धार/ डही (नईदुनिया न्यूज)। आपने सड़काें पर एंबुलेंस काे दाैड़ते हुए अक्सर देखा हाेगा, लेकिन क्या कभी नाव में तैरते अस्पताल काे देखा है। जी हां हम बात कर रहे हैं धार जिले के डही में संचालित हाेने वाली नदी एंबुलेंस की। ये एंबुलेंस अब नदी किनारे बसे गांवाें के लिए अब लाइफ लाइन बन चुकी है। ऐसे में गांव में यदि काेई बीमार हाेता है ताे उसे नदी पार करके अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्याेंकि नाव में तैरता अस्पताल सीधे गांव में ही पहुंच जाता है।

दरअसल पूर्व केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के इस दुनिया से अलविदा होने के बाद भी उनकी संस्था नर्मदा समग्र नदी एंबुलेंस के माध्यम से नर्मदा तटीय गांवों के वनवासियों को निश्शुल्क स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य आदि सेवाएं उपलब्ध करवा रही है। डही विकासखंड के नर्मदा तट के दसाणा, धरमराय, छाछकुआं, दभानी व आलीराजपुर जिले के ककराना आदि गांवों में नदी एंबुलेंस आज भी पहुंच रही है। संस्था ने 2011 में यह व्यवस्था शुरू की थी, जो देश की पहली और एकमात्र सेवा है। धार जिले का डही विकासखंड भौगोलिक रूप से बहुत ही भिन्न है। यहां नर्मदा तट से जुड़े कई ऐसे गांव हैं, जो पहाड़ों में दुर्गम अंचल में स्थित है। ऐसे में यहां निवासरत अत्यंत गरीब वर्ग के ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों को देखते हुए स्व. अनिल माधव दवे की संस्था नर्मदा समग्र ने 2011 में डही और आलीराजपुर के ककराना तक फैली नर्मदा के तटीय गांवों में स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए नर्मदा में एंबुलेंस चलाई, जो कि स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस एक प्रकार का चलता-फिरता अस्पताल है। वर्ष 2014 में स्व. दवे खुद डही के धरमराय क्षेत्र में आए थे। उन्होंने अपने द्वारा बनाई नर्मदा एंबुलेंस व्यवस्था का अवलोकन कर महाराष्ट्र तक इसके विस्तार की बात की थी। इसके बाद वे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री बने, तब उम्मीद की जा रही थी कि इन सुविधाओं का विस्तार महाराष्ट्र तक होगा, लेकिन 2017 में उनके निधन के बाद क्षेत्र में ही नर्मदा एंबुलेंस व्यवस्था का खटाई में पड़ जाने का अंदेशा जताया जा रहा था। हालांकि नर्मदा समग्र से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्व. दवे के संकल्प को आज भी जीवित बनाए रखा है और उनकी संस्था आज भी डही क्षेत्र में काम कर रही है। देश का पहला चलता-फिरता अस्पताल नर्मदा में आज भी दौड़ लगा रहा है।

नर्मदा का तट बन जाता है अस्पतालः नदी एंबुलेंस के पूर्व समन्वयक गोपाल प्रजापति (डही) ने बताया कि वर्तमान में नदी एंबुलेंस के समन्वयक राजेश जादम है। डा. कमलेश भावसार सहित अन्य मेडिकल स्टाफ सेवा दे रहा है। एंबुलेंस चालक के रूप में बलवंत सोलंकी एवं नासला सोलंकी सेवा दे रहे हैं। एंबुलेंस एक ऐसी बोट पर है, जो कि विभिन्न सुविधाओं से सज्जित है। नर्मदा का तट यहां अस्पताल बन जाता है। मरीज बोट की आवाज सुनकर अपने स्वजन की मदद से नर्मदा किनारे आ जाते हैं और फिर शुरू हो जाता है उनका इलाज। चिकित्सक उनकी जांच पड़ताल करने के बाद उन्हें आवश्यक दवाई उपलब्ध करवाता है। इस तरह नदी एंबुलेंस सीधे तौर पर चलित चिकित्सालय जैसी व्यवस्था है। यह योजना वर्ष 2011 से अब तक सतत चली आ रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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