दतिया। नईदुनिया प्रतिनिधि

जीवन में एक बार किसी साधु व आर्यिका की पुरानी पिच्छी लेने का प्रयास जरूर करना, क्योंकि ये पुरानी पिच्छी ही जीवन के अंत तक नई पिच्छी बनकर हमारे हाथ में आएगी। पुरानी पिच्छी लेने वाला श्रावक होता है तो नई पिच्छी लेने वाला आर्यिक व साधु होती है। यह विचार मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने रविवार को सोनागिर स्थित विशाल धर्मशाला में दिगंबर जैन जागरण युवा संघ रजिस्टर मुंबई के तत्वाधान में आयोजित भक्तामर महाविधान व पिच्छी परिवर्तन समारोह धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए । मुनिश्री ने कहाकि मेरी पिच्छी का परिवर्तन आप सबके जीवन के सुखद परिवर्तन का कारण बने । उन्होंने कहाकि मेरे गुरुदेव आचार्यश्री पुष्पदंत सागर ने मेरे हाथों में पिच्छी देकर मेरा जीवन अनमोल बना दिया, आज ये पिच्छी ही मेरी पहचान है।

इन्हें मिली मुनिश्री की पुरानी पिच्छिका

मुनिश्री प्रतीक सागर की नवीन व पुरानी पिच्छी लेने का सौभाग्य महेंद्र कुमार, अंकित जैन दतिया परिवार को मिला । आचार्यश्री धर्मभूषण सागर की नवीन पिच्छी मुकेश जैन शिवपुरी को व पुरानी संतोष जैन इटारसी परिवार को प्राप्त हुई। इस मौके पर राजस्थान पाली के संगीत पार्टी महेंद्र जैन ने भजन पिच्छी रे पिच्छी इतना बता तूने कौन सा पुण्य किया है, जो गुरुवर ने हाथों में थाम लिया है, सुनाकर जैन समाज के लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उपस्थित लोगों ने सजी हुई नवनिर्मित पिच्छी को सिर पर रखकर नृत्य किया।

पालकी शोभायात्रा व कलश यात्रा के साथ हुआ भक्तामर विधान महोत्सव

भगवान आदिनाथ की पालकी व कलश यात्रा व शोभयात्रा भट्टराक कोठी से गाजे बाजे के साथ निकाली गई। इस शोभायात्रा में सबसे आगे युवा हाथों में जैन ध्वज लेकर व महिलाएं केसरिया परिधान में मंगल कलश सिर पर रखकर चल रही थी। इंद्रगण भगवान आदिनाथ की पालकी को अपने कंधे पर रखकर जयघोष लगा रहे थे। पालकी यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए कार्यकम स्थल विशाल धर्मशाला चंद्रनगर पहुंची। जहां आचार्यश्री, मुनिश्री के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पं. सजय कुमार जैन के मार्ग दर्शन में विधि विधान से महावीर प्रसाद जैन परिवार शिवपुरी ने ध्वजारोहण कर शुभारंम किया। अंखड सौभाग्यवती इंद्राणियों ने मंगल कलश के जल से मंडप शुध्दि क्रिया पूरी की। सौधर्म ने भगवान का अभिषेक किया व शांतिधारा कर यज्ञ से विश्व शांति व कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए कामना की।

5400 सौ श्रीफल से रचाया भक्तामर विधान

भक्तामर महामंडल महाअर्चना विधान में सौधर्म इंद्र के लिए मुख्य भक्तामर मंढना सहित 108 परिवारों के इंद्र-इंद्राणियों ने केशरिया वस्त्र धारण कर अष्ट्रद्रव्य से भक्तामर महाअर्चना विधान की महिमा का गुणगान कर पूजा आर्चना करते हुए मुनिश्री ने अपने मुखारविंद से बीज मंत्रों का मंत्रोच्चारण कर भगवान आदिनाथ के चरणों में 108 महाअर्घ्य मढ़ने पर समर्पित किए। विधान में 5400 सौ श्रीफल नरियल समर्पित किए गए। शाम को 1008 दीपों से आरती के साथ डांडिया ग्रुप नृत्य किया गया।

5 ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते समाज के लोग।

6 भगवान आदिनाथ की पालकी यात्रा निकालते लोग।

7 महिलाएं कलश यात्रा में हुई शामिल।

8 5400 श्रीफल किए गए समर्पित।

Posted By: Nai Dunia News Network

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