उदय मंडलोई-हीरालाल गोस्वामी . बेहरी (देवास) (नईदुनिया)। देवास के शहरी इलाके शंकरगढ़ पहाड़ी के पास एक गोशाला में भूख और बीमारी से एक पखवाड़े पहले 15 से अधिक गायों की मौत हो गई थी। ऐसे में जिला मुख्यालय देवास से लगभग 55 किलोमीटर दूर बेहरी गांव में एक ऐसा शख्स है, जो बिना किसी साधन सुविधा के 350 से अधिक गायों की देखभाल कर रहा है। पशुपालकों के लिए भीमा प्रेरणास्रोत है।

भीमा ग्वाला चलती-फिरती गोशाला का संचालन कर रहा है। तीन पीढ़ी से गायों की सेवा कर रहे भीमा के पास अपनी एक भी गाय नहीं है। यह सभी ग्रामीण या किसान उनके पास छोड़ गए हैं। इनमें वृद्ध, बीमार और दूध न देने वाली गायों के साथ ही देसी नस्ल भी शामिल है। इस तरह उसके पास 350 गायें हो चुकी हंै। गायों की देखभाल करने के लिए वे जंगल में ही परिवार सहित झोपड़ी बनाकर रहते हुए गायों को संभाल रहा है। वहीं से चारे का इंतजाम होता है।

गोबर व गोमूत्र बेचकर होता है गुजारा

भीमा का कहना है कि कई लोग यह कहकर गाय छोड़ जाते हैं कि वे उसे चराने के एवज में भुगतान करेंगे। हालांकि वे कभी लौटकर नहीं आते। हालांकि इनमें कभी-कभी दूध देने वाली गाय भी मिल जाती है। गाय के गोबर व गोमूत्र से भी आय हो जाती है। सालभर में 40 से 50 हजार रुपये का गोबर व गोमूत्र बिक जाता है। पंचायत सचिव रायसिंह सेंधव और गांव के वरिष्ठ भागीरथ पटेल का कहना है कि क्षेत्र की सभी गायों को जंगल में चराने का काम भीमा का परिवार ही वर्षों से करता आया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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