*श्री चंदाप्रभु मणिभद्र स्वामी जैन मंदिर सुतार बाखल एवं श्री चंदाप्रभु जैन मंदिर में हुए प्रवचन

देवास। हमारा धर्म है अहिंसा परमो धर्म, जिसमें अहिंसा का अर्थ है किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुंचे, लेकिन हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने के पूर्व जीवों की हिंसा कर रहे हैं

यह बात शहर के श्री चंदाप्रभु मणिभद्र स्वामी जैन मंदिर सुतार बाखल एवं श्री चंदाप्रभु जैन मंदिर में मंगलवार को पूज्य साध्वी अमिदर्शा श्रीजी ने कही। प्रवचन परम पूज्य अमितगुणा श्रीजी, अमीपूर्णा श्रीजी आदि साध्वी की निश्रा में हुए। साध्वी ने आगे कहा कि अब समय हमें हमारे आत्मा के अवलोकन करने का है। हम हमारे दिनचर्या में विभिन्ना तरीकों से पाप बढ़ा रहे हैं। जब हम बिना छने पानी का उपयोग करते है तो उससे भी हम अपने पाप बढ़ा रहे होते हैं, क्योंकि वैज्ञानिक अनुसार एक बूंद पानी में ही छत्तीस हजार छसौ चालीस जीव होते है। इसी के साथ में हम किसी दूसरे व्यक्ति को उसके ऐसे कार्य जिसमे पाप उत्पन्ना हो रहा हो उसके प्रशंसा व प्रोत्साहन करके भी अपने पापों को बढ़ा रहे होते हैं। संसार में भटकना एक खारे जल की तरह होता है। जिससे किसी भी फसल अंकुरित नहीं किया जा सकता, परंतु परमात्मा को याद करना एक मीठे जल की तरह होता है जो हर तरह से उपयोगी होता है। पूर्व में आत्मा के एक्सरे के विषय पर प्रवचन के बाद मंगलवार को साध्वीजी ने आत्मा को औषधि पर प्रवचन दिए। जिसमें उन्होंने कहा मनुष्य संसार जीवन में पाप ना करे। ऐसा तो हो नहीं सकता पर, उस पाप को कम करने की औषधि के रूप में हम अपने पाप का पश्चाताप करके, पाप का प्रायश्चित करके व पाप की प्रत्याख्या करके की आत्मा को शुद्ध कर सकते है। इस अवसर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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