दमोह नईदुनिया प्रतिनिधि।

महासंक्राति पर्व पर लोगों ने शुभ मुहूर्त में आस्था की डुबकी लगाई। तेज ठंड होने के बाद भी अलसुबह उठकर लोगों ने नदी, तालाबों पर पहुंचकर स्नान किया और इसके बाद सूर्य देवता को जल अर्पित कर सुख समृद्धि की कामना की और मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए। वहीं घर में बने लड्डुओं का प्रसाद गहण किया तो वहीं बुंदेलखंडी गढ़ियाघुल्ला की मिठाई का भी स्वाद लिया। हालांकि इस बार मंदिरों में कोरोना संक्रमण का असर दिखा। शहर के प्रसिद्ध क्षेत्र जटाशंकर मंदिर में जहां संक्राति पर्व पर हजारों लोगों की भीड़ एकित्रत होती थी वहां गिने-चुने लोग ही दिखाई दिए। इसके अलावा मेला स्थल परिसर भी सुनसान रहा। दो-तीन दुकानें ही यहां लगी थी लेकिन वहां भीड़ नहीं थी। इसके अलावा जिले के अन्य मेला स्थलों पर भी इसी तरह का आलम देखने मिला।

संक्राति पर्व को लेकर घरों में सप्ताह भर पहले से तैयारियां की जाती हैं और कई प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। शुक्रवार को पर्व पर स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करने के बाद लोगों ने इन पकवानों का स्वाद लिया। संक्राति पर्व से ही सूर्य उत्तरायण भी हो जाता है और धूप की दिशा बदल जाती है। सुबह नहाने के बाद लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान का पूजन किया। शहर के जटाशंकर मंदिर, बूंदाबहू मंदिर, जागेश्वरधाम मंदिर और धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों ने भगवान शिव का पूजन किया। नईदुनिया की टीम ने जटाशंकर मंदिर पहुंचकर वहां का जायजा लिया तो भगवान के गर्भ ग्रह के गेट लगे हुए थे और कुछ श्रद्धालु बाहर से भगवान का पूजन कर रहे थे।

यह पहला मौका था जब जटाशंकर मंदिर में भीड़ नहीं थी। वरना मकर संक्राति पर्व पर यहां हजारों लोगों की भीड़ रहती है और इसके लिए पुलिस बल भी तैनात किया जाता है लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण काफी कम संख्या में लोग मंदिर पहुंचे। मंदिर के बाहर हर साल एक सप्ताह तक मेला भी भरता था जिसका आनंद लेने के लिए पूरे जिले से लोग यहां पहुंचते है। जहां कई प्रकार के झूलों के आनंद के साथ ही खाने, पीने की दुकान भी संचालित होती थी, लेकिन इस कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने पूरे प्रदेश में सभी प्रकार के मेलों पर प्रतिबंध लगाया है और इसी के चलते यहां मेला नहीं भरा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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