कैलाश मुकाती

मनावर (नईदुनिया न्यूज)। स्कूली शिक्षा को जारी रखने में बाल श्रम बड़ी बाधा बना हुआ है। बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा कई तरह के जतन किए जाते हैं। बावजूद इसके क्षेत्र में बच्चे मजदूरी करते नजर आ रहे हैं। इस समय जिन बच्चों को स्कूल में रहना चाहिए, वे सुबह स्कूल समय से लेकर शाम तक खेतों में मजदूरी करते नजर आ रहे हैं, जो चिंताजनक है। बच्चों ने स्कूलों से मुंह मोड़कर मजदूरी से नाता जोड़ लिया है।

गौरतलब है कि 17 जून को स्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया गया था। बच्चों को तिलक लगाकर व पुस्तकें बांटकर स्कूलों में प्रवेश कराया गया था। उस दौरान भी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम थी। यही स्थिति अब भी बनी हुई है। क्षेत्र के कई स्कूलों में बच्चे गायब हैं। इनमें कई बच्चे तो मजदूरी करने जा रहे हैं।

150 से 250 रुपये मिलते हैं प्रतिदिन

बाल श्रम की स्थिति चिंताजनक है। इस बात का प्रमाण मनावर तथा आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। जहां प्रतिदिन कई बाल श्रमिक खेत में मजदूरी करने के लिए पिकअप वाहन से आते-जाते दिखाई देते हैं। कहने को तो ये मजदूर हैं, लेकिन इनमें अधिकांश बच्चे 12 से 16 वर्ष की उम्र के बीच के हैं। इन बच्चों को मजदूरी के तौर पर प्रतिदिन 150 से 250 रुपये तक मिलते हैं। इसमें 30 रुपये आने-जाने में खर्च हो जाते हैं।

जान जोखिम में उठाकर करते हैं सफर

बड़ी चिंता का विषय यह है कि जिन लोडिंग वाहनों से ये बच्चे आते-जाते हैं, उसमें सुरक्षा को लेकर किसी तरह तरह के इंतजाम नहीं है। क्षेत्र से प्रतिदिन सुबह लोडिंग वाहन से बड़ी संख्या में बाल श्रमिक आवाजाही करते हैं। इनमें अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जो माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई करने वाले हैं। जिनकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है। इनमें कई बच्चे तो ऐसे हैं, जिनके आधार कार्ड भी नहीं बने हैं। वे स्कूल में जाने की बजाए सुबह आठ से नौ बजे के बीच टिफन लेकर मजदूर करने घर से निकल पड़ते हैं। वाहनों में उन्हें ठूंस-ठूंसकर भरकर ले जाया जाता है। जान का जोखिम उठाकर जाने वाले बच्चों का वाहन प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मनावर से गुजरता देखा जा सकता है। मिनी ट्रक व पिकअप वाहनों के ऊपर लटकते हुए ये बच्चे नजर आते हैं, जिन्हें गिरने का भी कोई डर नहीं रहता है। इन्हें देखकर राहगीर लोग भी अचंभित हो जाते हैं, लेकिन वाहन चालकों को किसी तरह की कार्रवाई का डर नहीं रहता है। बच्चों से मजदूरी के तौर पर खासकर खेतों में निंदाई, गुड़ाई, बोवनी आदि खेती संबंधित कार्य करवाए जाते हैं।

शिक्षकों की भी कमी

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के चलते क्षेत्र के कई शिक्षकों की ड्यूटी अन्य क्षेत्रों में लगी हुई है। प्रशिक्षण व चुनाव संबंधी अन्य कार्य में व्यस्त होने से शिक्षक भी स्कूलों में नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में वे स्कूल की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। चुनाव संपन्ना होने के बाद ही शिक्षक स्कूलों में आएंगे। इसके बाद ही वे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास शुरू करेंगे।

चुनाव बाद घर-घर जाकर सर्वे कराएंगे

चुनाव प्रक्रिया में ड्यूटी होने से शिक्षक व्यस्त हैं। जैसे ही चुनाव प्रक्रिया खत्म होगी शिक्षकों को घर-घर भेजकर सर्वे कराया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल से वंचित नहीं हो। हमने चुनाव के पहले भी शिक्षकों से सर्वे कराया था। इसमें जो बच्चे शाला में उपस्थित नहीं होते थे या जिनके नाम दर्ज नहीं है, उन्हें जोड़ा गया है। आगे भी सर्वे करवाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। -अजय मुवेल, बीआरसी, मनावर

ओवरलोडिंग वाहनों पर कार्रवाई करेंगे

ओवरलोडिंग करने वाले वाहन चालकों पर पूर्व में कार्रवाई की गई थी। यदि नगर से ओवरलोड वाहन गुजरते हैं तो सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -नीरज बिरथरे, थाना प्रभारी, मनावर

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close