दतिया(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में संक्रमण की दर लगभग 8 फीसद से भी कम हो गई है। संक्रमित मरीज भी निगेटिव होकर ठीक हो रहे हैं। इन सबके बावजूद जिला अस्पाल में भर्ती मरीजों की संख्या कम नहीं हुई है। अस्पताल में ठीक होने वाले मरीज कम है, जबकि घरों में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। इसी तरह प्रतिदिन होने वाले कोरोना सैंपलिग में भी पुराने मरीजों की दूसरी रिपोर्ट शामिल की जा रही है। इस कारण सैंपलिग की संख्या तो अधिक नजर आ रही है। वहीं संक्रमण की दर कम आ रही है। नई सैंपलिग की संख्या कम ही है। संक्रमण तेजी से कम हुआ है, तो इसे लेकर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है किंतु स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी चालाकी से काम लेते हुए ठीक हुए मरीजों का दूसरा व तीसरी सैंपलिंग मुख्य सैंपलिंग के जोड़ा जा रहा है। इससे सैंपलिंग की संख्या तो ज्यादा दिखाई देती है किंतु संक्रमित मरीजों की संख्या कम आ रही है। इसी तरह पिछले पांच दिनों में संक्रमण दर कम हुए है तो कंटेनमेंट जोन कम होने चाहिए परंतु उनकी संख्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।

पिछले 5 दिनों का के आंकड़े को देखें तो सैंपलिंग की बात समझ में आती है सभी जगह आरोप लगाए जा रहे हैं कि सैंपलिंग कम की जा रही है। जबकि सैंपलिंग तो उतनी ही है जितनी होनी चाहिए। मगर इन सैंपलिंग के साथ कोरोना मरीजों की 7 और 14 दिनों बाद कर आ गई रिपोर्ट को भी जोड़ा जा रहा है। इस तरह से निगेटिव आने वालों की संख्या ज्यादा हो रही है, जबकि संक्रमितों की संख्या कम आ रही है। इसकी मूल वजह कांटेक्ट ट्रेसिंग और नई सैंपलिंग कम होना है। इसके अलावा अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी जस की तस बनी हुई है। इससे जाहिर है कि जिले में संक्रमण तो है उसे अलग दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। इस मामले में कोरोना के नोडल अधिकारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी सीधे तौर पर कुछ बताने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि संक्रमण पहले की तुलना में लगभग 22 फीसद घट गया है. जबकि हकीकत यह है कि कोरोना दूसरा व तीसरा टेस्ट करवाने वाले मरीजों की संख्या उसमें से हटा दी जाए तो सैंपलिंग अपने आप ही कम हो जाएगी। इससे संक्रमण की सही दर सामने आएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग और कांटेक्ट ट्रेसिंग भी कम

शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का रवैया काफी निराशाजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तुलना में कम सैंपलिंग और कांटेक्ट ट्रेसिंग करवा रहा है। इसकी मूल वजह ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी होना है, जो मरीज फीवर क्लीनिक पर आकर टेस्ट करवाते हैं, उनकी ही कांटेक्ट ट्रेंसिंग नाममात्र की होती है। शेष अन्य मरीजों को सर्दी जुकाम खांसी और बुखार की गोलियां महिला बाल विकास विभाग का सर्वे दल बांट देता है। इससे कोरोना वरीज घर में ठीक हो जाता है। ठीक नहीं होने व ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला हॉस्पिटल लाया जाता है।

कंटेनमेंट जोन की संख्या भी नहीं हुई कम

एक प्रमुख बात यह है कि इससे जहां पर हास्पिटल में भर्ती होने वालों की संख्या लगातार वैसी ही बनी हुई है जैसी कि 1 सप्ताह पूर्व बनी हुई थी। 13 मई को 242 मरीज भर्ती थे। 17 मई तक 140 मरीज भर्ती है। कुल 102 मरीज दर्शाए गए है। इनके अलावा अन्य चिकित्सालय में भर्ती मरीज भी अभी वैसे ही बने हुए हैं। इसका मूल कारण यही है कि संक्रमण तो कम हुआ है मगर लोगों में भर्ती होने की स्थिति वैसी ही बनी हुई है इसी प्रकार कंटेनर मंजूर जो 13 मई को 513 की संख्या में थे वह घट कर मात्र 107 तक हुए है। इस तरह संक्रमण दर घटने के साथ कंटेनमेंट जोन कम नहीं हुए है। जिन मरीजों को जरा भी कोरोना होने का लक्षण है उन्हें कंटेनमेंट जोन में रख दिया जाता है।

वर्जन

संक्रमण की दर कम हुई है, चूंकि मरीज ठीक भी हो रहे हैं। अतः इस कारण जिन मरीजों का दूसरा या तीसरा कोरोना टेस्ट करवाया जा रहा है उनका भी सैंपलिंग के परिणामों में गिनती तो की जा रही है। सेंपलिंग में नए और पुराने मरीज के लिए टेस्ट करने की एक ही पद्धति है। अतः आंकड़ा कम करने के लिए नहीं बल्कि सैंपलिंग दर्शाइ जा रही है। कंटेनमेंट जोन की संख्या इस कारण कम नहीं हुई है कि जिले में किसी भी व्यक्ति को कोरोना के लक्षण होते हैं, तो उसे आइसोलेट किया जाना आवश्यक है। इस कारण कंटेनमेंट जोन की संख्या भी कम नहीं हो पाई है?

डा. आर. बी. कुरेले

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दतिया ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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