कैलाश दुबे, सोनू यादव। दमोह। तेंदूखेड़ा(नईदुनिया)

ऐसे हजारों लोग हैं, जो कोरोना संक्रमणकाल में बेरोजगार हो गए। उन्हीं में शामिल हैं पूर्व अतिथि शिक्षक। इन अतिथि शिक्षकों पर अब अपने परिवार का भरण, पोषण करने संकट है। दमोह जिले में कई ऐसे पूर्व अतिथि शिक्षक हैं, जो लकड़ी, सब्जी बेच कर और मजदूरी कर रहे हैं। कोविड-19 संक्रमण के बाद स्कूलों का संचालन बंद हो गया और इसी कारण सरकारी स्कूलों में इस साल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की। अब वह सभी बेरोजगार हैं और उन्हें अपना घर चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।

परिवार चलाने बेच रहा लकड़ीः तेंदूखेड़ा ब्लॉक के कछार गांव के अतिथि शिक्षक दुर्गा आदिवासी बताते हैं कि अब हर सुबह अपनी साइकिल लेकर जंगल जाते हैं और दोपहर को साइकिल पर लकड़ी का गट्ठा लेकर बाजार में बेचते हैं और उससे जो रुपये मिलते हैं, उससे उनका घर चल रहा है। दुर्गा ने हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर अपनी एक फोटो शेयर की, जिसमें वह अपनी साइकिल पर लकड़ी का गट्ठा रखे दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास कोई काम नहीं है। अतिथि शिक्षक के रूप में पिछले छह साल से पढ़ा रहे थे। इस बार काम भी नहीं मिला। इसलिए उन्होंने लकड़ी बेचना शुरू कर दिया।

ईंटगारे के काम से हो रहा गुजाराः तेंदूखेड़ा के कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में सात साल सेवाएं देने वाले अतिथि शिक्षक गणेश आदिवासी भी मजदूरी कर रहे हैं। अब उन्होंने ईंटगारे की मजदूरी शुरू कर दी है। गणेश बताते हैं कि अतिथि शिक्षक के रूप में कई साल तक सेवा दी, लेकिन मार्च से स्कूल बंद होने पर बेरोजगार हो गया। तेजगढ़ स्कूल में रहीं अतिथि शिक्षक सीमा नामदेव अब सिलाई कर परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।

इस तरह जिले के दर्जनों अतिथि शिक्षक परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहे हैं। गणित के शिक्षक सुनील जैन अब गांव-गांव जाकर फेरी लगाकर किराना सामग्री व सब्जी बेच रहे हैं। संतोष लोधी और मनोज साहू भी सब्जी बेच रहे हैं। हिंदी के अतिथि शिक्षक रामसेवक ठाकुर पल्लेदारी कर रहे हैं।

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कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद हैं, इस कारण से अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया इस साल नहीं हो पा रही। जब तक अतिथि शिक्षक स्कूल में पढ़ाता है, वह शिक्षक है, उसके बाद तो आम आदमी हो जाता है।

एचएन नेमा, जिला शिक्षा अधिकारी दमोह

Posted By: Nai Dunia News Network

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