दतिया। दतिया अस्पताल में बुधवार को एक बार फिर स्टॉफ की लापरवाही से नवजात की जान चली गई। भांडेर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टॉफ रावण दहन देखने में व्यस्त रहा और प्रसूता की हालत बिगड़ गई। सुबह परिजन जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां भी नर्स और स्ट्रेचर समय पर नहीं मिल सका।

महिला का गेट पर ही प्रसव हो गया, जिसमें नवजात की मौत हो गई। बीते 17 सितंबर को भी इस तरह के एक मामले में महिला का प्रसव अस्पताल के गेट पर ही हो गया था।

बिनीता (28) पत्नी सतीश पटवा निवासी ग्राम धनोटी भांडेर को मंगलवार रात प्रसव पीड़ा हुई थी। परिजन उसे लेकर भांडेर के स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे और जहां पर्चा बनने के बाद स्टाफ ने कहा कि हम तो महिला को दतिया रैफर कर देंगे। इसके बाद स्टाफ अस्पताल के बाहर रावण का पुतला दहन देखने में व्यस्त हो गया। सुनवाई न होते देख रात में परिजन उसे घर ले आए।

सुबह जिला अस्पताल के लिए लेकर पहुंचे तो वहां स्ट्रेचर जगह पर नहीं मिला और ना ही कोई स्टाफ अटेंड करने पहुंचा। जब तक परिजन स्ट्रेचर व नर्स को ढूंढ कर महिला के पास पहुंचे। तब तक महिला का प्रसव गाड़ी में हो चुका था। प्रसूता और नवजात को तुंरत अस्पताल के अंदर ले जाया गया, परंतु नवजात जीवित नहीं रहा। परिजनों में चीखपुकार मच गई। मायूस होकर वे अस्पताल की अव्यवस्थाओं को कोसते हुए वापस चले गए।

दरवाजे पर होता स्ट्रेचर तो बच सकती थी जान

करोड़ों रूपए के जिला अस्पताल में कहने को तो सभी चीजें मौजूद हैं लेकिन समय पर प्राय: सभी चीजों का अभाव देखने को मिलता है। बुधवार की घटना का बड़ा करण भी मौके पर स्ट्रेचर न होना था। जबकि महिला वार्ड के पास सदैव एक स्ट्रेचर व एक गेट पर स्टेचर होना अनिवार्य है। इसके बावजूद चीजें मौके पर नहीं मिलती है। यदि समय रहते स्ट्रेचर मिल जाता तो प्रसूता को अस्पताल के अंदर ले जाया सकता था और नवजात की जान बच सकती थी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

मामले की जानकरी मुझे है। अस्पताल प्रबंधन की इसमें कोई लापरवाही नहीं है। महिला को उसके परिजन प्रायवेट गाड़ी से लेकर आए थे। अस्पताल आते आते ही उसका प्रसव हो गया था। फिलहाल में अभी वीसी में हूं, मौके पर पहुंचकर और देखूंगा।

पीके शर्मा सीएमएचओ, दतिया

मामला मेंरे संज्ञान में है। लेकिन महिला के परिजन उसे अपने साथ ही ले गए थे। इसके बावजूद यदि इस तरह की कोई शिकायत है। तो जांच करवाई जाएगी।

डॉ आरएस परिहार बीएमओ भांडेर

Posted By: Hemant Upadhyay

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