सुंद्रैल-बिजवाड़ (नईदुनिया न्यूज)।

राष्ट्रीय राजमार्ग इंदौर-बैतूल 59 ए स्थित धनतालाब घाट अपने लगातार लगने वाले जाम के नाम से जाना जाता है। यहां आएदिन दुर्घटनाएं होती रहती है। भारी वाहन घाट के कठिन चढ़ाई वाले हिस्से से रिवर्स होकर खराब हो जाते हैं। सिंगल रोड होने से जाम लग जाता है। यह जाम कई-कई घंटे तक लगा रहता है। इससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। घाट के घुमावदार व कठिन चढ़ाई वाले हिस्से में सुधार की मांग राहगीर व आसपास के ग्रामीण कर रहे हैं।

एलएलबी के छात्र यश भारतभूषण शर्मा का कहना है कि यहां नवीन पुलिया का निर्माण करवाया जाना चाहिए। साथ ही ओवरलोड वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना चाहिए। घाट सेक्शन में स्थायी चौकी बनाना चाहिए। नियमित रूप से भारी वाहनों की जांच होनी चाहिए। अगर ओवरलोड वाहन निकलता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। ऐसा करने से ही समस्या दूर हो सकेगी।

पुलिया का निर्माण जरूरी

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर पटाक का कहना है कि सड़कें केवल यातायात को सुगम ही नहीं बनाती, बल्कि सभ्यता के विकास को भी बताती है। इसका प्रमाण सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर वर्तमान तक मिलता है। यहां के राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा रहता है। जाम के कारण कई बार मरीज को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने में भी समस्या होती है, जिससे मरीज के प्राण संकट में आ जाते हैं। घाट पर पुलिया का निर्माण होना जरूरी है।

कई घंटे फंसे रहते हैं वाहन

विचारक एवं लेखक शतानंद श्रोत्रिय का कहना है कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। सरकार ने सड़कों का जाल बिछा दिया है। गांव से गांव और शहर को जोड़ने के लिए सड़कें बना दी गई है। इसके बावजूद धनतालाब घाट आज भी विकास की राह देख रहा है। प्रतिदिन जाम लगने पर मुसाफिरों की पीड़ा देखी नहीं जाती। जब जाम लगता है कि कई घंटे तक वाहन यहीं पर फंसे रहते हैं। जब तक इस समस्या से निजात नहीं मिल जाती, तब तक लोगों का दर्द कम नहीं होगा।

विकास में पिछड़ गया क्षेत्र

सृजन साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ बीपी मालवीय का कहना है कि घाट पर वर्षों से जाम लगने के कारण इस क्षेत्र के विकास में बहुत कमी आई है। कोई भी बड़ा उद्योगपति इस क्षेत्र में इसलिए कोई कारखाना नहीं लगाना चाहता कि उसे पता है कि यहां की यातायात व्यवस्था बेहद लचर है। सिंगल रोड होने के साथ ही जर्जर पुलियाओं और घाट के कारण यहां जाम लगा रहता है। क्षेत्र के विकास के लिए धनतालाब जैसे घाटों को सुधारा जाना चाहिए।

जाम में फंस जाते हैं मरीज

डॉ राजेंद्र जोशी का कहना है कि इस घाट पर जाम लगने से उपचार के लिए इंदौर, देवास पहुंचाने वाले मरीज फंस जाते हैं। जब तक दूसरे रास्ते से मरीज को डाक्टर के पास पहुंचाया जाता है, तब तक देर हो चुकी होती है। जाम का दुष्परिणाम मरीजों और उनके स्वजनों को भुगतना पड़ता है। घाट को चौड़ा करना बेहद जरूरी है।

छह माह में 14 दुर्घटना

पुलिस चौकी प्रभारी राहुल रावत ने बताया कि छह महीनों में घाट सेक्शन से लेकर करीब तीन किमी तक के क्षेत्र में 14 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें तीन लोगों की मौत हुई है। यहां अक्सर जाम भी लगता है। अगर कुछ सुधार कर दिया जाए तो दुर्घटनाओं व बार-बार लगने वाले जाम से छुटकारा मिल सकता है।

पहाड़ी को काटना होगा

लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर आदेश अग्रवाल का कहना है कि इस घाट की लंबाई करीब डेढ़ किमी है, लेकिन कठिन चढ़ाई वाले भाग में कई वाहन चढ़ नहीं पाते हैं। कठिन चढ़ाई वाले भाग की लंबाई करीब 200 फीट है। कठिन चढ़ाई वाले भाग में यदि पहाड़ी को काटकर चौड़ा कर लेबल में कर दिया जाए तो इस घाट की चढ़ाई में आसानी हो जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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