धार (नईदुनिया प्रतिनिधि)। समीपस्थ ग्राम पाडलिया में श्वानों के हमले में 3 साल की बालिका नंदनी की दर्दनाक मौत के बाद अभी तक नगरीय निकाय द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आवारा श्वानों का आतंक बरकरार है। इधर शुक्रवार को जिला चिकित्सालय में बच्ची का पोस्टमार्टम किया गया और उसके बाद शव स्वजन को सौंप दिया गया। गांव में दोपहर को अंतिम संस्कार किया गया। कलेक्टर डॉ. पंकज जैन गांव भी पहुंचे और बालिका के स्वजन को सहायता राशि दी गई। जिले में एक साल में करीब 2500 लोगों को श्वान ने काटा है। 800 से अधिक मामले तो केवल जिला अस्पताल में ही आ चुके हैं। इस बच्ची की मौत से यह सवाल उपजा है कि आखिर कब लोगों को आवारा श्वानों के आतंक से छुटकारा मिलेगा।

शिकारी श्वानों जैसे घाव

इधर बालिका के गर्दन और चेहरे पर श्वानों ने सबसे पहले अटैक किया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे के चेहरे पर सबसे पहले इन श्वानों ने अटैक किया। बच्ची को बुरी तरह से नोच दिया। ऐसे में पांच गंभीर जख्म हुए हैं। 15 अन्य घाव हुए। चेहरे पर आंखों को भी नुकसान पहुंचाया। ऐसा लग रहा था मानो ये शिकारी श्वान हों। क्योंकि जिस तरह से इन्होंने अटैक किया है, उस तरह से बहुत चिंताजनक स्थिति सामने आई है।

गौरतलब है कि गुरुवार की शाम को ग्राम पाडलिया में खेत पर बने मकान के पास खेल रही तीन साल की नंदनी पर श्वानों के समूह ने अटैक कर दिया था। उसी में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसको गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय लाया गया था जहां आइसीयू में उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन वहां पर कुछ ही पल में उसकी मौत हो गई।

गांव में आवारा श्वानों का आतंक पहले से ही है

इधर गांव में आवारा श्वानों का बहुत आतंक है। पहले भी कई बार बच्चों को यहां पर इस तरह से हमला किया गया। गनीमत यह रही कि उस समय किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी 6 साल की एक बच्ची पर हमला हो गया था। उस समय आसपास लोग मौजूद थे। इसलिए बड़ा हादसा नहीं हुआ। उस बच्ची को भी उपचार के लिए इंदौर ले जाना पड़ा था। लंबा इलाज करवाना पड़ा था।

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने धार कलेक्टर पंकज जैन से श्वानों के काटे जाने से बच्ची की मौत के संबंध में फोन पर चर्चा की। कलेक्टर डॉ. जैन ने बताया कि रात्रि में बच्ची के स्वजन को सहायता राशि के रूप में 10 हजार रुपये दिए गए थे। शुक्रवार को 15000 रुपये अतिरिक्त दिए हैं। इसके अलावा 5000 रुपये अंत्येष्टि सहायता के रूप में भी राशि दी गई है। जिले के सभी नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पुनः ऐसी घटना नहीं हों। इसके लिए निकाय के प्रविधान के अंतर्गत कार्रवाई करें। कलेक्टर ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार तक बात पहुंच गई लेकिन अभी तक इसमें कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।

मां का रो-रोकर बुरा हाल

नंदनी का शव जैसे ही घर पहुंचा तो मां का और भी बुरा हाल हो गया। नंदनी कल तक जहां खेल रही थी वहां पर सन्नााटा पसरा हुआ था। जो बड़ा भाई कभी अपनी बहन को दुलार करके साथ में खिलाता था। वह अंत्येष्टि के लिए पिता के साथ निकला तो उसके मुंह से अपनी बहन नंदनी की ही रट निकलती रही। पिता राजेंद्र होहारी बेटी का शव हाथ में उठाकर चलता रहा और बच्ची को मुक्तिधाम के निकट दफनाया गया। राजेंद्र आदिवासी और गरीब परिवार का मुखिया है। वह ईश्वर सिंह ठाकुर के खेत पर चौकीदारी का काम करता है। बड़ा बेटा समीर और छोटी बेटी समिका के साथ नंदनी खेला करती थी। घटनास्थल पर शुक्रवार को भी खून फैला हुआ था। जगह-जगह बच्ची के बाल और खून के निशान दिखाई दे रहे थे जो यह बता रहे थे कि किस तरह से कुत्तों ने उसको दर्दनाक मौत दी।

कलेक्टर डॉ. पंकज जैन ने नगर पालिका व जिला प्रशासन के अधिकारियों को इस घटना को लेकर आवारा श्वानों की धरपकड़ के लिए निर्देश दिए हैं, किंतु अभी तक न शहर में और न ही ग्रामीण क्षेत्रों में श्वानों की धरपकड़ के लिए कोई कार्रवाई की गई है। जिले में न तो श्वानों को पकड़ने, रखने की कोई व्यवस्था है और न ही नसबंदी की। लोग नपा के साथ ही प्रशासन से भी कई बार शिकायत कर चुके हैं। आवारा श्वान स्कूटी-बाइक के पीछे दौड़ पड़ते हैं। कोई आवारा श्वानों के काटने से जख्मी होता है तो कोई अनियंत्रित होकर गिरकर घायल हो जाता है।

मप्र मानव अधिकार आयोग ने कहा -मुख्य सचिव एवं कलेक्टर तीन सप्ताह में दें जवाब

इस मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मुख्य सचिव व कलेक्टर, धार एवं ग्राम पंचायत, पाडलिया से तीन सप्ताह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है। आयोग द्वारा पूछा गया है कि धार जिले के गांवों में श्वानों की नसबंदी आदि एवं अन्य सुरक्षात्मक उपायों की क्या व्यवस्था है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या इस प्रकरण में कोई मुआवजा दिया गया है या नहीं।

उल्लेखनीय है कि आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली दुर्घटनाओं के संबंध में मप्र मानव अधिकार आयोग ने 17 मई 2019 को राज्य शासन व स्थानीय प्रशासन और उनके लोकसेवकों को पालनार्थ कुल ग्यारह अनुशंसाएं की थीं। इसका आज तक कोई मसौदा तैयार नहीं हुआ है।

विभिन्ना वैधानिक प्रविधानों के अंतर्गत अपेक्षा के अनुरूप मप्र शासन स्थानीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग आदि को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराते हुए ऐसे आवारा श्वानों के संबंध में आवश्यक बाड़ों, श्वान पकड़ने के वाहन, कर्मचारियों की व्यवस्था करने की बात कही। मोबाइल मेडिकल वैन, श्वानों के स्टरलाइजेशन एंड इम्यूलाईजेशन, नियमानुसार संबंधित श्वानों को विनिष्ट किए जाने की कार्रवाई ऐसी दुर्घटनाओं से पीड़ित व्यक्तियों के लिए निश्शुल्क इलाज एवं आवश्यक दवाइयों की प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्धता आदि की अनुशंसा की गई थी।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local