- बिजली कंपनी की कारस्तानी, डूब चुके घरों-दुकानों की बिजली दो माह पहले ही काट दी, डूब प्रभावितों के सामने नई मुसीबत

सुसारी/निसरपुर। नईदुनिया न्यूज

निसरपुर में दो माह से घर-दुकानें सब डूब चुकी है। बिजली भी दो माह पूर्व काट दी गई है। और तो और बिजली के तार, पोल व मीटर भी डूब चुके हैं। उसके बाद भी विद्युत वितरण कंपनी ने निसरपुर डूब प्रभावित सैकड़ों लोगों को डूब के घर व मकानों के हजारों की राशि के बिजली बिल थमा दिए हैं। बिल में मीटर की रीडिंग की फोटो के बजाए दूर से बैक वाटर में डूब चुके मकानों की फोटो छापकर उपभोक्ताओं को बिल दिए गए हैं। डूब चुके मकानों व घरों के बिजली बिल आने से डूब के लोगों में आक्रोश है। वहीं विद्युत वितरण कंपनी के जिम्मेदार कह रहे हैं कि ये पुराने बिल हैं। जबकि बिल अगस्त व सितंबर के दिए गए हैं।

निसरपुर में अब बैक वाटर का राज है। दुकानें, घर, बाजार सब डूब चुके हैं। बस स्टैंड व मुख्य बाजार क्षेत्र में 130 मीटर बैक वाटर लेवल के बाद 8 अगस्त से बिजली काट कर प्रदाय पूरी तरह बंद कर दिया गया था। उसके बाद भी इस क्षेत्र के सैकड़ों उपभोक्ताओं को अगस्त व सितंबर के हजारों रुपए के बिल विद्युत वितरण कंपनी ने थमा दिए हैं। पहले से ही डूब के लोग परेशान हैं और अब उन्हें नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

डूब के घर का फोटो व बिल पर रीडिंग की जगह असेसमेंट राशि

मोहम्मद बोहरा व मुके श पाटीदार ने बताया कि मप्र विद्युत वितरण कंपनी ने अगस्त व सितंबर के बिल भिजवाए हैं। इसमें मीटर की रीडिंग नहीं दर्शाई गई। वहां लिखा है असेसमेंट यानी बिना रीडिंग का बिल। वहीं बिल पर मीटर के फोटो के स्थान पर सैकड़ों फीट दूर से बैक वाटर के बीच डूबे मकान व गलियों का फोटो डाल दिया है। जब खुद फोटो बता रहा है कि मकान व दुकान डूब गए हैं तो बिल कै से दिया जा रहा है। जब बिजली ही नहीं, हम भी वहां नहीं, उसके बाद बिल दिए जाना समझ से परे हैं।

डूब के लोगों की जिंदगी को मजाक बना दिया

गांव के पूर्व सरपंच अंतिम पटेल ने बताया कि एक तो पहले से ही डूब के लोग परेशान हैं। जो मकान डूब चुके हैं, उसके हजारों के बिल देकर बिजली कंपनी ने डूब के लोगों की जिंदगी को मजाक बना दिया है। कंपनी के अधिकारी खुद लाइन काटने वाले हैं और वही बिल दे रहे हैं। आशीष कु मरावत ने बताया कि बिजली कंपनी वाले कह रहे हैं कि 50 रुपए के स्टाम्प पेपर पर लिखकर दीजिए कि हमारा मीटर बंद कि या जाए, तब बंद कि या जाएगा। क्योंकि मीटर जब चालू कि या था, तब स्टाम्प पर लिखकर दिया था। अब हम जब तक लिखकर नहीं देंगे, तब तक क्या बिल देते रहेंगे? यह कहां का न्याय है। दूसरी ओर बिजली कंपनी डूब चुकी घरेलू लाइन को निकालने के लिए करोड़ों की राशि एनवीडीए से मांग रहा है। ऐसे में जो लाइन डूब में है, उसके बिल कै से दे दिए।

गलती हुई है तो सही कर देंगे

यह जब रह रहे थे, तब के बिल होंगे। उसके बाद भी यदि कि सी प्रकार की कोई गलती हुई है तो उसे सही कर देंगे।

एसके चंद्राकर, कनिष्ठ यंत्री, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी निसरपुर

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21 सुसारी 3 निसरपुर में बिजली के बिल पर मीटर की रीडिंग की जगह बैक वाटर में डूबे मकान की फोटो छापी गई है।

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Posted By: Nai Dunia News Network