नालछा (नईदुनिया न्यूज)। नालछा विकासखंड की ग्राम पंचायत करमतलाई के मजरे सामरिया में ग्रामीण पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ग्राम सामरिया पहाड़ी पर बसा है। यहां के लोगों को पानी का इंतजाम करने के लिए दो किलोमीटर दूर एक हजार फीट गहरी खाई में उतरना पड़ता है जहां पास-पास स्थित दो झिरियों में पानी एकत्रित होता है, जिसे महिलाएं व बालिकाएं छोटे बर्तन यानी जग, लोटा, गिलास आदि से बड़े बर्तन में छानकर भरते हैं। इस दौरान एक बड़ा घड़ा व केन भरने में करीब आधा घंटा लग जाता है। इसके बाद महिलाएं व बालिकाएं सिर पर घड़े व केन रखकर पहाड़ी चढ़ती हैं और दो किमी दूर गांव पहुंचती हैं। बूंद-बूंद पानी सहेजने की इस जद्दोजहद में चार किमी पैदल आने-जाने में ग्रामीणों का पूरा दिन बिगड़ जाता है। जल मिशन योजना की सौगात गांव को मिली है, लेकिन उससे अभी पानी नहीं मिल पा रहा है।

गर्मी के दिनों में पीने के पानी को लेकर वनवासी क्षेत्र के लोगों की परेशानी शुरू हो जाती है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित नालछा विकासखंड की ग्राम पंचायत करमतलाई के ग्राम सामरिया में करीब 35 परिवार के लोग बूंद-बूंद पानी सहेजने को मजबूर हैं। करीब तीन माह पूर्व गर्मी की शुरुआत से ही ग्रामीण पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। सामरिया तालाब पेयजल का मुख्य स्रोत है, लेकिन यह तालाब गर्मी की शुरुआत होने से पूर्व ही सूख जाता है। होली पर्व के बाद से ही ग्रामीण झिरी में एकत्रित हो रहे पानी पर निर्भर थे, लेकिन शनिवार से झिरी ने भी दम तोड़ दिया है। इसमें अब पानी कम आने लगा है। झिरी का पानी लेने पहुंची कई महिलाओं को खाली बर्तन लेकर घर लौटना पड़ा।

एक हजार फीट गहरी खाई में उतरकर झिरी से भरते हैं पानी

सामरिया के ग्रामीणों को सुबह पांच बजे पानी की चिंता करनी पड़ती है। जागने के बाद ही लोग पीने के पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं। पानी के लिए लोग करीब दो किलोमीटर दूर एक हजार फीट गहरी खाई में उतरते हैं। जहां झिरी से बूंद-बूंद पानी एकत्रित कर बर्तनों में भरते हैं और खड़ी पहाड़ी पर चढ़कर पानी लाते हैं। अंधेरे में पहाड़ी क्षेत्रों में जाने पर जंगली जानवर का खतरा बना रहता है। इस दौरान परिवार का हर सदस्य पीने के पानी की व्यवस्था में जुटा रहता है। झिरी का पानी खुली अवस्था में होने के कारण कीटाणु भी शामिल रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में पानी पीना पड़ रहा है।

जल मिशन योजना हुई फेल?

जल मिशन योजनांतर्गत गांव में पेयजल टंकी बनाई गई थी। साथ ही पाइप लाइन डाली गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ माह पूर्व इससे पानी देना शुरू किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में पानी मिलना बंद हो गया। ऐसे में ग्रामीण फिर से पेयजल के लिए लोग परेशान होने लगे। जवाबदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

झिरी में पानी हुआ कम, ग्रामीणों की चिंता बढ़ी

गांव के सुभाष मेड़ा, कुमारी पाचूड़ी बाबूलाल आदि ने बताया कि झिरी में भी पानी की आवक कम हो गई है। इस कारण शनिवार को गांव की आधी महिलाओं को खाली बर्तन लेकर घर लौटना पड़ा। ऐसे में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अब भी एक माह बारिश में बचा है। ऐसे में ग्रामीण पीने के पानी की व्यवस्था कैसे करेंगे।

मैकेनिकल टीम काम कर रही है

जल मिशन योजनांतर्गत ग्राम सामरिया में मैकेनिकल टीम काम कर रही है। मैं दिखवाता हूं कि कहां दिक्कत आ रही है।

राकेश डावर, एसडीओ, स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग नालछा

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close