दतिया। नईदुनिया प्रतिनिधि

देवउठानी ग्यारस पर्व शहर सहित अंचल में पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस दिन महिलाओं ने व्रत रखकर शाम को अपने घरों में गन्नो का मंडप सजाकर तुलसी विवाह का आयोजन किया। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर लोगों उठो देव, जागो देव के जयघोष लगाए। शंख और घंटे बजाकर देव जगाने के लिए विधि विधान से पूजन किया गया। शहर में करन सागर स्थित गंगा मंदिर से भगवान अटल बिहारी जी का रथ जलबिहार करने निकाला गया । इस अवसर पर कार्तिक स्नान कर रही महिलाओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा अर्चना की। तालाब पर एकादशी व्रत की कथा सुनने के बाद महिलाओं द्वारा भगवान अटल बिहारी के जलविहार परंपरा में शामिल होकर उत्सव मनाया गया। घाट पर ही गोपियों को छोड़ने की परंपरा के लिए स्थानीय कलाकार द्वारा टोली के रूप में भक्तिमय संगीत के साथ कृष्ण लीलाएं की गई। एकादशी व देव उठानी ग्यारस और तुलसी विवाह की कथा उपस्थित महिलाओं को घाट पर सुनाई गई। गुरु माता मंदिर और छत्तीस कोटी भगवान के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ लिया।

इस दिन सुबह से ही बाजार में गन्नो और पूजन सामग्री बेचने वालों का डेरा जमा दिखाई दिया। गन्नो काफी महंगे दाम पर बेचे गए। भांडेर में तो पांच गन्नाों की कीमत डेढ़ सौ रुपये तक विक्रेताओं ने ग्राहकों से ली। इस दिन गन्नाों का महत्व होने के कारण लोगों ने विक्रेताओं के मुंहमांगे दाम पर भी गन्नो खरीदे। शाम के समय घरों पर दीप जलाकर देवउठानी ग्यारस का पर्व मनाया गया। लोगों ने इस दिन जमकर आतिशबाजी भी की। देवउठान एकादशी पर उनाव बालाजी में पहुंज नदी के गोवर्धन तट पर सुबह से महिलाओं की भीड़ रही। कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं यहां आकर पहुंज नदी के गोवर्धन तट पर पूजा अर्चना कर भजन कीर्तन आदि धार्मिक कार्य करती नजर आई। वहीं सेवढ़ा स्थित सनकुआं पर भी कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं की भीड़ रही।

बज उठी शहनाइयां

देव उठानी ग्यारस के साथ ही शादी विवाह की भी शुरूआत हो गई। इस दिन कई विवाह संपन्ना हुए। माना जाता है कि चार माह देवशयनी ग्यारस के बाद सभी शुभ काम और शादी विवाह आदि रोक दिए जाते हैं। जो देवउठनी ग्यारस के साथ ही शुरू होते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद इस दिन जागकर फिर से जगत के संचालन को संभालते हैं। 25 नबंबर को भी काफी सहालग रहा।

पीतांबरा मंदिर पर बांटे तुलसी के पौधे, मुक्तिधाम पर जलाए 251 दीप

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी देव उठनी ग्यारह पर जगत जननी मां पीतांबरा माई के मुख्य द्वार पर तुलसी मां के पौधों का वितरण किया गया। दैनिक जीवन में तुलसी मां के महत्व को बताकर वहां आने वाले लोगों को समझाया गया कि तुलसी ये कैसे निरोगी और सुखी रहा जा सकता है। शाम को ग्वालियर रोड स्थित सखी बाबा मुक्तिधाम पर एक दिया अपनों के नाम कार्यक्रम के तहत 251 दीप प्रज्वलित किए गए। इस अवसर पर प्रोफेसर रतन सूर्यवंशी, अशोक कुमार गुलराजानी, घनश्याम मोटवानी, मोहिनी लीलारामानी, विशाल प्रजापति उपस्थित रहे। पीतांबरा पीठ पर मां के दरबार में रंगोली भी सजाई गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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