धामनोद (नईदुनिया न्यूज)। नगर से महज एक किलोमीटर दूर बेगंदा रोड स्थित मां हिंगलाज मंदिर अतिप्राचीन है। बुजुर्गों के अनुसार यह मंदिर पांच हजार साल से भी अधिक पुराना है। खास बात यह है कि विश्व में मां हिंगलाज के दो ही मंदिर हैं। एक मंदिर पाकिस्तान, तो दूसरा मंदिर धामनोद में हैं।

मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि जब राजा उदल युद्ध में जाते थे, तो मां हिंगलाज से मन्नात लेते थे। जब युद्ध जीतकर आते थे, तो मन्नात पूरी करते थे। यह क्षेत्र भंवरी वन के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर स्वयंभू है। इसका जीर्णोद्धार धामनोद के किसान ने 71 वर्ष पहले किया था। लोगों की आस्था का यह विशेष केंद्र है। नगर के अलावा आसपास के लोग भी यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार 16 साल पहले यहां के वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश धाडिया ने किया था।

पांच साल से निकल रही चुनरी यात्रा

पिछले पांच साल से लगातार यहां नवरात्र में महाष्टमी पर चुनरी कलश यात्रा निकाली जाती है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। बुधवार अष्टमी को भंवरी मोहल्ला स्थित राम मंदिर से चुनरी यात्रा निकाली गई, जो बेगंद रोड स्थित हिंगलाज माता मंदिर पहुंची। सालभर में मां हिंगलाज सेवा समिति द्वारा पांच कार्यक्रम किए जाते हैं। मकर संक्रांति पर महाआरती एवं जलेबी-पोहे का प्रसाद वितरण होता है। शिवरात्रि में फलाहार बांटा जाता है। दीपावली पर 5100 दीपक लगाकर दीप यज्ञ किया जाता है। नवरात्र में भंडारा होता है तथा नौ दिन शतचंडी पाठ व नवचंडी पाठ किया जाता है। नवमी पर यज्ञ की पूर्णाहुति होती है।

नौ दिन तक जलता है अखंड दीपक

कालांतर में यहां अद्भुत चमत्कार हुआ। श्रद्धालुओं ने यहां स्वतः ही दीपक प्रज्वलित होते देखा। बस तभी से मंदिर में हर साल नवरात्र में नौ दिन तक अखंड दीपक जलता है। मां हिंगलाज सेवा समिति के सदस्यों में रमेश पाटीदार, सुभाष काकाजी बेगंदा, रमेश महिलिया, विकास महिलिया, आत्माराम, वीरेंद्र गीते, रमेश टकसाली गत पांच साल से मंदिर की देखभाल एवं संचालन व्यवस्था देख रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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