डही (नईदुनिया न्यूज)। डेढ़ साल पहले क्षेत्र का ग्राम बड़वान्या निवासी 20 वर्षीय दृष्टिहीन अनिल चंदरसिंह पिपलाज महज पांच से 10 रुपये में गांव के चौराहों पर गीत गाकर मनोरंजन करता था। उसकी खासियत यह है कि वह गले से बैंड जैसी धुन निकाल लेता है। इसको लेकर नईदुनिया ने दो दिसंबर 2020 को दृष्टिहीन अनिल पिपलाज के गांव में इस तरह से गीत गायन को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद लोग उसे जानने लगे। डेढ़ साल बाद अब अनिल की गीतों की धूम शादियों में डीजे पर मची हुई है। पांच से 10 रुपये लेकर आर्थिक तंगी से गुजरने वाला यह दृष्टिहीन युवक आदिवासी प्लेबैक सिंगर बन चुका है।

अनिल पिपलाज के गाने कुक्षी, बड़वानी, नागलवाड़ी, गंधवानी, सोंडवा आदि जगह स्टूडियो में आदिवासी गीत- संगीत के साथ तैयार हो रहे हैं। यूट्यूब पर भी अनिल के गाने अपलोड हैं। वह अब तक 20 गीत गा चुका हूं। प्रति गाने के चार से पांच हजार रुपये ले रहा है।

इन गीतों की शादियों में मची धूम

इन दिनों क्षेत्र सहित आदिवासी बहुल जिले धार, आलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी में आदिवासी समाज में हो रही शादियों में दृष्टिहीन गायक अनिल के गीतों की धूम मची हुई है। उनका गीत 'आखा इयाव देखी आय, हुई गयली नाराज' लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इसमें इयाव से तात्पर्य है ब्याह। इसी तरह उनके अन्य आदिवासी गाने 'कवेली-कवेली तुते कमर पातेली.., छाम छिम गुगरिया वाजे, झिनली घुघरी नु गाट, दारु की तुमड़ी छमाछम वाजे, उरी भाले जानुडी देखु थारो घर, जानू घुमणे मती जाय वो, उरी भा ले यायणी, आंबे रुलाये जानूडी, रिंगणा वेचणे गुयली आदि शीर्षक से बने गाने खूब लोकप्रिय हो रहे हैं।

इस तरह शुरुआत हुई

इसके पहले अनिल दुकानों या गांव-मोहल्ले में जहां भी गाना गाता था तो लोग उसे खुशी से कुछ रुपये दे देते थे। इन रुपयों को इकट्ठा कर अनिल ने 600 रुपये का एक सस्ता मोबाइल खरीदा। इसके साथ 900 रुपये का एक यूट्यूब डिब्बा खरीदा, जिसमें चिलम और चिप को अटैच किया गया। बस यही उसका संगीत का मुख्य प्लेटफार्म था। इसके सहारे व चिलम पर एक से एक गीत-संगीत को गाकर वह ध्यान बंटोरता था। बड़वान्या के नीतेश राठौड़ ने अनिल के बारे में जानकारी दी। जब यह नईदुनिया में प्रकाशित हुई तो अनिल की प्रसिद्धि को चार चांद लग गए। खास बात यह है कि कई गीतों में जब कभी गायन के बीच में ठहराव आता है, तो उस वक्त निकलने वाले संगीत को भी वह अपने गले से ही निकाल लेता है। अशिक्षित व दोनों आंखों से दिखाई नहीं देने के बावजूद वह अपने घर से गांव में कहीं पर भी बिना किसी का सहारा लेकर चला जाता है। घर के छोटे-मोटे काम के लिए भी बाजार में आना-जाना कर घरवालों की मदद किया करता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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