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-आदिवासी उपयोजनांतर्गत ओंकारा पंचायत की 15 महिला हितग्राहियों को दिए थे 40-40 चूजे, ज्यादातर चूजों ने तोड़ा दम

राजेश परमार

कुसमानिया। नईदुनिया न्यूज

खातेगांव तहसील की ओंकारा पंचायत में आदिवासी उपयोजनांतर्गत महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए 15 हितग्राहियों को कड़कनाथ प्रजाति के 40-40 चूजे वितरित किए गए थे। चूजों के लिए टीनशेड भी बनाकर दिए गए थे। आवश्यक आहार एवं दवाई भी दी थी। शासन ने एक हितग्राही पर 30 हजार रुपए की राशि खर्च कर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करवाया। लेकिन वर्तमान में दो-तीन हितग्राहियों ने तो शेड में घास-भूसा भर दिया है, कुछ के गेट क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ शेड तो खाली ही पड़े हैं। उधर अधिकांश चूजों ने दम तोड़ दिया है।

जानकारी के मुताबिक ग्राम ओंकारा में 22 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष अवस्थी एवं क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा ने 15 हितग्राहियों को समारोहपूर्वक कड़कनाथ प्रजाति के चूजे वितरित किए थे। शासन द्वारा आदिवासी परिवारों को रोजगार मुहैया करवाने के उद्देश्य से योजना शुरू की गई थी, लेकिन हितग्राहियों में जागरूकता नहीं होने से योजना पर पलीता लग रहा है। वितरण के समय 600 चूजे 15 हितग्राहियों को दिए गए थे। इनमें से वर्तमान स्थिति में 101 मुर्गियां एवं चूजे हितग्राहियों के पास है। सभी ने अब तक 66 हजार 300 रुपए के मुर्गे बेचे और 9 हजार 350 रुपए के अंडे भी बेचे। इस प्रकार इन 15 परिवारों को कुल 75 हजार 650 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इसमें शासन के 4 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए। यदि इसी प्रकार से यह परिवार व्यापार करते रहे तो कुछ समय बाद टीनशेड के अलावा कुछ भी नहीं बचेगा। वितरण के समय हितग्राहियों को दवाई, 50 किलो आहार बैग, दाना और पानी के लिए प्लास्टिक के बर्तन दिए गए थे।

इन हितग्राहियों को वितरित किए थे

योजना अंतर्गत ओंकारा के पंचायत के ग्राम टांडा में हितग्राही कृष्णाबाई राधेश्याम, राजलबाई जीवनसिंह, सुनीताबाई सुभाष, ग्राम नंदाखेड़ा की सरिताबाई भैयालाल, सीताबाई किशोर, ग्राम सातल की भुरकीबाई अमरसिंह, फूलीबाई भावसिंह, दोंगीबाई भीमसिंह, रंगारीबाई राईमल, खिरोंदीबाई अमरसिंह, रमीबाई अंतरसिंह, कालीबाई मांगतिया, कसमाबाई कहारिया, झालीबाई मालसिंह एवं धुरंगलीबाई मासरिया को चूजे वितरित किए गए थे।

कुछ मर गए कुछ बेच दिए

इधर ग्राम सातल की हितग्राही कसमाबाई ने बताया कि डेढ़ साल पहले शासन से 40 चूजे और शेड मिला था। इसमें से कुछ बच्चे मर गए। साथ ही 2 हजार रुपए के मुर्गे बेच दिए। अब वर्तमान में 6 मुर्गे-मुर्गियां हैं।

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ठंड की वजह से मरे चूजे

इधर मामले में विक्रमपुर शासकीय पशुचिकित्सालय के सहायक पशुचिकित्सक विष्णुप्रसाद शर्मा ने बताया कि कड़कनाथ प्रजाति मुर्गीपालन के लिए अच्छा विकल्प है। ओंकारा पंचायत में चूजे ठंड की वजह से मरे हैं। वितरण होने के दो माह तक मेरे द्वारा सुबह-शाम लगातार भ्रमण कर हितग्राहियों को मार्गदर्शन दिया। फिर भी कुछ हितग्राहियों की लापरवाही एवं उचित देखरेख नहीं होने से कई चूजे मर गए।

09केयूएस-02 : कुसमानिया क्षेत्र के सातल में हितग्राहियों ने चूजों के शेड में इस तरह भर दिया घास।

09केयूएस-03 : कुसमानिया क्षेत्र के टांडा में इस तरह टूट गया गेट और खाली पड़ा शेड।

09केयूएस-06 : कुसमानिया क्षेत्र के ओंकारा में चूजे वितरित करते तत्कालीन कलेक्टर अवस्थी एवं विधायक शर्मा। (फाइल फोटो)

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