सिर्फ छह तालाब अस्तित्व में, इनको बचाने में लगाएंगे शक्ति

-साढ़े बारह तालाब की नगरी कहलाता है धार, राजा भोज के समय की इंजीनियरिंग की मिसाल थे तालाब

-जलशक्ति अभियान के तहत होगी कोशिश, संबंधित एजेंसी ने शुरू किया योजना पर काम

प्रेमविजय पाटिल

धार। नईदुनिया

जल शक्ति अभियान के तहत पहली बार धार शहर के साढ़े बारह तालाबों की सुध लेने की कवायद की जा रही है। इसके लिए कार्य करने वाली एजेंसी ने तालाबों का बहुत ही सूक्ष्मता के साथ अध्ययन किया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह कि कई तालाब तो अब बचे ही नहीं है। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 6 तालाब अस्तित्व में हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि इन छह तालाबों को बचाने के लिए योजना तैयार की जा रही है। खासकर धार के धूप तालाब यानी मुक्तिधाम वाले तालाब को फिर से जीवित करने के लिए बड़ी कोशिश होगी। साथ ही अन्य तालाबों को भी लबालब करने के साथ-साथ उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए नगर पालिका जल शक्ति अभियान के तहत मैदानी स्तर की तैयारियां कर रहा है। साढ़े 12 तालाबों की नगरी धीरे-धीरे अपने तालाबों के अस्तित्व को समाप्त होने पर आंसू बहा रही है। कारण यह है कि राजा भोज की तालाब की इंजीनियरिंग व्यवस्था को संभालने में उदासीनता बरती गई है।

ये शहर के प्रमुख साढ़े बारह तालाब

धार शहर के साढ़े बारह तालाब में -1 देवी सागर, 2 कुंज तालाब, 3 मुंज तालाब, 4 नंदसागर, 5 धूप तालाब, 6 लेंड्या तालाब, 7 नटनागर तालाब, 8 सिद्धनाथ तालाब, 9 मसूरिया तालाब, 10 पूर्णिया तालाब, 11 कन तालाब, 12 राय दसाड़ तालाब शामिल हैं। जबकि एक छोटा तालाब यानी तलाई एसपी बंगले के पीछे है। इस तरह से 12 तालाब व एक तलाई को मिलाकर साढ़े तालाब का शहर कहलाता है। ---

ऐसे समझें राजा भोज की इंजीनियरिंग को

दरअसल राजा भोज की तालाब की इंजीनियरिंग उस जमाने में बहुत ही अग्रणी हुआ करती थी। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि एक तालाब में पानी भरने पर उसका ओवरफ्लो का पानी बर्बाद होने की बजाए दूसरे तालाब में जाकर मिल जाता था।

1-धार शहर के कुंज तालाब का ओवरफ्लो का पानी मुंज तालाब में पहुंचता है। मुंज तालाब का अतिरिक्त पानी बहकर देवी सागर पहुंचता है। देवी सागर का पानी नंद सागर तालाब में मिलता है। इसी तरह से नंद सागर का तालाब का पानी धूप तालाब में मिलता है। जबकि धूप तालाब से अतिरिक्त पानी गोबरिया खाल और सादी नदी में होकर दिलावरी नदी में पहुंच जाता था। इस तरह से तालाब से पानी धार शहर के बाहरी क्षेत्र में पहुंचाने की एक व्यवस्था थी। नदी में पानी पहुंचने के पहले तालाबों को लबालब कर दिया जाता था। जिससे कि नदी में बहुत ही कम मात्रा में अतिरिक्त पानी बहकर जाए। जल शक्ति अभियान के तहत भी ऐसी ही कल्पना की जा रही है कि शहर का पानी शहर में रहे।

2-इसी प्रकार से तालाबों की दूसरी दिशा में भी श्रृंखला थी। उसमें ऑफिसर कॉलोनी के पास स्थित छोटी यानी राती तलाई का पानी सिद्धनाथ तालाब में, वहां से पूर्णिया तालाब तथा पूर्णिया तालाब से होकर पानी लेंड्या तालाब में होकर राय दसाड़ तालाब में पहुंचता था। नगर के उत्तर-दक्षिण क्षेत्र में स्थित कुंज और मुंज तालाब अब अलग-अलग नहीं रह गए। नई पीढ़ी इसे अब छतरी तालाब के नाम से ही पहचानती है। इन तालाबों में से कई तालाब तो अब अस्तित्व में ही नहीं हैं। और कुछ तालाब अब अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे हैं।

केचमेंट एरिया पता कर रहे हैं

सबसे अच्छी बात यह है कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जल शक्ति अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत नगर पालिका द्वारा शहर के महत्वपूर्ण तालाबों के साथ-साथ 25 बावड़ियों की भी सुध ली जा रही है। इसके लिए प्रोजेक्ट बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। शैलिष कंसलटेंट इंदौर के विराग सक्सेना ने बताया कि प्रोजेक्ट बनाने का काम जारी है। हमारा एक ही लक्ष्य है कि तालाबों के माध्यम से महत्वपूर्ण काम हो। तालाब अस्तित्व में बने रहे तो शहर को कभी भी भूजल स्तर के मामले में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हमने तालाबों के मामले में विस्तार से अध्ययन करना शुरू कर दिया है। उसकी बहुत सारी जानकारी हमने निकाली है। आने वाले समय में इसके लिए हम मैदानी स्तर पर भी बहुत सारी चीजें तैयार करेंगे। खासकर इन तालाबों का क्षेत्रफल कितना था, उनके केचमेंट एरिया में किस तरह से सुधार हो सकता है, इसको लेकर हम एक सकारात्मक पहल करने जा रहे हैं। इस तरह के काम से निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

पुरानी व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास

विराग सक्सेना ने कहा कि वर्तमान में देवीजी तालाब से लेकर नटनागरा तालाब में सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। इन तालाबों के साथ-साथ अन्य तालाबों से तलाई आदि को लेकर हम लोग ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी तालाबों की एक विशेष रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिससे कि विशेष दस्तावेज तैयार हो सके। जो अस्तित्व में हैं उन तालाबों को किस तरह से पुरानी व्यवस्था अनुसार ही बनाए रखा जाए, उसके लिए भी प्रयास किया जाएगा।

धूप तालाब को गहरा करेंगे

सक्सेना का कहना है कि हम विशेष रूप से धूप तालाब को विकसित करने जा रहे हैं। मुक्तिधाम के पास तालाब के इस तालाब को गहरा करने के साथ-साथ इसको ठीक किया जाएगा। वर्तमान में पानी भरता है लेकिन लंबे समय तक टिकता नहीं है। तालाब की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। ताकि लगातार उसमें पानी भरने की स्थिति बने। अन्य तालाबों के बारे में भी इस तरह की कवायद की जाना है। शहर के तालाबों को अस्तित्व में रखने के लिए कवायद जरूरी हो गई है।

हम तालाब गहरीकरण के साथ-साथ उसके केचमेंट एरिया पर ध्यान दे रहे हैं। शहर साढ़े बारह तालाबों की नगरी के नाम से जाना जाता है। लेकिन अब इसमें से करीब 6 तालाब अस्तित्व में बचे हैं। इन तालाबों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन सभी तालाबों को जीवित रखने के साथ-साथ उनसे शहर का पानी शहर में ही रोकने की कवायद होगी। जल शक्ति के साथ-साथ अक्षय संचय अभियान के तहत कवायद होगी।

-विजय कुमार शर्मा, सीएमओ , नगर पालिका धार