Road Safety Campain: दतिया (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाइवे पर आपात सेवाओं की सुविधाएं नाममात्र की है। हाइवे पर झांसी के रास्ते में पड़ने वाले टोल पर एंबुलेंस खड़ी जरूरत रहती है। लेकिन उस पर तैनात स्टाफ समय पर उपलब्ध नहीं रहता। हादसों के दौरान यह अक्सर वक्त पर नहीं पहुंचती। इसे लेकर कई बार शिकायतें भी की गई। लेकिन कोई सुधार नहीं आया। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस ही मौके पर पहुंचती है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने वाले वाहनों के आने की देरी उन गोल्डन आवर को गवां देती है जिसमें किसी गंभीर घायल की जान बच सकती है। इस अव्यवस्था के कारण नेशनल हाइवे पर हादसों में अधिकांश लोगों की दर्दनाक मृत्यु असमय हो जाती है। इसकी एक बड़ी वजह यहां तैनात की गई एंबुलेंस का गोल्डन आवर में समय पर नहीं पहुंचना होता है। वहीं नेशनल हाइवे पर लंबी दूरी तक भी अधिकांशतया एंबुलेंस नजर नहीं आती। ऐसे में हादसों के वक्त आवश्यक सेवाएं बेमानी साबित हो रही है।

वहीं जिला अस्पताल में ही एकमात्र ट्रामा सेंटर संचालित है। जहां चिकित्सीय व्यवस्थाओं की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां इमरजेंसी नंबर तक नजर नहीं आता। इसके साथ ही ट्रामा सेंटर में कुल 21 बेडों की व्यवस्था है। जिसमें आईसीयू के भी आठ बेड शामिल हैं। इन बेडों का रखरखाव भी सही तरीके से नहीं होता। साथ ही वार्ड की हालत भी दु्‌र्गंधयुक्त रहती है। ट्रामा सेंटर में चिकित्सों की व्यवस्था पर्याप्त न होने से हमेशा रात्रि में सड़क दुर्घटना में आने वाले घायलों को उपचार में अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है। इमरजेंसी के लिए मात्र यहां दो चिकित्सों की ड्यूटी रहती है। जिसमें एक आईसीयू में देखरेख के लिए चला जाता है। जबकि दूसरे चिकित्सक पर ही आपातकालीन सेवा की जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में उसके कहीं चले जाने की स्थिति में कोई एक्सीडेंटल केस आने पर घायल को उपचार में देरी हो जाती है। जो कई बार हंगामे की स्थिति पैदा करती है।

इमरजेंसी में बुलाने पड़ते हैं कर्मचारी

ट्रामा सेंटर में आवश्यकता पड़ने पर एक्सरे और अन्य जांच भी रात में हो पाना मुश्किल भरा रहता है। कई बार ऐसे मामलों में एक्सरे आदि के लिए कर्मचारी को फोन कर बुलाना पड़ता है। जिसके आने के बाद ही गंभीर घायल मरीज को यह सुविधा मिल पाती है। तब तक मरीज और उसके स्वजन परेशान रहते हैं। ट्राम सेंटर में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर को लेकर भी समस्या रहती है। इन मामलों में सीएमएचओ डा.कुरेले का कहना है कि लगातार व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। जिनका लाभ मरीजों को मिलेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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