*पहली बार डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से बच्चों में रक्त की कमी की होगी जांच

*जिले में 18 जुलाई से 31 अगस्त तक चलेगा अभियान, कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू

*1341 गांव में 1 लाख 81 हजार 995 बच्चों की जांच का लक्ष्य

देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अब 30 सेकंड में मशीन से पता चल जाएगा कि बच्चा रक्त की कमी से प्रभावित (एनीमिक) है या नहीं। बच्चे में हीमोग्लोबिन का स्तर कितना है? जिले में पहली बार घर-घर जाकर हीमोग्लोबिनोमीटर से बच्चों का हीमोग्लोबिन जांचा जाएगा। इससे परिणाम की गुणवत्ता बेहतर होगी। पहले कलर स्केल के आधार पर बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर परखा जाता था। इसमें 10 से 15 मिनट का समय लगता था। साथ ही गुणवत्ता भी सटीक नहीं होती थी।

इस बार दस्तक अभियान में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से बच्चों में रक्त की कमी की जांच की जाएगी। कार्यकर्ताओं को हीमोग्लोबिनोमीटर दिया जाएगा। इससे मौके पर ही हीमोग्लोबिन का स्तर पता चलने पर बच्चों को अस्पताल रैफर किया जा सकेगा। जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने व 5 वर्ष के विभिन्ना रोगों से ग्रसित बच्चों की पहचान कर उनको चिन्हित कर इलाज दिया जाएगा। अभियान के तहत 10 प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इनमें 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, रैफरल और प्रबंधन, बच्चों में गंभीर रक्त की कमी की सक्रिय स्क्रीनिंग की जाएंगी। जिले में 18 जुलाई से 31 अगस्त तक अभियान चलेगा। अभियान के तहत एक लाख 81 बच्चों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी।

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यहां बच्चों को ब्लड चढ़ाने की सुविधा होगी

-एनीमिक बच्चे को बागली व कन्नाौद में ब्लड की सुविधा है

-इसके अलावा जिला अस्पताल में बच्चों को रक्त चढ़ाया जाएगा

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पहले ऐसे जांचते थे हीमोग्लोबिन का स्तर

पहले कलर स्केल के जरिए हीमोग्लोबिन का स्तर जांचा जाता था। उसमें रक्त लेकर कागज पट्टी (कलर स्केल) से मिलान किया जाता है। पट्टी में अलग-अलग रंग होते थे। इसके आधार पर हीमोग्लोबिन का स्तर पता चलता था। इसमें 10 से 15 मिनट लगते थे।

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अभियान के दौरान यह करेगी टीम

1- 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, रैफरल व प्रबंधन होगा।

2- 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर रक्त की कमी की सक्रिय स्क्रीनिंग व प्रबंधन करेगी।

3- बच्चों को विटामिन ए सोल्युशन पिलाया जाएगा।

4- ओआरएस व जिंक संबंधी जानकारी के साथ घर-घर ओआरएस देंगे।

5- बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की जानकारी लेना।

6- बच्चों के वजन बढ़ाने को लेकर कंगारू मदर केयर की जानकारी देना।

7- एसएनसीयू व एनआरसी से छुट्टी वाले बच्चों में स्क्रीनिंग व फालोअप को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

8- जन्मजात विकृतियों की पहचान भी होगी।

9- गत 6 माह में मृत्यु होने वाले बच्चों की ट्रैकिंग की जाएगी।

10- हाथ धोने की विधि बताई जाएगी।

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इन मापदंडों के आधार पर होती है हीमोग्लोबिन की जांच

आयु समूह सामान्य अल्प मध्यम गंभीर

बच्चे 6 से 59 माह 11 10.9 7 7 ग्राम से कम

5 से 11 वर्ष के बालक 11.5 11.4 8 8 ग्राम से कम

12 से 14 वर्ष के बालक 12 11.9 8 8 ग्राम से कम

20 से 45 वर्षीय महिलाएं 12 11.9 8 8 ग्राम से कम

गर्भवती महिलाएं 11 10.9 7 7 ग्राम से कम

पुरुष 13 12.9 8 8 ग्राम से कम

(हीमोग्लोबिन की मात्रा ग्राम प्रति डेसीलीटर में)

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विकासखंडवार बच्चों की जांच का लक्ष्य

विकासखंड इतने गांव में जांच इतने बच्चों का लक्ष्य

टोंकुखर्द 121 15566

बरोठा 255 29967

बागली 305 35111

खातेगांव 195 22274

कन्नाौद 247 30074

सोनकच्छ 173 20048

देवास शहरी 45 28955

कुल 1341 181995

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दस्तक अभियान को लेकर कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। अगले माह 18 जुलाई से अभियान शुरू होगा।

-डा. एमपी शर्मा, सीएमएचओ

Posted By: Nai Dunia News Network

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