दमोह, नईदुनिया प्रतिनिधि। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव बुधवार की रात पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के घर पहुंचे। जहां उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया से मुलाकात की। अचानक इस तरह एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का श्री मलैया के घर पहुंचना लोगों को हैरान कर गया जिसके बाद कई तरह की राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि अरुण यादव और पूर्व वित्त मंत्री के पुत्र सिद्धार्थ मलैया ने इसे सामान्य मुलाकात बताया है। घर आने के पूर्व पूर्व वित्त मंत्री के पुत्र अरुण यादव को लेने सर्किट हाउस भी पहुंचे थे। श्री मलैया के घर पहुंचे अरुण यादव ने बताया कि वह जबलपुर में कांग्रेस विधायक संजय यादव की बेटे के निधन पर श्रद्धांजलि देने गए थे। वहां से वापस लौटते समय दमोह पहुंचे हैं। क्योंकि उन्हें पता चला था कि पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया का स्वास्थ्य खराब है और वे उनके पिताजी के पुराने मित्र भी हैं इसलिए उनका हालचाल जानने उनके घर पहुंच गए। वहीं पूर्व वित्त मंत्री के पुत्र सिद्धार्थ मलैया ने बताया कि अरुण यादव स्कूल टाइम से उनके सीनियर रहे हैं। उन्होंने पिताजी का हालचाल जानने के लिए घर आने के लिए कहा था। तब उन्होंने बताया था कि उनके पिता यानी जयंत मलैया भोपाल में हैं, लेकिन आपको घर जरूर आना है इसलिए वह उनके आग्रह पर घर पहुंच गए। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी पूर्व वित्त मंत्री के घर मौजूद थे कुछ देर रुकने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री भोपाल की ओर रवाना हो गए।

निकाले जा रहे राजनीतिक मायने : इस मुलाकात के राजनीतिक मायने इसलिए भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के पुत्र सिद्धार्थ मलैया और उनके साथ पांच मंडल अध्यक्ष भाजपा से निलंबित हो चुके हैं। मलैया पर दमोह विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा प्रत्यासी राहुल सिंह ने कई प्रकार के आरोप लगाए थे। जिसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा यह कार्रवाई की थी। साथ ही पूर्व वित्त मंत्री को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। हालांकि उन पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन पूर्व मंत्री के पुत्र आज भी भाजपा से निलंबित चल रहे हैं और उनके साथ पांच मंडल अध्यक्ष भी निलंबित हैं। गौरतलब है कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान सिद्धार्थ मलैया ने भी भाजपा की ओर से अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी, लेकिन भाजपा ने कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए राहुल सिंह को दमोह से अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वह चुनाव हार गए जिसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ और पूर्व मंत्री के पुत्र पर कार्रवाई हो गई।

Posted By: Brajesh Shukla

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