सत्संग : शिव महापुराण के छठे दिन बालयोगी संत श्यामदास महाराज ने कहा

दो कुल की परंपरा निभाती है बेटी

करनावद (नईदुनिया न्यूज)। बेटी में भगवान का वास होता है, जब बेटी की शादी के बाद विदाई होती है तो कैसा भी कठोर हृदय वाला पिता हो आंखों से आंसू छलक जाते हैं क्योंकि एक पिता को प्रेम व सम्मान जो बेटी से प्राप्त होता है वह बेटा नहीं दे सकता। बेटी एक नहीं दो कुल की परंपरा निभाती है, अंत समय तक परिवार को जोड़कर रखती है। कितना भी कष्ट या खराब समय आता है पर बेटी अपनी उम्मीद से परिवार को टूटने नहीं देती।

शिव महापुराण के छठे दिन बालयोगी संत श्यामदास महाराज ने प्रवचन में कहा कि भ्रूण हत्या पाप होता है और यह पाप मानव जीवन में कभी नहीं होना चाहिए। संतश्री ने कथा के दौरान तारकासुर नामक राक्षस के वध के लिए भगवान शिव द्वारा कार्तिक को प्रकट करने के वृत्तांत को सुनाया। व्यासपीठ की आरती उतारकर महाप्रसादी का वितरण किया गया। शिवरात्रि पर मंदिर में शाम तक करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन का लाभ लिया। पुलिस सहायता केंद्र प्रभारी सुंदरलाल पटेल अपने दल के साथ दिनभर लगे रहे।

21 केएआर 01ः करनावद में शिव महापुराण कथा पर प्रवचन देते संत श्यामदास महाराज एवं श्रवण करते श्रद्धालु।-नईदुनिया

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संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं

कांटाफोड़ (नईदुनिया न्यूज)। विवाह पवित्र संस्कार है, लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है, ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। यह बात नवलख्खा्रबस स्टैंड पर मां राजराजेश्वरी महिला मंडल द्वारा आयोजित भागवत कथा में पं. संजयकृष्ण त्रिवेदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान का भक्त से गहरा नाता है। भगवान अपने भक्त की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं। बालक ध्रुव ने तपस्या के बल पर भगवान को प्रसन्न किया। बच्चों को ध्रुव चरित्र से शिक्षा लेनी चाहिए। माता-पिता को भी बच्चों को ध्रुव चरित्र बताना चाहिए। इसके साथ ही शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने बताया कि जब सती के विरह में भगवान शंकर की दशा दयनीय हो गई, तब सती ने भी संकल्प के अनुसार राजा हिमालय के घर पर्वतराज की पुत्री होने पर पार्वती के रुप में जन्म लिया। पार्वती जब बड़ी हुईं तो हिमालय को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। एक दिन देवर्षि नारद हिमालय के महल पहुंचे और पार्वती को देखकर उन्हें भगवान शिव के योग्य बताया। इसके बाद सारी प्रक्रिया शुरु तो हो गई, लेकिन शिव अब भी सती के विरह में ही रहे। ऐसे में शिव को पार्वती के प्रति अनुरक्त करने कामदेव को उनके पास भेजा गया, लेकिन वे भी शिव को विचलित नहीं कर सके और उनकी क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। इसके बाद वे कैलाश पर्वत चले गए। तीन हजार सालों तक उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की। इसके बाद भगवान शिव का विवाह पार्वती के साथ हुआ। कथा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती के पात्रों का विवाह कराया गया। इस अवसर पर पोपेंद्रसिंह बग्गा, महेश दुबे, सीएमओ सतीश घावरी, आरसी तिवारी, रमेश त्रिवेदी, ओम होलानी, ओम जायसवाल, द्वारका राठौर, बलदाऊ दुबे, पल्ली भाटिया आदि उपस्थित थे।

21 केटीएफ 01ः कांटाफोड़ में भागवत कथा में प्रवचन देते पं. संजयकृष्ण त्रिवेदी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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