बागली जनपद क्षेत्र में छह नवीन ग्राम पंचायत सहित जिले में 17 नवीन ग्राम पंचायत बनी

-जनपद की समस्त ग्राम पंचायतों में हुआ पंचायत परिसीमन का अंतिम प्रकाशन

बागली। नईदुनिया न्यूज

अगामी त्रिस्तरीय पंचायती निर्वाचन को दृष्टिगत रखते हुए बागली अनुभाग की समस्त पंचायत मुख्यालयों में परिसीमन सबंधी ग्राम पंचायतों का अंतिम प्रकाशन, जनपद बागली/जिला पंचायत देवास के वार्डों का प्रारंभिक प्रकाशन किया गया।

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग एक माह से जारी पंचायत परिसीमन सबंधी कार्रवाई को कलेक्टर द्वारा अंतिम स्वरुप प्रदान करते हुए ग्राम पंचायतों के अंतिम प्रकाशन को स्वीकृति दी। जनपद पंचायत के सीईओ अमित व्यास ने बताया कि महत्वपूर्ण बात ये रही कि बागली जनपद में छह नवीन पंचायतों के गठन को स्वीकृति मिली। इन पंचायतों में ग्राम पंचायत सादीपुरा से्रकुलावड़, कांझर से पालखां, कनाड़ से सेमलीखेड़ा, करडी से लक्ष्मीनगर, पलासी से केवटियापानी, बिसाली से जमासिंध नवीन पंचायतें गठित होने से स्थानीय ग्रामवासियों को लाभ होगा। इन्हें अब अधिक दूर रोजमर्रा के कार्य के लिए नहीं जाना पड़ेगा। पूरे देवास जिले में मात्र 17 नवीन पंचायतों का गठन हुआ है। कन्नौद, खातेगांव, देवास जनपद में एक भी नवीन पंचायत गठन को स्वीकृति नहीं मिली।्रअब बागली जनपद में कुल पंचायतों की संख्या 123 हो गई है। ओंकारेश्वर परियोजना में डूब क्षेत्र प्रभावित धारड़ी पंचायत के ग्रामों को निकटस्थ देवझिरी में सम्मिलित किया गया है ।

23 बीजीएल 02ः अंतिम प्रकाशन की सूची चस्पा करते हुए पंचायतकर्मी।-नईदुनिया

अच्छे उत्पादन की आस हुई धूमिल

-मेहनत कर उगाई फसल में नहीं आई फली, विधायक ने किया प्रभावित खेतों का निरीक्षण

कुसमानिया। क्षेत्र का किसान इन दिनों अपनी फसल को लेकर खून के आंसू रो रहा है। अच्छे उत्पादन के लिए हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी किसान खाली हाथ रह गए। इधर विधायक आशीष शर्मा किसानों से सूचना मिलने पर लगातार सोयाबीन में अफलन वाले ग्रामों का दौरा कर रहे हैं।

शुक्रवार को विधायक ने ग्राम नांदोन, मोहाई में जाकर खेतों का निरीक्षण किया। किसान रघुवीरसिंह कर्मा, हरिनारायण परमार आदि ने विधायक से मदद की गुहार लगाते हुए बताया कि पूरी मेहनत और खर्च होने के बाद जब फसल काटना बाकी थी, तब प्रकृति ने कहर बरपाया। कुसमानिया क्षेत्र के अधिकतर गांवों में सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं होने से अधिकांश किसान बारिश के भरोसे सोयाबीन की फसल पर ही निर्भर है। सोयाबीन भी बर्बाद हो गई। पीड़ित किसानों ने विधायक को बताया कि उनके गांव में सोयाबीन की फसल को कोई भी देखने नहीं आया।्रविधायक ने बताया कि पीड़ित किसानों के फोन रोजाना आ रहे हैं, इसलिए निरीक्षण करने आया हूं। सोयाबीन में फलियां नहीं होने से किसान बर्बादी की कगार पर है। सरकार चाहिए कि मौके पर ही जिन किसानों का नुकसान हुआ उनका प्रतिवेदन बनाकर बीमा कंपनी से क्लेम दिलाने का आदेश करे और राहत राशि दे, तब जाकर नुकसान की भरपाई हो सकेगी। आज गांव-गांव में लोग शिवराज सरकार को याद कर रहे हैं, शिवराज सरकार में थोड़े-बहुत नुकसान में भी किसानों की मदद की है। कमलनाथ सरकार किसान हितैषी नहीं है, क्योंकि इन्होंने न तो किसानों का कर्जा माफ किया है और न ही ओलावृष्टि में हुए नुकसान की भरपाई की है।

23 केयूएस 01ः ग्राम नांदोन में पीड़ित किसान के खेत का जायजा लेते हुए विधायक आशीष शर्मा। -नईदुनिया