सोनकच्छ। माहेश्वरी समाज सोनकच्छ ने स्थानीय गीता भवन परिसर में बुधवार को समाज का शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया। कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा आकर्षक गरबा नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी सत्यनारायण लाठी, माहेश्वरी समाज अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जाजू, सचिव रूपकिशोर चांडक, गीता भवन ट्रस्टी सुरेश चंद्र भूतड़ा, माहेश्वरी समाज महिला मंडल अध्यक्ष अनीता मूंदड़ा, सचिव मनीषा लाठी, माहेश्वरी युवा संगठन अध्यक्ष बसंत दरक एवं सचिव आशीष राठी, वैश्य महासम्मेलन के सुरेशचंद्र मूंदड़ा, कैलाशचंद्र दरक आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र छापरवाल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भगवान महेश के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। माहेश्वरी युवा संगठन द्वारा फरियाली खिचड़ी व दूध प्रसादी के कार्यक्रम की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में वेदांश मूंदड़ा ने भोलेनाथ का रूप व शिवांश छापरवाल गणेश रूप धारण कर आकर्षक प्रस्तुति दी। नियति जाजू राधा रूप व आशी खंडेलवाल ने कृष्ण रूप में नृत्य किया। रूपेश मंडोवरा, गीत मंडोवरा व अक्षरा राठी ने भी नृत्य किया।नीलम नागोरी, भूमि चांडक,श्वेता मूंदड़ा, निरुपमा जाजू, साक्षी जाजू, शानू जाजू, ममता राठी, मेघा छापरवाल, माही छापरवाल, नूतन खंडेलवाल, चंचल छापरवाल, आयुषी भूतड़ा ने भी प्रस्तुतियां दी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा सम्मानित भी किया गया।

पांच दिवसीय शारदीय अंबा माता के गरबे का हुआ समापन

सोनकच्छ(नईदुनिया न्यूज)। इस वर्ष भी नगर के माहेश्वरी समाज मंदिर, राठौर समाज मंदिर व नामदेव समाज मंदिर गढ़ी पर शारदीय अंबे माता का पांच दिवसीय गरबा उत्सव पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। उत्सव में तीनों मंदिरों में भक्तजनों द्वारा माता अंबे की ज्योत विराजित कर माता की आराधना व भजन-कीर्तन किए गए। एमजी रोड स्थित श्री माहेश्वरी समाज मंदिर पर भी अंबे माता की ज्योत जलाकर आराधना की गई। चातुर्मास रामायण मंडल के सदस्य शंकरलाल शर्मा ने बताया कि यह गरबा उत्सव लगभग 125 वर्षों से मनाया जा रहा है। यह उत्सव शरद ऋतु के आने पर उसके स्वागत में मनाया जाता है । चातुर्मास रामायण मंडल व अन्य भक्त गण पांच दिनों तक ज्योत जलाकर उसका निर्वाह करते हैं। मालवा अंचल के पुराने कवियों के भजनों का उन्हीं के द्वारा लिखी पुस्तक के आधार पर कीर्तन किया जाता हैं। मंडल में वयोवृद्ध सत्यनारायण भारद्वाज, बंसीलाल कौशल, मनोहरलाल भावसार, प्रमोद भावसार, नंद किशोर चावड़ा, ढोलक मास्टर रामसिंह, लोकेश शर्मा आदि अपना अमूल्य योगदान देकर मां को भक्ति-भाव से श्रद्धा समर्पित करते हैं। शरद पूर्णिमा पर जागरण कर भजन गाए जाते हैं और अगले दिन मां की ज्योति को लेकर नदी के घाट पर पूजन कर विसर्जित किया जाता है। प्रथम दिवस जब ज्योत मंदिरों के लिए लाई जाती है कई वर्षों से नगर के पुरोहित परिवार द्वारा सर्वप्रथम पूजन किया जाता है। बुधवार मध्यरात्रि में समाज द्वारा प्रसादी वितरण किया गया । गुरुवार को सुबह करीब साढ़े 10 बजे आरती पश्चात ज्योत को अपने सिर पर रखकर भजन गाते हुए कालीसिंध नदी के पिपलेश्वर घाट लाया गया। जहां आरती कर ज्योत का नदी में विसर्जन किया गया। मां के त्रिशूल में लगे नीबुओं की बोली लगाई गई, जिसमें प्रथम बोली 4100 रुपये की बोली कैलाश चंद्र दरक द्वारा ली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में माता की आराधना के लिए भक्तजन उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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