*जिले में कक्षा 8वीं के बाद ज्यादातर बच्चे छोड़ रहे हैं स्कूल

-9वीं के बाद स्कूलों में बच्चों की संख्या होती है कम

-बागली, कन्नाौद व खातेगांव में ज्यादा बच्चे शिक्षा से हो रहे हैं दूर

महेश सोलंकी . देवास

जिले में जिम्मेदारियों के बोझ से बच्चों की शिक्षा की डोर टूट रही है। जिले में बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं। ज्यादातर बच्चे कक्षा आठवीं के बाद स्कूल छोड़े देते हैं। नौवीं के बाद लगातार स्कूल में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है। इस साल कक्षा आठवीं में 13 हजार 410 बच्चों ने प्रवेश लिया, जबकि नौवीं क्लास में यह संख्या 10 हजार 570 रह गई। इस प्रकार करीब दो हजार बच्चों की संख्या कम हो गई। पिछले साल कक्षा 8वीं में 14 हजार 877 बच्चों ने स्कूल में प्रवेश लिया था। वहीं नौवी कक्षा में 14 हजार 338 बच्चे भर्ती हुए थे।

बागली, कन्नाौद व खातेगांव क्षेत्र में स्कूल से दूर होने वाले बच्चों की संख्या ज्यादा है। इन क्षेत्रों में बच्चे मजदूरी के लिए परिवार पलायन कर जाते हैं, या फिर आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता स्थानीय स्तर पर ही मजदूरी करवाते हैं। साथ ही बेटियों को आठवीं और दसवीं के बाद घर की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता है।

वर्ष 2022-23

ब्लाक छठी सातवीं आठवीं

बागली 2698 3357 3141

देवास 2176 2564 2623

कन्नाौद 2579 3177 2983

खातेगांव 2181 2303 2295

सोनकच्छ 1039 1402 1394

टोंकखुर्द 871 983 974

कुल 11544 13786 13410

साल-2022-23

ब्लाक 9वीं 10वीं 11वीं 12वीं

बागली 2936 2594 1828 2032

देवास 2035 2643 1822 2487

कन्नाौद 2192 2235 1321 1362

खातेगांव 1575 2803 1485 1587

सोनकच्छ 966 1326 885 1109

टोंकखुर्द 866 984 804 966

कुल 10570 11585 8145 9543

साल-2022-23

ब्लाक पहली से 12वीं

बागली 33486

देवास 26127

कन्नाौद 29689

खातेगांव 22862

सोनकच्छ 13449

टोंकखुर्द 10124

कुल 135737

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2021-22

ब्लाक छठी सातवीं आठवीं

बागली-3513-3230-3571

देवास-2658-2682-2710

कन्नाौद-3592-3111-3548

खातेगांव-2341-2285-2534

सोनकच्छ-1390-1320-1461

टोंकखुर्द-971-932-1053

कुल-14265-13560-14877

ब्लाक-9वीं-10वीं-11वीं-12वीं

बागली-3182-2840-2785-1749

देवास-3128-2831-3014-2493

कन्नाौद-3048-2810-2378-1822

खातेगांव-2088-1935-1958-1490

सोनकच्छ-1683-1584-1451-1048

टोंकखुर्द-1209-1120-1184-1012

कुल-14338-13120-12771-9614

ब्लाक-पहली से 12वीं

बागली-37994

देवास-31080

कन्नाौद-36154

खातेगांव-26096

सोनकच्छ-16198

टोंकखुर्द-11693

कुल-159215

0000000000000000000000000000000000000

2020-21

ब्लाक-आठवीं-9वीं-पहली से बारहवीं

बागली-3251-3009-33542

देवास-2554-2911-27525

कन्नाौद-3309-3076-32924

खातेगांव-1974-2067-23326

सोनकच्छ-1322-1582-14264

टोंकखुर्द-923-1106-14471

कुल-13333-13751-143052

ये कारण मुख्य कारण

-आर्थिक मजबूरी

-परिवार की स्थित ठीक नहीं होना

-गांव से स्कूलों की दूरी

-घर की जिम्मेदार संभालना

-बेटियों के मामले में उसकी विवाह की चिंता

-ग्रामीण इलाके में माता पिता भी शिक्षित नहीं होते हैं, इसलिए शिक्षा उनकी रुचि नहीं होती है

आय बढ़ाने का माध्यम मानते हैं बच्चों को

-माता-पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है। इसलिए परिवार के लोग ही अपने साथ बच्चों को मजदूरी करवाने के लिए लेकर जाते हैं।

-बागली, कन्नाौद और खातेगांव क्षेत्र में फसल कटाई के वक्त अधिंकाश माता-पिता काम के लिए दूसरे जिले में जाते हैं। टीम जब बच्चों का दुकानों व प्रतिष्ठानों से रेस्क्यू करती है तो माता-पिता की दलील होती है कि बच्चे के काम करने से परिवार की आय बढ़ेगी। ज्यादा पैसे जाएंगे।

-गांवों में दूर स्कूल होने पर माता पिता के मन में बेटियों के लिए असुरक्षा का भाव पैदा हो जाता है। 10वीं क्लास आते आते उन्हें बेटियों की शादी की भी चिंता हो जाती है। इसलिए वे स्कूल भेजने के बजाए बेटी को घर गृहस्थ का काम सीखते हैं।

(जैसा चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक जितेंद्र सुनार्तिया ने नईदुनिया को बताया)

गांव से स्कूल की दूरी भी मायने रखती है

-सबसे मुख्य कारण मजदूरी है। बाल मजदूरी होती है। क्षेत्र के बच्चों को मजदूरी के लिए अन्य जिलों में भेजने के साथ ही स्थानीय स्तर पर भी काम करवाया जाता है।

-दिल्ली व मुंबई जैसे महानगरों में पलायन भी होता है। ज्यादातर बालिकाएं 8वीं व 10वयि के बाद स्कूल छोड़ती हैं।

-गांव से स्कूल दूर होते हैं। ग्रामीण इलाकों में बेटियों पर घर छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों को संभालने की जिम्मेदार होती है। कई बार आवश्यक होने पर हम सुरक्षित पालयन करवाते हैं, ताकि बंधवा मजदूर न बनें।

-देखने में आया है कि कई परिवार कर्ज लेकर घर बनाते हैं। या फिर अन्य कार्य करते हैं। उस कर्ज को उतारने के लिए पूरा परिवार मजदूरी की आग में झुलसता रहता है।

(जैसा जनसाहस संस्था के राज्य समन्वयक जयपाल देवड़ा ने नईदुनिया को बताया)

स्कूल जाने को करते हैं प्रेरित

हो सकता है, स्कूल दूर होने की वजह से कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने में अरुचि रखते हो। हमारी टीम घर-घर जाकर पालकों को प्रेरित करती है। जिससे ज्यादा से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बच्चों का प्रवेश हो।

-एचएल खुशाल, जिला शिक्षा अधिकारी, देवास

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