दमोह। सोमवार शाम करीब चार बजे, शहर के पलंदी चौराहा व पथरिया फाटक क्षेत्र में केरोसिन की कालाबाजारी करने वाले दो आरोपितों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनके घरों से पुलिस को करीब तीन सौ लीटर केरोसिन मिला, जो नियम विरुद्ध तरीके से कालाबाजारी करने के लिए रखा गया था। मुखबिर की सूचना के बाद कोतवाली टीआई एचआर पांडेय उन दोनों ठिकानों पर पहुंचे और जब घर की तलाशी ली तो वहां बड़ी मात्रा में केरोसिन का स्टॉक मिला। पुलिस ने पलंदी चौराहा निवासी संजू जैन और पथरिया फाटक क्षेत्र निवासी केशरबाई नाम की महिला से उस केरोसिन के स्टॉक की जानकारी मांगी, लेकिन उनके पास उसका कोई लीगल रिकार्ड नहीं था, जिसके बाद पुलिस ने उसे अवैध मानते हुए जब्त कर लिया और दोनो आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया।

ज्ञात हो कि लोगों की र्प्रमुख जरूरत से जुड़े केरोसिन की कालाबाजारी इस समय दमोह में तेजी से हो रही है। बीते कुछ दिनों से पुलिस को भी इसकी सूचना मिल रही थी, लेकिन आरोपित पकड़ से बाहर थे। सोमवार को एसपी के पास इस कालाबाजारी की सूचना पहुंची थी, जिसके बाद उन्होंने कोतवाली टीआई एचआर पांडेय को निर्देश दिए थे कि वह केरोसिन की कालाबाजारी करने वालों को खोजकर उनपर कार्रवाई करें। टीआई श्री पांडेय ने फौरन अपने सूत्र फैलाए और कुछ ही देर में उन्हें पता चला कि शहर के एक हिस्से में कुछ लोग केरोसिन की कालाबाजारी कर रहे हैं। पुलिस टीम के साथ टीआई मौके पर पहुंचे और दो संदेहियों के घर पर दबिश दी, जहां से अवैध केरोसिन बरामद किया गया।

खाद्य विभाग की मिली भगत से चल रहा खेल

केरोसिन की कालाबाजारी का पूरा खेल मिलीभगत से चल रहा है, इसमें खाद्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के शामिल होने की भी संभावना है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि केरोसिन गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की प्रमुख जरूरत है और इसलिए सरकार इसे राशन कार्ड के माध्यम से वितरित करती है। बाजार में बेचा जाने वाला केरोसिन अलग रंग का होता है और उसके दाम भी राशन में मिलने वाले केरोसिन से कई गुना अधिक होते हैं। राशन दुकानों पर पहुंचने वाला केरोसिन राशन कार्ड संख्या के आधार पर ही शासन से प्राप्त होता है, लेकिन राशन कार्डधारियों को वह पूरी मात्रा में न देकर उसे ब्लैक कर दिया जाता है। नईदुनिया के सूत्रों की जानकारी के अनुसार खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की राशन दुकानों में जाने वाले केरोसिन को ब्लैक किया जाता है। सीधे केरोसिन की टंकियां ही गायब कराई जाती हैं और सरकारी गोदाम से उन टंकियों को गुप्त ठिकानों पर ले जाकर स्टॉक बनाया जाता है और वहां से फिर उसे बिचौलियों के माध्यम से ब्लैक किया जाता है। अधिकारी, कर्मचारियों की मिलीभगत इसलिए भी संभव है क्योंकि यदि राशन दुकान संचालक इस केरोसिन की चोरी करेगा तो वह पूरी टंकी अकेले गायब नहीं कर सकता, क्योंकि केरोसिन दुकान पर पहुंचने के बाद उसे वापस ले जाना संभव नहीं होता, क्योंकि राशन कार्डधारियों की नजर उसपर होती है। अभी भी शहर में कई जगह बड़ी मात्रा में केरोसिन का अवैध स्टॉक जमा करके रखा गया होगा।

पुलिस कर रही खाद्य विभाग का काम

शासन के निर्देश के कारण एसपी ने पुलिस को निर्देश दिए हैं, ताकि केरोसिन की कालाबाजारी करने वालों पर लगाम कसी जा सके, लेकिन जिस विभाग के माध्यम से केरोसिन की सप्लाई जिले में की जा रही है, उसे पता ही नहीं कि उसके द्वारा दिया जाने वाला स्टॉक कालाबाजारी के लिए कैसे पहुंच रहा है। यदि ऐसे में पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर दे तो खाद्य विभाग के पसीने छूट जाएंगे, क्योंकि पकड़े जाने वाले आरोपित यदि ये बताना शुरू कर देंगे कि उनके पास केरोसिन कहा से आता है तो पूरी कड़ियां खुल जाएंगे और पुलिस अंतिम छोर पर पहुंच जाएगी। जहां ये पता चलेगा कि आखिर कालाबाजारी के लिए सरकारी केरोसिन किसके माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। कोतवाली टीआई श्री पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे भी ऐसे कालाबाजारियों की पहचान की जा रही है। जैसे ही उनके ठिकानों का पता चलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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