*वार्ड 26 में कई मार्ग ऐसे जहां बंद रहती है स्ट्रीट लाइट, होती है चेन स्नेचिंग की घटनाएं

वार्ड क्रमांक 26

-मोतीबंगला, शंकर कानूनगो कालोनी, यशवंत नगर, विवेकानंद कालोनी, पशुपतिनाथ नगर सहित करीब 18 कालोनी

शहर के बीच में एक ऐसा वार्ड, जिसकी गिनती शहर की पाश कालोनियों के रूप में होती है। यहां से पूर्व महापौर सुभाष शर्मा प्रतिनिधित्व करते हैं। वे यहां पहले पार्षद भी रह चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस की महापौर प्रत्याशी विनोदिनी रमेश व्यास भी इसी वार्ड में निवास करती हैं। शहर से लगा होने से इस वार्ड की कालोनियां शहर से पास में मानी जाती हैं। मोतीबंगला, शंकर कानूनगो कालोनी, यशवंत नगर, विवेकानंद कालोनी, पशुपतिनाथ नगर सहित करीब 18 कालोनियां इस वार्ड में हैं। शहर के बड़े वार्डों में आने वाला 23 नंबर वार्ड चेन स्नेचिंग की घटनाओं को लेकर भी चर्चा में रहता है, तो दूसरी ओर वर्षाकाल में यहां कई क्षेत्रों में भर जाने वाला पानी भी यहां के लोगों के लिए समस्याओं की बाढ़ लाता है। वार्ड में अधिकांश उच्च और मध्यमवर्गीय लोग निवास करते हैं, साथ ही कई निजी विद्यालय भी इस वार्ड में हैं। जहां बच्चे पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। कई लोगों के अपने व्यवसाय भी हैं तो कई लोग नौकरी पेशा हैं।

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देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वार्ड क्रमांक 26 वैसे तो पूरा वार्ड ऐसा दिखाई देता है, मानो यहां कोई समस्या ही न हो, लेकिन तकनीकी रूप से कई समस्याएं हैं। इनसे वार्ड के रहवासी अब भी जूझ रहे हैं। कई बार नगर निगम में अवगत कराने के बाद भी निराकरण नहीं हो रहा है। वार्ड में सीवरेज लाइन तो डाल दी है, लेकिन घरों से निकलने वाले पानी का सीवरेज में निकास करने के लिए जो घरों के छोटे चैंबर बनाए जाने थे, वो बनाए ही नहीं। अब इस त्रुटि के कारण लोग परेशान हो रहे हैं। एक ओर नगर निगम ने सीवरेज कनेक्शन लेने की अनिवार्यता कर दी है, लेकिन रहवासी कनेक्शन कैसे लें, यह बड़ा प्रश्न है। इसके अलावा वार्ड में कई मार्ग ऐसे हैं, जहां स्ट्रीट लाइन बंद रहती है। इससे संबधित क्षेत्र में चेन छीनने की वारदात आम बात हो गई है। वैसे तो वार्ड में कई समस्याएं हैं, लेकिन इन दो प्रमुख समस्याओं ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।

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ये पब्लिक है...

हमारे घर के पीछे की नाली भी हमने अपने खर्च से बनवाई है। सीवरेज के पहले सभी घरों के पानी की निकासी घरों के पीछे ही होती थी, लेकिन सीवरेज आगे डाल दी है। ड्रेनेज की लाइन नहीं डाली। घरों के पीछे सफाई होती नहीं है। कई बार नगर निगम को अवगत कराया। तब कहा था कि कंपनी के कर्मचारी खुद सफाई करेंगे क्योंकि वहां मशीन से सफाई नहीं हो सकती है। बाद में कहा कि कंपनी काम छोड़कर चली गई है। कुल मिलाकर समस्या हमारे साथ बनी ही हुई है।

-राजेश खत्री, रहवासी शंकर कानूनगो कालोनी

100 मीटर की लंबाई में 12 से 13 मकान हैं, हमारे घरों के पीछे और आगे भी वर्षाकाल में इतना पानी भर जाता है कि उससे घरों की दीवारों में सीलन आने लग जाती है। दीवारें गीली रहती हैं। इसका मुख्य कारण है कि सड़क पर पानी की निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वर्षा का पानी कहां जाएगा। इसके बारे में किसी ने कुछ सोचा ही नहीं। उत्कृष्ट विद्यालय के वहां से यहां तक वर्षा का जल भर जाता है। यह पानी घरों में भी आता है। सीलन से दीवारें भी खराब होती हैं। कई पार्षद आए और चले गए, लेकिन इस समस्या को हल करने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई।

-बीएल सोलंकी, रहवासी

घरों से निकलने वाले पानी के लिए छोटे चैंबर बनाने थे, लेकिन वो बनाए ही नहीं, दूसरी ओर सीवरेज की मुख्य लाइन से सीधे कनेक्शन कर नहीं सकते, ऐसे में क्या करें? हमारे घर से मुख्य लाइन का चैंबर भी काफी दूर है। वहां तक लाइन ले जाने के लिए पाइप ही आठ हजार रुपये का आ गया, इसके अलावा अन्य खर्च अलग। निगम की लापरवाही का खामियाजा हम भुगत रहे हैं। तीन घरों के लिए एक चैंबर होता है। इसमें पहले घरों का पानी जाता है, वहां से एक लाइन सीधे मुख्य लाइन के चैंबर में जुड़ती है। इस तकनीकी समस्या के कारण सभी लोग परेशान हैं।

-दीपक वर्मा, रहवासी

हमारे घर के सामने एक बिजली का खंभा है, इस पर जो लाइट लगाई जाती है वह बमुश्किल दो-तीन दिन ही चलती है और बाद में बंद हो जाती है। कई बार इसे बदला गया, लेकिन समस्या हल नहीं हो पाई। विद्युत वितरण कंपनी के लोगों को बता चुके हैं, लेकिन मूल कारण खोजने में उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई है। रात के समय अंधेरा ही रहता है। दूसरा यह है कि घर के सामने ही एक खाली प्लाट है।वहां लोग कचरा पटककर चले जाते हैं। एक ओर हम स्वच्छता की बातें करते हैं, दूसरी ओर इस तरह से कचरा फेंकने पर कोई रोक नहीं है।

-ओमप्रकाश पाठक, रहवासी

वार्ड में महीने में कभी फागिंग मशीन के दर्शन होते हैं, लेकिन बाद में आती ही नहीं है। मच्छरों की समस्या के कारण हमने अपने घरों के दरवाजे जाली वाले बनवा लिए हैं, ताकि शाम के समय दरवाजा लगा दें तो अंधेरा न हो और मच्छरों से भी सुरक्षा हो जाए। शाम को अपने घर के बाहर बैठ नहीं सकते, क्योंकि इतने मच्छर काटते हैं। कालोनी में लगभग सभी घरों में यही स्थिति है। शाम के पहले ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। एक बार मच्छर अंदर घुस गए तो रातभर की परेशानी।

-जगदीश आशापुरे, रहवासी

वार्ड में नल तो आते हैं, लेकिन पानी का प्रेशर नहीं आता है। पहले अच्छे प्रेशर से पानी आता था। इससे पूरे घर को पर्याप्त पानी मिल जाता था। लेकिन अब 30 मिनट पानी आता है, लेकिन प्रेशर नहीं होने से पूरा पानी नहीं भर पाता है। जितना पानी 15 मिनट में भर जाना चाहिए, उसके लिए 30 घंटा लग जाता है। पानी की समस्या हल होनी चाहिए, क्योंकि नल भी एक दिन छोड़कर आता है।

-तुलसीराम नामदेव, रहवासी

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और भी हैं समस्याएं

वार्ड में कई घरों के सामने पेवर ब्लाक नहीं लगाए गए हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां पर लगाए थे तो उखड़ चुके हैं। विसंगति तो यह है कि बीच में कुछ घरों को छोड़कर अन्य घरों में पेवर ब्लाक लगा दिए गए हैं। इससे जिनके यहां नहीं लगे हैं, अब वे असंतुष्ट हैं। सफाईकर्मी आते हैं तो कचरा एक जगह पर एकत्रित करके चले जाते हैं। उसे उठाते नहीं है। इससे मवेशी उसे फिर से फैला देते हैं। नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी इंतजाम होना चाहिए। जल जमाव, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज की समस्या तो है ही।

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अधिकारी बोले

वार्ड नंबर 26 की जो चैंबर वाली समस्या आने बताई है, उसके लिए इंजीनियर से बात कर हल निकाला जाएगा। पानी निकासी के लिए भी इंतजाम किए जाएंगे। अन्य समस्याओं को भी दिखवाता हूं।

-डा. पुनीत शुक्ला, उपायुक्त, नगर निगम देवास

Posted By: Nai Dunia News Network

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