सोनकच्छ (नईदुनिया न्यूज)।

सनातन धर्म में हमारे देव तुल्य ऋषि-मुनियों द्वारा किसी भी प्रकार की महामारी के निवारण के लिए वैदिक अनुष्ठान करने के उपाय बताए हैं। अगर शास्त्रीय विधि के अनुसार पूर्ण आस्था, श्रद्धा व शुद्धता से इन अनुष्ठानों को संपन्ना किया जाए तो महामारी से बचा जा सकता है। वर्तमान में जानलेवा कोरोना महामारी से पीड़ित होकर लाखों लोग प्राण त्याग चुके हैं और लाखों लोग अस्पतालों व घरों में अपना उपचार करा रहे हैं।

यह बात दंडी स्वामी नित्यमुक्तानंद तीर्थ महाराज ने कही। स्वामीजी देश में कोरोना महामारी निवारणार्थ तथा जनकल्याण हेतु श्रीधूमावती शक्तिपीठ कोटेश्वर धाम कोटड़ा में आयोजित एकादश श्रीरुद्र समायुक्त सहस्रचंडी महायज्ञ के समापन पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित ब्राह्मणों व अतिथियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस महामारी के प्रकोप के निवारण तथा जनकल्याण के लिए 12 सदस्यीय समिति द्वारा महायज्ञ का सफल आयोजन किया गया। इसके परिणाम स्वरूप इस महामारी से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। उम्मीद से ज्यादा मरीज स्वस्थ्य हुए, साथ ही मृत्यु दर में भी अभूतपूर्व कमी आई है। हमें फिर भी इस महामारी से सावधान व जागरूक रहने की आवश्यकता है, क्योंकि भविष्य में भी दुश्मन देशों द्वारा बदलकर जैविक हमले की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। कार्यक्रम में सनातन धर्म के प्रचारक महावीर प्रसाद मानसिंगा, मेला विकास प्राधिकरण मप्र के चेयरमैन व आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक माखनसिंह सोलंकी विशिष्ट अतिथि थे। सोलंकी ने कन्या के पैर पूजकर आशीर्वाद लिया एवं महायज्ञ के आचार्य पं. संजय जोशी का तथा समिति की ओर मप्र जन अभियान परिषद भोपाल के पूर्व उपाध्यक्ष प्रदीप पांडे का सम्मान किया गया। स्कूली शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने भी यहां दर्शन कर आशीर्वाद लिया। अनुष्ठान के 10वें दिन मंत्री उषा ठाकुर भी यहां पहुंची और दर्शन किए। आभार अनुष्ठान व्यवस्थापक राजेश शर्मा ने माना।

दो लाख से अधिक आहुतियां समर्पित की-

पं. जोशी के आचार्यत्व, लक्ष्‌मीनारायण तिवारी, जगनारायण पांडेय, प्रतीक मेहता एवं राकेश दीक्षित सहित 31 ब्राह्मणों द्वारा संपन्ना इस अनुष्ठान में प्रतिदिन श्रीकोटेश्वर महादेव का एकादश आवर्तन से रुद्राभिषेक, 25 ब्राह्मणों द्वारा श्रीदुर्गा सप्तशती के 100 पाठों का उच्चारण तथा छह ब्राह्मणों द्वारा 16 खम्बों वाली यज्ञशाला के हवनकुंड में रुद्र के आवर्तन, सप्तशती के 10 पाठों तथा तीसरे दिन से श्रीदुर्गा सहस्रनाम की आहुतियां अर्पित की गई। पूरे अनुष्ठान में श्रीदुर्गा सप्तशती के कुल एक हजार पाठ, 100 पाठ से आहुतियां अर्पित की गई तथा कुल दो लाख से अधिक आहुतियां अर्पित कर पूर्णाहुति की गई।

12 सदस्यीय समिति का रहा सहयोग-

महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए स्वामीजी के मार्गदर्शन में गठित 12 सदस्यीय समिति में पूनम पंवार हरदा, कमल पटेल धार, मुकेश पाटीदार उज्जैन, रितेश खंडेलवाल उज्जैन, दौलत पटेल हाटपीपल्या, राजेश शर्मा सोनकच्छ, ओमप्रकाशसिंह परमार शुजालपुर, अरविंद सारन हंडिया, विष्णु जेथलिया सांवेर, रामजी गामी इंदौर, राजेश यादव देवास, वंदना श्रीवास्तव भोपाल सदस्य थे। गौरतलब है कि शास्त्रीय विधि अनुसार इस अनुष्ठान को गुप्त रखा गया था। इस दौरान ब्राह्मणों, सेवादारों और अनुष्ठान से संबंधित कुछ लोगों को ही अनुष्ठान क्षेत्र में प्रवेश दिया गया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags