दतिया (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लगातार बारिश के चलते मडीखेड़ा डैम से हर रोज सिंध नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। सोमवार को भी 5.5 हजार क्यूसेक पानी सिंध नदी में छोड़े जाने से सिंध नदी का जलस्तर और बढ़ गया। जिसके बाद नदी के आसपास बसे गांवों में पानी पहुंचने की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं सेवढ़ा में बना छोटा पुल एक बार फिर पानी में डूब गया। अभी 6 दिन पहले भी यह पुल सिंध का जलस्तर बढ़ जाने के कारण डूब गया था। खतरे को देखते हुए सोमवार शाम को इंदरगढ़ तहसील के नायब तहसीलदार दीपक यादव ने कर्मचारियों के साथ नदी किनारे बसे गांव सुनारी, पाली, लांच, खैरोनाघाट, बिलासपुर, रुर, अंडोरा में पहुंचकर अलर्ट कराया। साथ ही कुलैथ गांव के लोगों को नदी किनारे निचले रिहायशी इलाके को छोड़कर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था कराई गई। पिछले वर्ष भी मड़ीखेड़ा डैम से पानी छोड़े जाने के कारण सिंध नदी किनारे बसे यह गांव बाढ़ की त्रासदी झेल चुके हैं। इस आपदा के चलते सेवढ़ा सहित तीन बड़े पुल भी नदी में समा गए थे।

वहीं राजघाट बांध से भी 21 अगस्त को 3.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण बेतवा उफान पर है। माताटीला बांध के सभी 23 गेटों को 16 फुट तक खोल दिया गया है। बेतवा में जलस्तर बढ़ने से बसई क्षेत्र के नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को भी सतर्क कर दिया गया है। वहीं इन गांवों के खेतों में नदी का पानी भर जाने से किसानों की फसलें डूब गई हैं। करीब आधा दर्जन गांवों में खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीणों में दहशत है कि कहीं हालात और बिगड़े तो उन्हें गांव छोड़कर न जाना पड़े। बसई में भी पिछले 48 घंटे से झमाझम बारिश का दौर रुक रुककर जारी रहा। इधर महुअर बांध (नाबली बांध सिरसौद) के कैचमेंट क्षेत्र के दो गेट बारिश के कारण खोले जाने को लेकर बड़ौनी क्षेत्र के महुअर नदी किनारे वाले गांवों में सर्तकता बरतने को भी कहा गया है।

सिंध उफान पर, गांवों तक पहुंचा पानी

मड़ीखेड़ा डैम से सोमवार को भी 5.5 हजार क्यूसेक पानी सिंध नदी में छोड़ा गया है। जिला प्रशासन ने सिंध नदी के किनारे बसे गांव के लोगों को सतर्क करते हुए नदी किनारे ना जाने और अपने पशुओं को नदी क्षेत्र में जाने से रोकने को कहा है जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री चेतन चौहान ने बताया कि पानी छोड़े जाने के कारण सिंध नदी किनारे बसे गांवों में पानी पहुंच सकता है। 22 अगस्त को 17.3 मिलीमीटर औसत वर्षा जिले में दर्ज हुई। इंदरगढ़ तहसील के ग्राम सुनारी, लांच, खैरोनाघाट, बिलासपुर, रुर अंडोरा में पानी पहुंचने की स्थिति में है। जिसे देखते हुए ग्रामीणों को अलर्ट किया गया है।

कुलैथ में नदी किनारे बने घरों को कराया खाली

ग्राम कुलैथ में पानी बस्ती तक पहुंचने की स्थिति बनते देख वहां अलर्ट कराने पहुंचे नायब तहसीलदार दीपक यादव ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की हिदायत दी। बताया जाता है कि गांव में नदी किनारे बसे करीब तीन दर्जन घरों के लोगों को गांव में बने स्कूलों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सरपंच और सचिव को बोलकर उन परिवारों के निवास के लिए गांव के स्कूल में व्यवस्था कराई गई है। साथ ही वहां उनके भोजन की भी व्यवस्था कराए जाने की जानकारी दी गई है। कुलैथ से रुर गांव के रास्ते में पानी भर गया है। जिसके कारण ग्राम रुर का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। नायब तहसीलदार दीपक यादव ने माइक से मुनादी कर ग्रामीणों को समझाइश दी कि गांव में पानी बढ़ने का इंतजार किए बिना सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं। साथ ही जो भी स्थिति हो उसके बारे में मोबाइल पर तत्काल सूचित करें ताकि समय रहते सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने ग्रामीणों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया।

बसई में बेतवा ने दिखाया रौद्र रुप

लगातार हो रही बारिश से बसई क्षेत्र का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। पानी की निकासी के लिए माताटीला बांध के पूरे 23 गेटों को 16-16 फुट तक खोल दिया गया। करीब 4 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज करने के कारण बेतवा नदी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। नदी किनारे बसे गांव देवगढ़, हीरापुर, मकडारी के ग्रामीण नदी का पानी घरों तक न पहुंच जाए, इस आशंका से घिर उठे हैं। वहीं इन क्षेत्रों के किसानों की मूंगफली, उड़द व तिलि की फसल खेतों के जलमग्न हो जाने से पानी में डूब गई है। बसई तहसीलदार मयंक तिवारी ने बताया कि सोमवार सुबह उन्होंने इन गांवों का दौरा किया। आरआई सहित अन्य कर्मचारी तैनात किए गए हैं। ग्रामीणों को भी अलर्ट कर दिया गया है। गांव की बस्ती से सिर्फ 20-25 मीटर दूर तक पानी रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का बहाव बहुत तेज है। यदि बांध से पानी छोड़ा गया तो उनकी बस्ती तक पानी आ सकता है।

छह दिन में दूसरी बार डूबा सेवढ़ा का छोटा पुल

सेवढ़ा में स्थित छोटा पुल सप्ताह में दूसरी बार डूब गया है। पुल डूबने के बाद भी सिंध का जल स्तर का बढ़ना लगातार जारी है। इससे यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बार नदी से लगे इलाके में भी पानी प्रवेश कर सकता है। एसडीएम अनुराग निंगवाल ने मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं नदी के आसपास की बस्ती और ग्रामों में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुल के ऊपर पानी आते ही आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। बता दें कि इससे पूर्व 17 अगस्त को भी सेवढ़ा का यह पुल 24 घंटे के लिए बंद हो गया था। बीते वर्ष बाढ़ में सेवढ़ा पर बना बड़ा पुल बह गया था, इसके बाद से ही नगर में सौ वर्ष पहले तत्कालीन राजा गोविंद सिंह द्वारा बनवाया गया छोटा पुल ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। वैसे तो यह छोटा पुल वर्ष में एक या दो बार ही डूबता था, पर इस बार सात दिन के अंदर दूसरी बार पुल डूब गया है। दोपहर 12 बजे जैसे ही पुल की सतह पर पानी निकलना प्रारंभ हुआ यातायात रोक दिया गया। वर्तमान में यही पुल नगर की सीमा रेखा को ग्वालियर मार्ग से जोड़ता है। इसके कारण जो वाहन जहां थे वहीं फंसे रह गए। जिन्हें आवश्यक कार्य से ग्वालियर से आना जाना था उन्हें 60 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ा। दोपहर गुजरते गुजरते छोटे पुल से चार फीट ऊंचाई तक पानी आ गया। सामान्य स्तर से 15 फीट की ऊंचाई पर पहुंचे जल स्तर ने सनकुआं पर स्थित साठ फीसदी मदिरों मठों को डुबो दिया। प्रशासन द्वारा सीमा सील कराई गई हैं। बड़े पुल के पास और नदी के लिए नीचे जाने वाले रास्ते के पहले मुख्य रोड को फायर ब्रिगेड के सहारे बंद कर दिया गया है।

सेवढ़ा एसडीएम निंगवाल ने नदी से लगे 35 किलोमीटर के हिस्से पर पुलिस और प्रशासन के मैदानी अमले की तैनाती के निर्देश दिए है। लोगों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वह नदी के करीब न जाएं। पानी का बढ़ता बहाव किसी भी वक्त सटे इलाके तक पहुंच सकता है। सेवढ़ा में वार्ड एक एवं दो में मुनादी करवा दी गई है। वहीं बीते वर्ष नदी में डूबे धुबियाई, बेरछा, खमरोली, ढिमरपुरा, जरा, ढोंगरपुर आदि को खाली करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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