*दो बच्चों के जन्म के अंतर को लेकर भी दंपती हो रहे जागरूक

*11 जुलाई से 11 अगस्त तक जिले में मनाया गया जनसंख्या स्थिरता माह

*एक माह में प्रसूताओं को जागरूक कर 1058 नसंबदी की गई

देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला जनसंख्या स्थिरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत जनसंख्या स्थिरता माह 11 जुलाई से 11 अगस्त तक मनाया गया। कार्यक्रम को लेकर जिले की स्वास्थ्य विभाग के दल ने उत्कृष्ट कार्य किया है। साथ ही परिवार नियोजन को लेकर जागरूक किया गया। नतीजा रहा है कि प्रदेश में जिले की बेहतर रैंक रही है।

11 जुलाई से 11 अगस्त तक यानी एक माह 1058 महिला नसबंदी की गई। उज्जैन के बाद देवास प्रदेश में दूसरे क्रम पर रहा है। इसके साथ ही पीपीआइयूसीडी यानी पोस्टपार्टम इंट्रायूटेराइन कंट्रासेप्टिव डिवाइस में भी देवास प्रदेश में छठे क्रम पर है। दो बच्चों में अंतर को लेकर भी दंपतियों में जागरूकता बढ़ी है। जिले में परिवार कल्याण जागरूकता एवं सेवा को लक्ष्‌य के अनुसार दंपतियों तक पहुंचाने के लिए जिले में जनसंख्या स्थिरता माह में विशेष अभियान चलाया गया। इसमें पुरुष-महिला नसबंदी और दो बच्चों में अंतर के लिए आइयूसीडी, पीपीआइयूसीडी की सेवा पर विशेष जोर दिया गया था। इसका बेहतर परिणाम भी रहा है। दंपतियों को परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। जागरूकता का असर है कि देवास प्रदेश में जनसंख्या स्थिरता माह में दूसरे नंबर आया है।

खुद के साथ बच्चे की सेहत की चिंता, 11 दिन में 440 पीपीआइयूसीडी लगाए गए

जनसंख्या स्थिरता माह में जिले में 610 पीपीआइयूसीडी हुए हैं। इसके अलावा महिलाओं ने प्रसूति के एक घंटे के भीतर मल्टी लोड व कापर टी लगवाई है। इसके पीछे दंपतियों की सोच होती है कि बच्चों में अंतर होने मां व बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर होगा। बच्चों में अंतर होने से मां बच्चे की अच्छे से देखभाल कर पाएगी। उसकी परवरिश भी बेहतर होगी।

जिला अस्पताल में 30 प्रतिशत पीपीआइयूसीडी केस

जिला अस्पताल में प्रतिमाह करीब 750 से 800 प्रसूति होती है। जागरूकता के कारण इसमें करीब 30 प्रतिशत महिलाएं प्रसूति के एक घंटे के भीतर पीपीआइयूसीडी करवाती हैं।

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11 जुलाई से 10 अगस्त की स्थिति...

प्रदेश के टाप 10 जिलों की स्थिति

जिला महिला नसबंदी

उज्जैन 1095

देवास 1058

बड़वानी 1047

धार 1009

खरगोन 986

इंदौर 949

छिंदवाड़ा 725

रतलाम 607

शाजापुर 580

आगर मालवा 520

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प्रदेश में टाप जिले में पीपीआइयूसीडी की स्थिति

स्थान जिला पीपीआइयूसीडी की संख्या

प्रथम उमरिया 1204

दूसरा छिंदवाड़ा 1190

तीसरा दमोह 727

चौथा सतना 645

पांचवां सीधी 631

छठा देवास 610

सातवा कटनी 568

आठवां शहडोल 561

नौवां मुरैना 556

दसवां मंडला 490

(नोट- आंकड़े 10 अगस्त तक)

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महिला की सेहत भी ठीक रहती है बच्चों में अंतर से

जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर शोभा राणा ने बताया कि प्रसव के 24 घंटे की भीतर पीपीआइयूसीडी किया जाता है। ये पांच साल के लिए होता है। बच्चों में अंतर होने से मां की हालात ठीक होती है। महिलाओं में खून की कमी नहीं होगी। कोई बीमारियां नहीं होंगी। दूसरा बच्चा भी स्वस्थ्य होगा। पीपीआइयूसीडी की दो किस्में होती हैं। इसमें मल्टी लोड व कापर टी लगाई जाती है।

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जनसंख्या स्थिरता दिवस को लेकर हमारी टीम ने प्रसूताओं व दंपतियों को जागरूकता को जागरूक किया। जिला अस्पताल में भी स्टाफ नर्स व अन्य एक्सपर्ट की टीम प्रसूताओं की काउंसिलिंग भी करती है।

डाक्टर एमपी शर्मा, सीएमएचओ, देवास

Posted By: Nai Dunia News Network

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