Indian Astrology दतिया (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सदियों पुराना ज्योतिष विज्ञान कई मायनों में आज के विज्ञान से भी आगे है। वर्तमान समय में ज्योतिष विद्या एवं वास्तु विज्ञान को नए रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। ताकि इसका सीधा लाभ हर व्यक्ति तक पहुंच सके। यह बात गृहमंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने शनिवार को दतिया में तृतीय अखिल भारतीय ज्योतिष, वास्तु महाअधिवेशन सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।

सिविल लाइन स्थित हेरीटेज होटल दतिया में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद गोरखपुर ने की। महासम्मेलन में ज्योतिषाचार्य एचएस रावत, आचार्य अनिल वत्स, हरीओम जोशी, सुरेश भरमन, पंडित कृपाराम उपाध्याय सहित देशभर से आए विद्वान मौजूद रहे।

जिसमें इंदौर, उज्जैन, भोपाल, सहारनपुर, झांसी, आगरा, वृंदावन, अहमदाबाद, सूरत, उड़ीसा, उदयपुर, चंडीगढ़, जयपुर, भीलवाड़ा, गोधरा, अजमेर, देवास, मुंबई आदि स्थानों से ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद मौजूद रहे। अधिवेशन का आयोजन राहुल देव सिंह एवं परिणिता राजे द्वारा किया गया। आज 13 नबंवर को अधिवेशन का समापन होगा।

गृहमंत्री डा.मिश्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दतिया में एक मंच पर ही ज्योतिषी, संतों एवं विद्वानों के आगमन से दतिया वासियों को इसका लाभ मिलेगा और इस आयोजन से विज्ञान को नई दिशा भी मिलेगी। उन्होंने सभी विद्वान अतिथियों को डबरा में नवनर्मित हो रहे नवग्रह पीठ पर भी आमंत्रित किया।

ज्योतिष हमेशा मार्गदर्शक रहा है

गृहमंत्री ने महाअधिवेशन में कहाकि हमारी ही मातृभाषा ऐसी है जिसके शब्दों से मंत्र बना और मंत्र से यंत्र बनाया गया। आज नासा के वैज्ञानिक बताते है कि कब वर्षा होगी। जबकि हमारे पूर्वज प्रकृति और पक्षियों की गतिविधि देखकर ही पहचान जाते थे कि मौसम कैसा रहने वाला है। वह उस समय दावे के साथ कहते थे कि वर्षा अवश्य होगी और उनकी बात सही साबित होती थी। उन्होंने कहाकि ज्योतिष हमेशा से ही मार्गदर्शक रहा है। वैज्ञानिक भी खगोलीय घटनाओं और मौसम को लेकर हमारे पंचाग से अपने को अपडेट करते हैं।

हमारा पंचांग पहले ही बता देता है कि कब पड़ेंगे ग्रहण

महाअधिवेशन में गृहमंत्री ने कहाकि हमारा पंचाग एक ऐसा दस्तावेज है जो आने वाले 100 वर्षो में पड़ने वाले चंद्रग्रहण एवं सूर्यग्रहण को भी बता देता है। हमारे पंचाग ने ही दक्षिण में सुनामी आने का संकेत दिया था। लेकिन वैज्ञानिकों ने उस समय इस पर विश्वास नहीं किया। जिन लोगों ने पंचाग पर विश्वास किया वह सुरक्षित रहे। गृहमंत्री ने कहाकि जिस तरह महर्षि पतंजलि के योग को वर्तमान में आधुनिक तरीके से समझाकर घर-घर पहुंचाने का काम योग गुरुओं ने किया है वैसे ही ज्योतिष और वास्तु को भी आसान तरीके से हर व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। ताकि इस विज्ञान को लेकर कोई भ्रम की स्थिति न रहे।

विद्वानों ने भी बताए ज्योतिषी उपाय

महाअधिवेशन को संबोधित करते हुए राहुलदेव सिंह ने कहाकि रामचरित मानस ग्रंथ हमें प्रेरित करता है कि मानव भी चरित्र बदलकर भगवान राम की तरह बन सकता है। इसके लिए काम, क्रोध, लोभ जैसी बुराईयों को छोड़ना होगा। तभी नए आदर्श स्थापित किए जा सकते हैं। परिणिता राजे ने ज्योतिष को मनोविज्ञान की उम्मीद से जोड़कर प्रभावी व्याख्या की।

कार्यक्रम को ज्योतिषाचार्य एचएस रावत ने संबोधित करते हुए कहाकि कि ज्योतिष एक महत्वपूर्ण विज्ञान है बस इसे समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि गर्भधारण के समय से ही आने वाले बच्चे का जीवन भर स्वास्थ्य कैसा रहेगा, यह ज्योतिष के माध्यम से जाना जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन पंडित हीरेंद्र शुक्ला ने किया।

संतों की निकली शोभायात्रा

ज्योतिष महाअधिवेशन के दौरान शनिवार सुबह सिविल लाइन से ढोल नगाड़ों के साथ देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों और संतों की शोभायात्रा शहर में निकली। शोभायात्रा में शामिल विद्वानों ने पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगुलामुखी के दरबार में माथा भी टेका। इस मौके पर पूर्व कुलपति डा.आनंद मिश्रा, राहुलदेव सिंह, परिणिता राजे, प्रशांत भोंडेले, मनोज डोंगरा, पं.कृपाराम उपाध्याय सहित कई अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे। प्रथम दिन के अंतिम सत्र में विद्वानों का सम्मान किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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