद आंखों में इनफेक्शन होने लगा और बाद में पता चला कि यह ब्लैक फंगस है। पहले युवक को जबलपुर में भर्ती किया गया जहां तीन दिन तक इलाज के बाद उसे आराम नहीं मिला तो उसे नागपुर ले जाया गया जहां आठ दिन इलाज के बाद एक आंख निकालनी पड़ी फिर भी उसकी जान नहीं बच सकी और गुरुवार को उसकी मौत हो गई।

यह हैं लक्षण : ब्लैक फंगस इंफेक्शन मुख्यत: फेफड़े में होता है इससे ग्रस्त रोगियों में आंखों के आसपास सूजन आ जाती है और सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या हो जाती है। खांसी, बुखार, उल्टी और पेट में दर्द जैसी शिकायतें भी इसके लक्षण में आते हैं। त्वचा में इंफेक्शन होने पर कालापन आ जाता है यह फंगस रोगियों के दिमाग पर भी गहरा असर डालता है। ब्लैक फंगस संक्रमण से प्रभावित मरीज की आंख में दर्द और लालीपन या नाक में दर्द के साथ बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टी व मानसिक स्थिति ठीक न होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

अलग-अलग अस्पतालों में करा रहे इलाज : जिले में जिन पांच मरीजों की आंखों की रोशनी गई है उनमें 34 साल का मरीज हटा का रहने वाला है उसे 11 अप्रैल को शासकीय अस्पताल हटा में कोविड का इलाज कराने के लिए भर्ती कराया गया था। इस बीच मरीज को दाई आंख से दिखना बंद हो गया और पलक लटक गई। मरीज को म्यूकार्माइकोसिस की संभावना व्यक्त की गई है एमआरआ व अन्य जांचों और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया था। दमोह निवासी एक 45 साल के मरीज को इलाज के लिए इंदौर ले जाया गया उसकी बाईं आंख में फंगस हो गया है जहां पर उसकी आंख निकाल दी है। दमोह के राजीव गांधी कालोनी पन्ना जिले का रहने वाला मरीज दमोह में इलाज करा रहा है उसकी आंख की रोशनी भी कुछ इसी तरह चली गई इलाज न मिलने

पर स्वजन उसे भोपाल ले गए।

यह है इंफेक्शन का कारण : नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश राय ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से उबर चुके लोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में शुगर के मरीजों पर एक नया खतरा आना शुरू हो गया है। पिछले 10 दिन के अंदर ब्लैक फंगस इंफेक्शन के नौ मामले सामने आए जिनमें छह दमोह जिले के मरीज थे। जिन्हें नागपुर, जबलपुर, भोपाल और इंदौर भेजा गया है। ब्लैक फंगस संक्रमित मरीजों की आंखों के साथ-साथ गाल पर भी इसका असर पड़ रहा है। ऐसे में तुरंत आपरेशन करके आंख निकालनी पड़ती है। म्यूकरमाइकोसिस से पीड़ित मरीज की दमोह में इलाज की सुविधा नहीं है। वहीं सीएमएचओ डॉ. संगीता त्रिवेदी ने बताया कि ब्लैक फंगस के कारण जबलपुर नाका निवासी एक युवक की मौत नागपुर में हुई है यह जिले में पहली मौत का मामला है। इसे रोकने के लिए एम्फोटिसिरीन बी 50 एमजी इंजेक्शन की जरूरत होती है, लेकिन यह इंजेक्शन फिलहाल दमोह उपलब्ध नहीं है। इसका संक्रमण सायनस, फेंफड़े और ब्रेन तक फैल रहा है इसमें सायनस और फेंफड़े का आपरेशन और इंजेक्शन से इलाज संभव है, लेकिन ब्रेन तक संक्रमण पहंचने पर कुछ नहीं किया जा सकता। इसलिए मरीजों को तुरंत इलाज के लिए संपर्क करना चाहिए।

दूसरी लहर से भी नहीं डर रहे लोग : कोरोना की दूसरी लहर कितनी भयावह है यह किसी से छिपा नहीं है इसके बाद भी लोग अपनी जान की परवाह नहीं कर रहे। प्रतिदिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लोगों पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन लोग बेवजह सड़कों पर घूम रहे हैं और व्यापारी चोरी छिपे अपनी दुकान चला रहे हैं। गुरुवार को भी बरंडा से लेकर तमिरयाई तक यही आलम था सैकड़ों लोग सड़कों पर घूम रहे थे। घंटाघर पर पुलिस के द्वारा बेवजह घूमने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा रही थी और पास में ही बरंडा के पास व्यापारी अपनी दुकान संचालित कर रहे थे।

Posted By: Brajesh Shukla

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