दतिया/सेवढ़ा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिंध का जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर दिखाई दिया। सिंध किनारे बसे गांवों के लोग की भी पूरी रात जागते हुए कटी। वहीं कुछ गांवों में प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पहुंचकर डेरा जमा लिया था। ताकि किसी भी स्थिति से निबटने के लिए तत्काल प्रबंध कराए जा सकें। यहां टार्च के उजाले में प्रशासनिक अमला रातभर गांव वालों के साथ निगरानी के लिए बैठा रहा। कुछ गांवों में निचले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों ने तो अपना जरुरी सामाना भी बांध लिया था। एहतियाती प्रबंधों के साथ प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को लगातार समझाइश भी दी जा रही थी।

रात साढ़े ग्यारह बजे सेवढ़ा एसडीएम अनुराग निंगवाल, सीएमओ नागेंद्र सिंह, टीआई धीरेंद्र मिश्रा ने सनकुआं से सटे रास्तों का निरीक्षण कर वहां आवाजाही पर रोक के लिए बेरीकेट्स, फायर ब्रिगेड की गाड़ी, ट्रेक्टर, हाथ ठेला आदि को लगवाया। पानी का तेज बहाव लोगों को बीते साल आई बाढ़ की त्रासदी की याद दिला रहा था। प्रशासनिक अमला आमजन को लगातार समझाइश दे रहा था कि इस बार पानी पहले से कम है, इसलिए डरने की जरुरत नहीं है। लेकिन रात में सतर्कता बरतने की भी हिदायत दी जा रही थी। निचले इलाकों में बने कुछ घरों के लोगों ने तो सामान ट्रेक्टर ट्रालियों में भरना भी शुरु कर दिया था। रात 1 बजे के बाद भी नदी का जल स्तर बढ़ना जारी रहा। लेकिन बहाव में कमी के कारण महज 5 फीट पानी ही बढ़ सका। आसपास के लोग इस बात से डरे हुए थे कि दिन के समय नदी 20 फीट की ऊंचाई पर बहते हुए सनकुआं पर स्थित सभी मंदिर मठों को डूबा चुकी थी। छोटा पुल डूबने के बाद उसके ऊपर पानी बह रहा था।

मंगलवार को उतरा नदी का जलस्तर

मंगलवार सुबह जल स्तर का बढ़ना बंद हुआ। शाम 5 बजे तक जलस्तर में गिरावट आने लगी। दो दिन से बंद छोटे पुल से आवागमन ठप होने के कारण नगर के बाजार में सन्नााटा पसार रहा। लोग नदी में बड़े जल स्तर को देखने सनकुआं के आसपास एकत्रित हुए, पर पुलिस ने किसी को करीब नहीं जाने दिया।

नगरीय क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी पानी बढ़ने की मुनादी से दहशत देखी गई। पिछले वर्ष खमरौली, ढिमरपुरा, रुहेरा, जरा, धुबियाई, बेरछा, डोंगरपुर सहित कई गांव डूबे थे।

प्रशासनिक अमले ने गांवों में डाला डेरा

पिछले वर्ष आई बाढ़ में सबसे अधिक नुकसान ढिमरपुरा में हुआ था। इसको देखते हुए नायब तहसीलदार सुनील वर्मा ने पूरी रात ढिमरपुरा और खमरोली में ही गुजारी। पानी आबादी क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सका। लेकिन लोगों ने फिर भी गांव में रतजगा किया। प्रशासनिक चेतावनी के बाद लोगों ने सामान की पैकिंग कर गांव से निकलने की तैयारी पूरी कर ली थी। ऐसा ही नजारा अनुभाग के अन्य गांवों में भी देखा गया। एसडीएम ने इंदरगढ़ और सेवढ़ा तहसील मुख्यालय पर नायब तहसीलदार दीपक यादव एवं सुनील भदोरिया की तैनाती कर 24 घंटे की निगरानी के लिए कंट्रोल रुम व्यवस्था चालू करा दी थी। मैदानी अमले को सूचना जारी की गई कि जल स्तर बढ़ने की अपडेट लगातार देते रहें। ताकि समय पर प्रबंधन किया जा सके। दिन भर लोगों में सिंध के बढ़े जल स्तर को लेकर चिंता अवश्य रही पर पिछले वर्ष की तुलना में कम पानी छोड़े जाने के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ।

नदी में पानी छोड़े जाने से बढ़ा भय

सोमवार को दोपहर में मोहनी सागर से 5400 क्यूसेक पानी छोड़ने की सूचना से लोगों में भय था। इसकी वजह महुअर नदी का बड़ा जल स्तर भी था। जो कि धूमेश्वर डबरा से इसी सिंध में मिलती है। हालांकि यह पानी गत वर्ष छोड़े गए 12,500 क्यूसेक से कम था। जिससे बाढ़ जैसी संभावना नहीं थी। लेकिन पूर्व के हादसे ने प्रशासन और ग्रामीणों को डरा दिया था। मंगलवार की सुबह डेम के अधिकारियों द्वारा जारी सूचना में बताया गया कि 2800 क्यूसेक पानी कम किया गया है। जिसके बाद डेम से 2600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। संभावना जताई जा रही है सिंध का पानी उतरने के साथ ही सनकुआं स्थित छोटा पुल भी खुल सकता है।

आज पुल निर्माण की मांग को लेकर बंद रहेगा बाजार

सेवढ़ा में सिंध नदी पर बना ब्रिज बीते वर्ष 4 अगस्त को आई बाढ़ में बह गया था। लंबे समय से लोग पुल निर्माण को लेकर शासन प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे है। इस बीच नगर में पुल निर्माण करवाने को लेकर लोग सड़क पर उतरने लगे हैं। दो दिन पहले हुई बैठक के मद्देनजर मंगलवार शाम नगर के व्यापारियों ने बाजार में जनसम्पर्क कर बुधवार को सुबह दुकानें बंद रखकर ज्ञापन सौंपने का आव्हान किया। इसी बीच भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र बुधौलिया ने प्रेसवार्ता बुलाकर स्पष्ट किया कि सेवढ़ा पुल निर्माण को लेकर शासन गंभीर है। लोक निर्माण विभाग के मंत्री से चर्चा हो चुकी है। आगामी माह अनुपूरक बजट में इसका प्रावधान हो जाएगा। इसके बाद उच्च प्राथमिकता के साथ पुल बनेगा। डिजायन वर्क के साथ अन्य स्वीकृतियां हो चुकी है। आगामी माह टेंडर लगेगा। वहीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य आलोक सिंह परिहार ने भोपाल पहुंचकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा से मुलाकात कर पुल निर्माण की भी मांग रखी। इधर आगामी 27 अगस्त और 29 अगस्त को कांग्रेस नेता पुल के संबंध में आंदोलन की घोषणा कर चुके है।

सेवढ़ा में पुल बहने के बाद से ही नगर का बाजार पूरी तरह ठप्प है। बरसात के मौसम में आए दिन छोटा पुल डूब जाता है जिसके कारण यातायात अवरूद्ध हो जाता है और जो छोटे वाहन पुल से निकलते हैं वह भी फंस जाते है। नतीजा यह होता है कि ग्वालियर भिंड के लिए सेवढ़ा क्षेत्र के लोगों को 60 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता है। वहीं नदी पार के 18 गांव का तहसील मुख्यालय से सम्पर्क कट जाता है। अब व्यापारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुल निर्माण के लिए बुधवार को बाजार बंद कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार नगर के बाजार बुधवार को सुबह से ही बंद रहेंगे। लोग 10 बजे अमरेश्वर महादेव मंदिर पर एकत्रित होकर बाजार से रैली निकालेंगे और 11 बजे तहसील परिसर में पहुंचकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एसडीएम को ज्ञापन सोंपेंगे और पुल के संबंध में चर्चा भी करेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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