दमोह(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर ग्राम पंचायतों में सरपंच एवं पंच के पदों पर निर्वाचित इन महिलाओं के स्थान पर उनके पतियों द्वारा शपथ लिए जाने के मामले प्रकाश में आने के उपरांत नईदुनिया द्वारा इन्हें विशेष रूप से प्रकाशित किया गया था। जिसके उपरांत कलेक्टर एसकृष्ण चैतन्य द्वारा मामले की जांच कराए जाने पर जनपद पंचायत हटा की ग्राम पंचायत गैसाबाद के सचिव को सरपंच एवं सभी महिला पंचों के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई जाने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर के निर्देश के उपरांत सीईओ जनपद पंचायत द्वारा इस मामले में जांच की गई थी जिसमें जांच के उपरांत मामला सही पाए जाने पर प्रतिवेदन दिए जाने के उपरांत जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय श्रीवास्तव द्वारा सचिन धुनसिंह राजपूत को निलंबित किया गया।

नारी सशक्तिकरण का मजाक : नारी सशक्तिकरण एक ऐसी पहल है जिसे समूचे देश में बेहद जोर जोर से क्रियान्वित किया जा रहा है विशेषकर राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाने के लिए लोकतांत्रिक निकायों में उनके लिए सीटें आरक्षित की जा रही हैं। त्रअनेक स्थानों पर तो ऐसा है कि पुरुषों के स्थान पर भी महिलाओं को निर्वाचित कर उन्हें स्थान दिया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी हैरान की तब होती है। जब इस सार्थक और गंभीर पहल को भी सार्वजनिक रूप से भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। इसे क्या मजाक नहीं कहां जाएगा कि पंचायत चुनाव में निर्वाचित तो महिलाएं हुई हैं लेकिन उनके स्थान पर शपथ लेने वाले उनके पति शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचकर शपथ ले रहे हैं। यह भी हैरत में डालने वाली बात है कि ग्राम पंचायत के सचिव ऐसे अनाधिकृत व्यक्तियों को भी शपथ दिला रहे हैं। ऐसे दमोह जिले में अनेक मामले प्रकाश में आ रहे हैं जिसमें महिलाओं के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई जा रही है।

महिला सशक्तिकरण के नारे और दावे की खुलेआम दमोह जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं एक ओर जहां केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्यक्रम चला रही है जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके इन सबके बीच महिला सशक्तिकरण की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मामला दमोह जिले की अनेक जनपद पंचायतों की ग्राम पंचायतों का है जहां पर नवनिर्वाचित सरपंच, उप सरपंच और पंच के शपथ ग्रहण समारोह ग्राम पंचायत कार्यालय में आयोजित किए गए जिसमें शपथ ग्रहण समारोह में महिला सरपंच, उपसरपंच या पंचो के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई जा रही है। इस प्रकार का मामला एक ग्राम पंचायत में ही नहीं है बल्कि अनेक ग्राम पंचायतों में इस प्रकार की स्थितियां निर्मित हो रही हैं। इन ग्राम पंचायतों के सचिव इस मामले में गोलमोल जवाब देकर मामले की इतिश्री कर रहे हैं और मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। अब ऐसे में विचार करने वाली बात यह है कि क्या भारत के संविधान में ऐसा कहीं उल्लेख है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि की जगह कोई दूसरा व्यक्ति या प्रतिनिधि शपथ लें। यह लापरवाही जिले की अनेक पंचायतों में सामने आई है अब देखना होगा कि प्रशासनिक रूप से इन गंभीर मामलों में अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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