दमोह(नईदुनिया प्रतिनिधि)। माडल स्टेशन के नाम से पहचाने जाने वाले दमोह रेलवे स्टेशन पर ए क्लास की सुविधाएं तो उपलब्ध नहीं हो पाई लेकिन यहां जो व्यवस्था पहले से संचालित हो रही थी वह जरूर बंद हो गई है। दमोह रेलवे स्टेशन पर संचालित शासकीय कैंटीन बंद हो गई है जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे के द्वारा इतने नए नियम बना दिए हैं जिससे कैंटीन का संचालन करना मुश्किल हो गया और ठेकेदार कैंटीन को छोड़ना ही उचित समझा। अब यात्रियों को पानी की बोतल व अन्य सामग्री लेने के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर जाना पड़ रहा है। जिसके चलते यात्रियों की ट्रेन भी छूट रही है और जल्दबाजी में ट्रेन में चढ़ते समय कभी भी कोई हादसा हो सकता है लेकिन रेलवे ने यात्रियों को होने वाली असुविधा के बारे में नहीं सोचा।

गौरतलब है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक एक पर वर्ष 1975 से राम भरोसे गौतम के द्वारा कैंटीन का संचालन किया जा रहा था पिछले करीब पचास वर्षों से स्टेशन पर कैंटीन का संचालन होने से लोगों को खाने-पीने की सामग्री के साथ पानी की बोतल भी यहां उपलब्ध हो जाती थी। रेलवे के नियमों के तहत ही यहां खाद्य सामग्री का विक्रय होता था पहले कैंटीन का किराया प्रत्येक तीन माह में करीब एक लाख 80 हजार रुपये जमा करना पड़ता था लेकिन रेलवे द्वारा बनाए गए नए नियम और शर्तों के तहत यह किराया करीब एक लाख रुपये हो गया है।

कैंटीन का संचालन करने वाले विक्की गौतम ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से वह कैंटीन का संचालन कर रहे थे और रेलवे के नियमों के तहत ही खाद्य सामग्री का विक्रय करते थे यदि कोई यात्री झूठी शिकायत भी कर देता है तो उन पर 10 हजार रुपये का चालान किया जाता था उसे भी वह भर देते थे। इसके बावजूद भी रेलवे प्रबंधन के द्वारा नए नियम बना दिए और इतनी अधिक राशि ली जा रही है जिससे कैंटीन का संचालन कर पाना मुश्किल है।

कोरोना के समय बंद रहीं यात्री टं्रेने : गौरतलब हो कि वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते यात्री ट्रेने बंद हो गईं थी उसके बाद भी कैंटीन का संचालन हुआ और अभी भी सभी ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद भी यह नए नियम बना दिए गए। नए नियमों में करीब आठ वेंडर उन्हे रखने पड़ेंगे जिसका भुगतान भी वर्ष 2019 से लिया जा रहा है जिसकी कोई सूचना उन्हे नहीं दी गई जबकि दो साल से तो गिनी-चुनी ट्रेने ही चल रही हैं। इन हालातों में कैंटीन चलाना मुश्किल है। स्टेशन प्रबंधक जेएस मीणा ने बताया कि रेलवे ने नए नियम के तहत राशि बढ़ा दी है जिससे ठेकेदार ने कैंटीन का संचालन बंद कर दिया है अब यात्रियों को खाद्य सामग्री लेने के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर जाना पड़ रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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