सुसारी/निसरपुर (नईदुनिया न्यूज)। कोटेश्वर तीर्थ के समीप कोठड़ा में जनसहयोग से बने मुक्तिधाम में नर्मदा घाट व मुक्तिधाम समिति ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इसमें 175 लोगों ने रक्तदान कर निसरपुर ब्लॉक में एक दिन में सबसे अधिक रक्तदान करने का नया रिकॉर्ड बना दिया। समिति ने जनसहयोग से बने मुक्तिधाम का आय-व्यय पत्रक व आगे की योजनाओं के बारे में जनसमुदाय को अवगत कराया।

बुधवार को निसरपुर के समीप डूब के गांव कोठड़ा के बाहर नर्मदा किनारे बने मुक्तिधाम के समीप अलग ही नजारा था। एक तरफ डूब के गांव के खाली व डूबे मकान थे, तो दूसरी तरफ नर्मदा का अथाह बैक वाटर के बीच रक्तदान शिविर में सुबह से लेकर शाम तक दूर-दूर से अपने साधन से 175 लोगों ने आकर रक्तदान किया। निसरपुर सीबीएमओ डॉ. एनएस गेहलोत, बड़वानी जिला चिकित्सालय से डॉ. अमित बड़ोले, लैब के ललित लाड़, संजय नवसरे, योगिता भावसार व उनकी टीम ने रक्तदान कराया। घाट व मुक्तिधाम समिति ने रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र वितरित किए।

बन गया नया मुक्तिधाम

नर्मदा किनारे कोटेश्वर तीर्थ व यहां का मुक्तिधाम सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर में डूब गया था। इससे क्षेत्र के लोगों को नर्मदा के बैक वाटर के समीप खुले में ही सड़क किनारे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा था। इस समस्या को लेकर नर्मदा घाट व मुक्तिधाम निर्माण समिति ने कोठड़ा में नवीन मुक्तिधाम का बीड़ा उठाया। इसमें 1100 रुपये से एक सदस्य बनाने का कार्य शुरू किया गया। महज छह माह में 515 लोगों से 5 लाख 67 हजार की राशि अभी तक जुटाई गई। हालांकि अभी तक समिति ने कार्य पर 9 लाख से अधिक की राशि खर्च कर दी, जिसे अभी समिति के मोहन भाई पाटीदार व शांति मोटर निसरपुर ने घाटे की प्रतिपूर्ति की है।

यह सुविधा है मुक्तिधाम में

मुक्तिधाम में 6 लोगों के लिए शवदाह गृह बने हैं। यहां लकड़ी व कंडे की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही पानी के लिए 24 घंटे की व्यवस्थाओं के साथ पेयजल के लिए आरओ की व्यवस्था है। पौधोरोपण के साथ लोगों के बैठने के लिए चबूतरों का निर्माण किया जा चुका है। डूब के बाहर मुक्तिधाम व पार्किंग व्यवस्था के लिए कोठड़ा गांव के मधुभाई ककोरे, यतीश चांदोरे, निसरपुर के रणछोड़ मामा, शिवजी मामा व विमल तांतेड़ ने पांच एकड़ जमीन दान में दी है। आने समय में मुक्तिधाम क्षेत्र में एक सभागृह व एक बगीचा जनसहयोग से बनाया जाएगा। गौरतलब है कि 1400 ट्रॉली मिट्टी भरकर जमीन समतल की गई है।

कोटेश्वर तीर्थ को यहीं बसाया जाए

बैठक में सर्वानुमति से निर्णय लिया गया कि कोटेश्वर तीर्थ गत दो साल से बैक वाटर में जलमग्न हो रहा है। भगवान व मंदिर भी वहीं है। ऐसे में कोटेश्वर तीर्थ को कोठड़ा के समीप ही बसाया जाए। इसकी सब लोगों ने एकमत से बात कही है। बैठक में कहा गया कि यहां कोठड़ा में डूब के बाहर एनवीडीए के पास पर्याप्त रूप से तीर्थ को विस्थापित करने के लिए जमीन है। उसके बाद भी निर्णय लेने में देरी क्यों की जा रही है। वहीं लोगों ने कहा कि अगर कोटेश्वर तीर्थ को यहां बसाया जाता है, तो वह पुराने तीर्थ से महज दो किमी दूर रहेगा। ऐसे में जब बैक वाटर उतरेगा, तो नए के साथ प्राचीन तीर्थ का महत्व भी रहेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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