भांडेर। (नईदुनिया न्यूज) भांडेर विधानसभा थाना उनाव क्षेत्र कामद निवासी मोहन रजक और उसके छोटे भाई, दो पुत्रों ने उपज खरीदी में कामद और उसके आसपास के गांवों के लगभग एक सैंकड़ा किसानों के साथ धोखाधड़ी करते हुए उन्हें लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगा 25-26 अप्रेल की रात परिजनों सहित गांव छोड़ दिया। उक्त गल्ला व्यापारी की अपने स्तर पर खोजबीन के बाद नाकाम रहने के बाद ठगी और धोखाधड़ी के शिकार किसानों ने एसपी और एसडीओपी भांडेर को आज ही के दिन गत माह 28 अप्रेल को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत की थी जिसके बाद उसी रात पीड़ित किसानों की तरफ से फरियादी के रूप में कामद निवासी रवि दांगी की शिकायत पर उनाव थाने पर मोहन धोबी, उसका भाई कमलकिशोर उर्फ बंटी, उसके दोनों पुत्रों राजेश तथा संजू के विरुद्ध 420 तथा 409 धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। पुलिस के संज्ञान में आए इस मामले को आज पूरा एक माह गुजर गया। लेकिन उक्त आरोपीगणों में से एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। न ही पुलिस को अब तक इस मामले में आरोपितों का कोई सुराग मिल सका है। हालांकि इस मामले में पुलिस ने जल्दी ही आरोपितों को गिरफ्तार करने की बात कही। लेकिन इस मामले में पुलिस कार्यवाही शून्य रहने के चलते पीड़ित किसानों में आक्रोश सहित निराशा व्याप्त है। इस घटनाक्रम में पुलिस ने आरोपित मोहन की डबरा निवासी बहिन से भी पूछतांछ की थी। लेकिन पुलिस को आरोपितों के संबंध में जानकारी हासिल नहीं हुई। फिलहाल पुलिस कार्यवाही से असंतुष्ट किसान अब गृहमंत्री से मुलाकात कर अपने साथ हुई धोखाधड़ी से उन्हें अवगत कराने का मन बना रहे हैं।

छोटे किसानों की अर्थव्यवस्था डगमगाई

इस मामले में प्रभावित हुए किसानों में हर प्रकार के किसान शामिल हैं। बड़े किसान जहां दम साधे इस पूरे मामले में पुलिस कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, छोटे किसान जिनकी अर्थव्यवस्था ही पूरी तरह चरमरा गई, वे इस सदमे को झेलते हुए पुनः खड़ा होने का प्रयास करते हुए दूसरे कामों को अपना साइड बिजनेस बना नुकसान की भरपाई करने में जुट गए हैं।

-वीरेंद्र अहिरवार निवासी कामद के पास डेढ़ बीघा जमीन थी। रीढ़ हड्डी झुकाव से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने इस बार 15 हजार रुपये का गेंहूं इन व्यापारियों को उधार बेचा। लेकिन अब इस क्षति से उबरने ढाक के पत्तों से दोना-पत्तल बना रहे हैं।

-मनीराम प्रजापति निवासी कामद के पास दो बीघा जमीन है। कुछ जगह भी जोत पर ली थी। 70 क्वि. गेंहूं हुआ। इन व्यापारियों को उधार बेचा। अब इस घाटे से उबरने मजदूरी करना शुरू कर दी।

-जीतू प्रजापति निवासी कामद के पास दो बीघा जमीन है। कुछ जमीन जोत पर भी ली थी। ढाई लाख रुपये की उपज उधार बेची। अब घाटे से उबरने गांव में दूसरे के ट्रेक्टर पर ड्राइवरी कर रहे हैं।

-बिटोली अहिरवार निवासी कामद के पास भी दो बीघा जमीन है। परिवार में एक विवाह योग्य बेटी और विधवा बहू तथा नातिन भी है। 60 हजार मूल्य की उपज इन व्यापारियों को उधार बेची। लेकिन घर चलाना और बेटी के हाथ पीले भी करने हैं। इसलिए दोना-पत्तल बनाना शुरू कर दिया।

-अशोक अहिरवार निवासी कामद के पास 5 बीघा जमीन है। एक लाख चालीस हजार मूल्य की उपज उधार बेची। अगले महीने 3 मई को बहिन की शादी थी। पैसों के बंदोबस्त के लिए दो बीघा जमीन गिरवी रखनी पड़ी।

-राजाराम अहिरवार निवासी कामद के पास तीन बीघा जमीन है। कुछ जमीन जोत पर भी ली थी। इन्होंने 30 क्वि. उपज इन व्यापारियों को उधार बेची। अगले महीने बिटिया की शादी है। निश्चित है कि इसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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