देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि) ।

जो लोग वैक्सीन लगवाने में बहाना बना रहे हैं। कोरोना की इस वैक्सीन को सामान्य टीका समझ रहे हैं। वे इसकी एक-एक बूंद की कीमत इस खबर से समझें। वैक्सीन की एक-एक बूंद कोरोना के खिलाफ आपका सुरक्षा कवच बनेगी। आपके और कोरोना के युद्ध में कोरोना को मात देगी। वैक्सीन की बूंदों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से मॉनीटरिंग के साथ ही सही तकनीक से लोगों को टीका लगा रहा है। इसका नतीजा है कि अब तक जिले में वैक्सीन का एक भी वॉयल खराब नहीं हुआ है। जिले में 604 लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जा चुका है, लेकिन एक भी वॉयल बेकार नहीं गया है। जिला वैक्सीन स्टोर मैनेजर राजेश दुबे ने बताया कि वैक्सीन के तापमान से लेकर उसके रखरखाव का पूरा ध्यान दिया जाता है। स्टोर में वैक्सीन को रखने के लिए विशेष फ्रिज है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. के कल्याणी ने बताया कि स्टोर से लेकर वैक्सीनेशन सेंटर तक वैक्सीन को लेकर जाने में तापमान का विशेष ध्यान रखा जाता है। सेंटर पर वैक्सीन का डोज लगाने के दौरान स्पेशल टीम मॉनीटरिंग के लिए कक्ष में होती है।

-ये तीन वजह हैं, जिससे हमारी वैक्सीन का वॉयल खराब नहीं हो रहा

01-डोज लगाने में पूरी सावधानी और सही तकनीक का इस्तेमालः वैक्सीनेटर वॉयल से डोज निकालने से लेकर उसे लगाने में पूरी सावधानी बरतता है। कई बार सिरिंज में डोज भरते वक्त एक-दो बूंद के गिरने का खतरा रहा है, लेकिन पूरी सावधानी बरतते हुए वॉयल से सिरिंज के जरिए डोज को निकाला जाता है। इसके बाद सावधानी के साथ लोगों के हाथ पर लगाया जाता है।

02-दस लोगों के आने के बाद ही वॉयल खोला जाता हैः वैक्सीन के एक वॉयल में 10 डोज होते हैं। इसमें इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जब वैक्सीन लगवाने के लिए 10 लोगों की संख्या हो जाती है। उसके बाद ही वॉयल को बॉक्स से निकालकर खोला जाता है। अगर सत्र स्थल पर आखिर में 10 से कम लोग हो तो उन्हें अगले दिन टीके लिए बुलाया जाता है ताकि वॉयल खराब ना हो।

03-ऑटो डिसेबल सिरिंज होती हैः टीका लगाने में सिरिंज की अहम भूमिका होती है। सिरिंज खास कोविड टीके के लिए है। जो ऑटो डिसेबल है। इसमें जितने डोज की आवश्यकता होती है, उतना ही डोज सिरिंज के अंदर जाता है। इससे वैक्सीन की ज्यादा मात्रा होने पर बाहर निकालने की आवश्यकता नहीं होती है। एक टीके का डोज पूरा होने पर सिरिंज लॉक हो जाती है।

-वेस्टेज रेट आधे से भी कम है

मापदंड के अनुसार वैक्सीन के लिए वेस्टेज रेट 1.11 प्रतिशत दिया गया है यानी 100 लोगों को टीका लगाया जाना है तो 110 डोज सत्र स्थल पर भेजे जाते हैं। जिससे शत-प्रतिशत लोगों को टीका लगाया जा सके। हमारा वेस्टेज रेट (.5 प्रतिशत) प्वॉइंट फाइव प्रतिशत है। इसमें यह प्वाइंट फाइव प्रतिशत इसलिए होता है कि जब वॉयल से सिरिंज के जरिए डोज भरा जाता है। यह वेस्टेज होता है, जो एक सामान्य प्रक्रिया है।

-वैक्सीन की यह खास बात

-वॉयल ओपन करने के बाद चार घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं।

-एक वॉयल पांच एमएल का होता है।

-डोज (प्वॉइंट फाइव) .5 एमएल का होता है।

-एक (कोवीशील्ड) वॉयल में 10 डोज होते हैं।

-वैक्सीन का दूसरा डोज उसी बैच का लगाना है।

-ऑटो डिसेबल सिरिंज से लगती है वैक्सीन।

वैक्सीन लगाने के लिए विशेष सिरिंज का इस्तेमाल किया जाता है। स्टॉफ को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। लोगों को इसकी अहमियत समझना चाहिए। वैक्सीनेटर वॉयल से डोज निकालने से लेकर डोज लगाने में पूरी सावधानी बरतता है।

-डॉक्टर एमपी शर्मा, सीएमएचओ

Posted By: Nai Dunia News Network

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