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- दसाई में पहली बार निकला मुमुक्षु का वर्षीदान वरघोड़ा, आचार्यश्री ऋषभचंद्रजी ने दी निश्रा

- मोहनखेड़ा महातीर्थ पर 15 जनवरी को होगी दीक्षा

दसाई। नईदुनिया न्यूज

नगर के अशोक कु मार नाहर के पुत्र अजय नाहर ने संयम पथ की ओर पहला कदम बढ़ाया है। मंगलवार को नगर के इतिहास में पहली बार वर्षीदान वरघोड़ा निकाला गया। इसमें बग्घी पर सवार मुमुक्षु अजय नाहर ने दोनों हाथों से खुलकर सांसारिक वस्तुएं लुटाई। करीब एक कि मी के भ्रमण के दौरान मुमुक्षु ने कपड़े, रुपए, बर्तन, पेन, कॉपी व खाद्यान्न सामग्री का वर्षीदान कि या। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर मुमुक्ष के स्वागत में फू ल बरसाए गए।

सुबह 9 बजे संजय कॉलोनी से आचार्य ऋषभचंद्रजी सूरीश्वर का मुनिमंडल के साथ नगर में मंगल प्रवेश हुआ। इसके बाद सांसारिक जीवन त्याग कर 15 जनवरी 2020 में मोहनखेड़ा तीर्थ पर दीक्षा लेने वाले मुमुक्षु अजय नाहर का वर्षीदान वरघोड़ा बस स्टैंड से प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ तेजाजी चौक पहुंचा। जहां धर्मसभा हुई।

धर्म के मार्ग पर कांटे नहीं, हमेशा फू ल ही मिलते हैं

तेजाजी चौक पर धर्मसभा व मुमुक्षु का बहुमान कार्यक्रम आयोजित कि या गया। इसमें प्रथम आगमन पर आचार्य ऋषभचंद सूरीश्वर ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन में कभी भी कांटे नहीं आते हैं। हमेशा फू ल ही मिलते हैं। इसलिए धर्म के काम में आगे रहें। संयम का मार्ग अपने जीवन को धन्य बनाने का मार्ग है। इस मार्ग से अपने जीवन का उदय भी हो रहा है। कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीसंघ अध्यक्ष संजय पिपाड़ा, प्रवीण मंडलेचा, नीलेश सियाल, नीलेश लोढ़ा व जितेंद्र लोढा ने दीप प्रज्वलित कि या। स्वागत गीत नेहा व मुस्कान पावेचा ने प्रस्तुत कि या। दसाई से अंतिम विदाई पर युक्ता मंडलेचा ने गीत की प्रस्तुति दी। संचालन राके श नाहर ने कि या। आभार प्रवीण मंडलेचा ने माना। आचार्यश्री के प्रथम दसाई आगमन पर श्रीसंघ के वरिष्ठ बाबूलाल मंडलेचा, शैतानमल नाहर, मांगीलाल लोढ़ा, ज्ञानचंद्र पावेचा, पंकज बुरड़, सुरेश नाहर, सुरेश मेहता, जितेंद्र नाहर, सुरेशचंद सियाल व महावीर खाबिया ने कांबली ओढ़ाई।

अभिनंदन पत्र भेंट कर बहुमान कि या

सांसारिक जीवन त्याग कर साधू जीवन व्यतीत करने जा रहे अजय नाहर को अभिनंदन पत्र भेंट कर बहुमान कि या गया। पारसमल पावेचा, संजय पिपाड़ा, सागरमल बम, तेजमल चंडालिया, दिलीप मंडलेचा, नरेंद्र जैन व सुरेश नाहर ने बहुमान कि या। राजेंद्र नवयुवक परिषद परिवार द्वारा भी अभिनंदन पत्र दिया गया।

स्तवन की प्रस्तुति

दीक्षा समारोह को यादगार बनाने के लिए सोमवार रात इंदौर की अदिती कोठारी ने एक से बढ़कर एक स्तवन प्रस्तुत कि ए। के सरियों रंग लागियो वैरागी स्वतन की प्रस्तुति ने हर कि सी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। जीवन में आने वाले सारे त्योहारों पर प्रस्तुत स्तवन सुनकर हर कोई झूम उठा। अंतिम विदाई पर मुमुक्षु के माता के पैर पूजन करते समय हर कि सी की आंखों से आंसू निकल गए।

(बॉक्स)

भाई के रूप में मिले मुनि जिनचंद्रजी तो जगत जननी बनी माता

मुमुक्षु अजय नाहर ने नगरवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे गुरु ही मेरे भगवान है। मेरे गुरु ने मेरे दुख-सुख में हमेशा मेरा साथ दिया है और यही मेरे जीवन की नैया पार लगाने में सक्षम है। जब मैं शिखरजी की यात्रा कर रहा था तो मुझे विश्वास नहीं था कि मैं यह यात्रा कर पाऊंगा, लेकि न गुरु की महती कृपा और आशीर्वाद से मैंने बिना डोली के पैदल यात्रा की। मुझे बिलकु ल भी थकान महसूस नहीं हुई। मैंने एक भाई और मां को छोड़ा है तो मुनि जिनचंद्रविजयजी भाई के रुप में मिले हैं और जगत जननी माता मेरी माता बन गई है। अब मेरी मां को मेरी चिंता करने की जरुरत नहीं है ।

चित्र -

10 डीसीआई 02 दसाई में आचार्यश्री ऋषभचंद्रजी के समक्ष मुमुक्षु अजय नाहर का बहुमान अभिनंदन पत्र देकर करते हुए समाज के वरिष्ठ।

10 डीसीआई 03 दसाई में निकले वर्षीदान वरघोड़े में मुमुक्षु अजय नाहर दोनों हाथों से रुपयों का दान करते हुए।

10 डीसीआई 04 दसाई में मुमुक्षु अजय नाहर अपनी मां से लिपटकर अंतिम विदाई लेते हुए।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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