सुनील गौतम, दमोह। नारी सशक्तिकरण एक ऐसी पहल है, जिसे समूचे देश में बेहद जोर-शोर से क्रियान्वित किया जा रहा है, विशेषकर राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाने के लिए लोकतांत्रिक निकायों में उनके लिए सीटें आरक्षित की जा रही हैं और अनेक स्थानों पर तो ऐसा है कि पुरुषों के स्थान पर भी महिलाओं को निर्वाचित कर उन्हें स्थान दिया जा रहा है। इसके बाद भी हैरानी तब होती है जब इस सार्थक और गंभीर पहल को भी सार्वजनिक रूप से ठेंगा दिखाया जा रहा है। इसे क्या मजाक नहीं कहा जाएगा कि पंचायत चुनाव में निर्वाचित तो महिलाएं हुई हैं, लेकिन उनके स्थान पर शपथ उनके पति शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचकर ले रहे हैं। यह भी हैरत में डालने वाली बात है कि ग्राम पंचायत के सचिव भी ऐसे अनाधिकृत व्यक्तियों को शपथ दिला रहे हैं। दमोह जिले में ऐसे अनेक मामले प्रकाश में आ रहे हैं, जिसमें महिलाओं के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई जा रही है।

महिला सशक्तिकरण के नारे और दावे की खुलेआम दमोह जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक ओर जहां केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्यक्रम चला रही है, जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके, लेकिन इन सबके बीच महिला सशक्तिकरण की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मामला दमोह जिले की अनेक जनपद पंचायतों की ग्राम पंचायतों का है, जहां पर नवनिर्वाचित सरपंच, उप सरपंच और पंच के शपथ ग्रहण समारोह ग्राम पंचायत कार्यालय में आयोजित किए गए। शपथ ग्रहण समारोह में महिला सरपंच, उपसरपंच या पंचो के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई जा रही है और इस प्रकार का मामला एक ग्राम पंचायत में नहीं है, बल्कि अनेक ग्राम पंचायतों में इस प्रकार की स्थितियां निर्मित हो रही हैं। इन ग्राम पंचायतों के सचिव इस मामले में गोलमोल जवाब देकर मामले की इतिश्री कर रहे हैं और मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। अब ऐसे में विचार करने वाली बात यह है कि क्या भारत के संविधान में ऐसा कहीं उल्लेख है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि की जगह कोई दूसरा व्यक्ति या प्रतिनिधि शपथ लें। यह घोर लापरवाही दमोह जिले की अनेक पंचायतों में सामने आई है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक रूप से इस प्रकार के गंभीर मामलों में अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं।

शत प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधि

दमोह जिले की जिला पंचायत को ही देखें तो जिला पंचायत के 15 सदस्यों में 12 महिला सदस्य निर्वाचित होकर आई हैं। चाहे वह महिलाओं के लिए आरक्षित हो या पुरुषों के लिए, लेकिन 12 सदस्यों के निर्वाचित होकर आने से महिला सशक्तिकरण 75 प्रतिशत सफल रहा है। इसके उपरांत सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर महिला ही रंजीता पटेल और उपाध्यक्ष पद पर भी डा. मंजू देवलिया कटारे को निर्वाचित किया गया। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद दमोह में भी अध्यक्ष का पद पुरुष पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था, लेकिन जिस प्रकार से महिला सशक्तिकरण के दौर में 39 पार्षदों में से 23 महिला पार्षदों ने जहां निर्वाचित होकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया, वही पिछड़ा वर्ग पुरुष के लिए आरक्षित अध्यक्ष वर्ग में महिला वर्ग ने ही मंजू वीरेंद्र राय अध्यक्ष और सुषमा विक्रम सिह उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित होकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया।

इन पंचायतों में ली निर्वाचित महिलाओं के स्थान पर उनके प‍तियों ने शपथ

दमोह जिले की जनपद पंचायत हटा की ग्राम पंचायत गैसाबाद, पिपरिया किरऊ, ग्राम पंचायत पटेरा की गाता सहित अनेक ऐसी पंचायतें हैं, जहां पर महिला सरपंच, उपसरपंच, पंचों के स्थान पर उनके पतियों ने शपथ ली है।

इनका कहना है

जिले की जिस भी ग्राम पंचायत में इस प्रकार के मामले प्रकाश में आए हैं, उन पंचायतों की जनपद सीईओ के माध्यम से रिपोर्ट मंगाई गई है और उन ग्राम पंचायतों के सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी तथा शपथ असली जनप्रतिनिधि को ही दिलाई जाएगी।

-एसकृष्ण चैतन्य, कलेक्टर, दमोह

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close