दमोह(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के किसान मूंग, उड़द का समर्थन मूल्य ना मिल पाने की वजह से मनमाने

दामों में फसल बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं हैरानी की बात तो यह है कि मूंग फसल को आए डेढ़ से दो महीने से भी ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक शासन की ओर से खरीदी भी प्रारंभ नहीं की जा सकी है। 15 जुलाई से जब आधा माह बीत गया था तब पंजीयन प्रारंभ कराया गया था। पंजीयन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी अब तक यह निश्चित नहीं है कि खरीदी की प्रक्रिया कब शुरू होगी। यही वजह है कि किसानों ने भी इसमें किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखाई है। बारिश शुरू होने के बाद फसल को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में बचने के लिए अधिकांश किसानों ने व्यापारियों को मनमाने दामों में ही मूंग उड़द बेच दी है।

दमोह जिले के किसान राजाराम यादव ने बताया कि उन्होंने अपनी मूंग प्रति क्विंटल 5500 रुपये के भाव में बेची है जबकि सरकार के द्वारा 7275 रुपए समर्थन मूल्य रखा गया है। इस तरह से किसानों को हजारों रुपये का नुकसान सहन कर अपनी फसल को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसी तरह से पथरिया के राघवेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी मूंग की कीमत 5700 रुपये मिली है। किसानों ने बताया कि सोसाइटी बंद होने की वजह से उन्हें मंडी में आकर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश का मौसम भी किसानों को सस्ती कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर कर रहा है। कई किसान तो ऐसे भी हैं जो अच्छी लागत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

जिले में इस बार मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है किसान लंबे समय से शासकीय खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन मूंग खरीदी के लिए पंजीयन एक से डेढ़ माह विलंब से प्रारंभ होने की वजह से खरीफ फसलों की खेती में लगने वाले जरूरी पैसों के लिए किसान मजबूरन अपनी फसल को कम दाम पर बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिक उत्पादन के कारण बाजार में भाव चार हजार 500 रुपये से छह हजार रुपये के बीच ही मिल रहा है इससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। जिला किसान संघ अध्यक्ष रमेश यादव ने बताया कि समर्थन मूल्य पर जो उड़दए मूंग की खरीदी की जाना है वह इस बार देरी से हो रही है। लगभग 75 प्रतिशत किसानों ने अपनी उपज बेच दी है अब सिर्फ 25 प्रतिशत किसानों के पास ही कुछ उपज बची है। अब देखना यह है कि इनकी उपज कब तक खरीदी जाती है

Posted By: Nai Dunia News Network

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