भांडेर । नईदुनिया न्यूज

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तनी एकादशी व जलझूलनी यानी डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी आज 17 सितंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन मंदिरों से भक्त कंधों पर विमान (डोल) निकालकर जलबिहार कराने ले जाते हैं। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत भांडेर स्थित विभिन्ना मंदिर जिनमें श्री चतुर्भुजराज-बलदाऊ सरकार मंदिर चतुर्भुजराज मोहल्ला, श्री जानकीरमण सरकार मंदिर बोहरान मोहल्ला, श्री दूधाधारी सरकार ठकुरास मोहल्ला, श्री राधागोविंद सरकार सिकंदरपुर मोहल्ला व श्री रघुवरकिशोर सरकार सिटोला मोहल्ला से डोल में सवार होकर ठाकुर जी पहुंज नदी के तट पहुंचेंगे। नदी के जल देव प्रतिमाओं के पांव पखारे जाएंगे।

डोल ग्यारस पर श्री राधागोविंद सरकार, श्री दूधाधारी सरकार, श्री जानकीरमण सरकार के विमान अपने-अपने मंदिरों से श्री चतुर्भुजराज सरकार मंदिर पहुंचते हैं। यहां से श्री चतुर्भुजराज सरकार और श्री बलदाऊ जी सरकार अपने-अपने-अपने विमानों पर सवार होकर श्री राधागोविन्द सरकार, श्री दूधाधारी सरकार, श्री जानकीरमण सरकार के साथ यहां से भैरवजी मंदिर तक पहुंचते हैं, जहां सिटोला मोहल्ला से श्री रघुवरकिशोर सरकार का विमान इनके साथ शामिल होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हुए नदी तरफ बढ़ जाते हैं। इसके बाद सूर्योदय से पूर्व वापस लौटकर सबसे पहले श्री चतुर्भुजराज सरकार और श्री बलदाऊ सरकार को मंदिर में उनके स्थान पर विराजमान करा दिया जाता है। इसके बाद फिर शेष विमान अपने-अपने मंदिरों को लौट जाते हैं। डोल ग्यारस के मौके पर सेवढ़ा, बसई क्षेत्र में डोल निकाले जाएंगे। इसके लिए मंदिरों में तैयारी की जा रही है।

कच्चे सूत से निकाली गई थी चतुर्भुजराज की मूर्ति

नगर में चतुर्भुजराज मोहल्ले में श्री चतुर्भुजराज सरकार का मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर में विराजमान श्री चतुर्भुजराज सरकार की काले पाषाण की मूर्ति हजारी नाम के मुस्लिम व्यक्ति को दिए गए स्वप्न के आधार पर हजारी द्वारा सोन तलैया पहाड़ी पर स्थित सोन तलैया कुंड से कच्चे सूत से निकाली गई थी, फिर इसे यहां स्थापित किया गया। जब तक हजारी जीवित रहे, तब तक वे डोल ग्यारस पर विमान को कंधा देने आते थे। उनकी मृत्यु के बाद कुछ वर्ष तक उनकी पत्नी रस्म अदायगी के लिए उपस्थित होती थी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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